बेगमगंज, नवदुनिया प्रतिनिधि। इन दिनों पर्यूषण पर्व चल रहा है। इस पावन मौके पर जिले के बेगमगंज कस्‍बे में जैन समाज के लोगों ने अनूठा उपवास रखा है। उन्‍होंने 24 घंटे मोबाइल, इंटरनेट से दूर रहने का संकल्प लिया है। यह संकल्प उन्होंने मुनि समता सागर की प्रेरणा से लिया। जैन समाज के अध्‍यक्ष अक्षय जैन ने इसकी शुरुआत की। वे इसे इंटरनेट मुक्त 'उपवास' कह रहे हैं। गुरुवार सुबह समाज के सभी लोग बिना मोबाइल के मंदिर आए। इस उपवास की नगर में चर्चा हो रही है। उनसे प्रेरित होकर दूसरे लोग भी बोल रहे हैं कि अब हम भी महीने में एक बार ई-उपवास करेंगे! ।

जैन समाज के अध्‍यक्ष अक्षय जैन ने इसे डिजिटल फास्टिंग नाम दिया है। वह कहते है युवाओं मै या लोगों में जो लत लगी वो इतनी जल्दी नहीं जाएगी। इसीलिए यह पहल की गई है। इस आदत पर काबू पाने के लिए धीरे-धीरे इसे नियंत्रित करना होगा। हमने लोगों से यही कहा कि वे अपने मोबाइल मंदिर मे 24 घंटे के लिए बंद करके छोड़ दें। उनकी इस अपील पर बड़ी संख्‍या में लोगों ने मंदिर में अपने मोबाइल जमा करवाए।

गौरतलब है कि दो दिन पूर्व ही मुनि समता सागर ने अपने प्रवचन में कहा था कि भारतीय संस्कृति भोग प्रधान नहीं योग प्रधान एवं साधना प्रधान हैं। जैन संस्कृति में साधनों को महत्व नहीं है। उन्होंने कहा कि आज की संस्कृति पाश्चात्य कल्चर में ढल कर भोग प्रधान संस्कृति को जन्म दे रही है। आत्म शांति, आत्म संतोष और आत्म शुद्धि का एक मात्र मार्ग तपस्या ही है। इस तपश्‍चरण को प्राप्त करने के लिए व्यक्ति को अपना आध्यात्मिक लक्ष्य बनाना पड़ेगा एवं खानपान की दिनचर्या से लेकर मर्यादित रहन सहन रखना पड़ेगा। मुनि श्री ने उपवास आदि की प्रेरणा देते हुए कहाकि खाने-पीने का त्याग कर उपवास तो बहुत किया है, इस बार एक दिन विभिन्न इलेक्ट्रॉनिक साधनों से दूर रहकर इस तरह से उपवास करना है। ताकि आप दिनभर निश्चिंत और निर्विकल्प रह सकें।

इस अवसर पर संघस्थ मुनि श्री महासागर जी ने कहा कि संसारी प्राणी इस संसार में विषयों में आसक्त होकर असंयम में पड़ा हुआ है एवं मन के वशीभूत होकर इंद्रियों की सुख-सुविधाओं में दिन रात संलग्न रहता है।

उन्होंने कहा कि मन की इच्छाओं पर नियंत्रण करना ही तपस्या का एक सूत्रीय मार्ग है। तपस्या का मुख्य मार्ग तो संत साधकों के लिए है, किंतु गृहस्थ भी तपश्‍चरण के मार्ग को अपनाते हैं।

Posted By: Ravindra Soni

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