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सिलवानी। देखरेख के अभाव में शहीद स्तम्भ दुर्दशा का शिकार है।

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तहसील कार्यालय परिसर में करीब 60 साल पूर्व प्रशासन द्वारा शहीद स्तंभ का निर्माण कराया गया था, ताकि आने वाली पीढ़ी शहीद स्तंभ को देख कर वीर शहीदों की गाथाओं का स्मरण कर सकें, लेकिन तहसील कार्यालय परिसर में स्थित शहीद स्तंभ अपनी दुर्दशा की कहानी बयां कर रहा है। नियमित सफाई न होने से शहीद स्तंभ के आस पास गंदगी फैली हुई है। शहीद स्तंभ के चारों तरफ बनी सीमेंट की रैलिंग क्षतिग्रस्त हो गई है। इस स्थान की न तो कभी पुताई ही कराई जाती है और न ही सफाई। यहां तक कि शहीदों की गाथा का स्मरण कराने वाले इस स्थान पर प्रकाश की व्यवस्था भी नहीं है।

शहीद स्तंभ को संबारने व साज-सज्जाा किए जाने के लिए ना तो प्रशासन के अधिकारियों और न ही जनप्रतिनिधियों ने कभी प्रयास ही किया। यहां तक कि शहीदों के नाम पर राजनीति करने वाले विभिन्न राजनैतिक दलों के नेताओं ने भी कभी शहीद स्तंभ की तरफ मुड़कर भी नहीं देखा। शहरवासियों ने प्रशासन के अधिकारियों से मांग की है कि वह शहीद स्तंभ को व्यविस्थत कराएं। साथ ही यहां पर शहीदों के नाम व उनकी कीर्ति को भी अंकित कराएं, प्रकाश की उचित व्यवस्था कराने के साथ ही नियमित रूप से साफ सफाई की व्यवस्था भी कराएं ताकि शहीद स्तंभ को आकर्षक बनाया जा सके।

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मनुष्य का अहंकार उसके जीवन को नष्ट कर देता हैः रामकृपालु उपाध्याय

- मां कर्मा मैदान पर आयोजित श्रीमद् भागवत कथा में भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं का किया वर्णन

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सिलवानी। श्रीमद् भागवत कथा सुनने बड़ी संख्या में श्रद्घालु पहुंच रहे हैं।

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नगर के कर्मा मैदान में चल रही श्रीमद भागवत महापुराण कथा के पांचवें दिन रविवार को श्रद्घालुओं को कथा सुनाते हुए पं. रामकृपालु उपाध्याय ने कहा कि जीवन में अहंकार बिल्कुल भी नहीं होना चाहिए। यदि जीवन में अहंकार आ गया है तो हमारे जीवन को अहंकार नष्ट कर देता है। व्यक्ति को अहंकार कई तरह का रहता है, उसमें धन, बल, बुद्घि, ज्ञान, शरीर, धन-धान्य, भूमि, भवन, वाहन, पद, प्रतिष्ठा, यश, नाम, वैभव, कुल, परिवार, बढ़ाई, सगे संबंधी का मिथ्या अहंकार आ जाता है, जो कि हमें हमारे जीवन को आध्यात्मिकता से विमुख कर देता है। जीवन का सर्वोधा लक्ष्य आत्मिक उन्नति होनी चाहिए, यह प्रेरणा श्रीमद् भागवत महापुराण की कथा में हमें प्राप्त होती है। इसलिए अहंकार जो हमारे मन को परमात्मा के चरणों में जाने से रोकता है, उस अहंकार को त्याग कर परमात्मा की शरण का आश्रय ग्रहण करना चाहिए।

कथा वाचक ने भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं का मनोहारी चित्रण करते हुए उनके बचपन की अनेक मधुर लीलाओं का वर्णन किया। उन्होंने पूतना वध की कथा सुनाते हुए कहा कि पूतना भगवान श्रीकृष्ण के प्राण लेने के लिए मथुरा से पहुंची थी, लेकिन खुद अपने प्राणों को गंवा बैठी। भगवान श्रीकृष्ण ने उसके प्राण हर लिए, इसी प्रकार अघासुर बकासुर नामक दैत्यों को भी भगवान श्रीकृष्ण ने उनके प्राणों से मुक्ति दे दी। पंडित उपाध्याय ने भगवान श्री कृष्ण के द्वारा ब्रह्मा जी के घमंड को नष्ट करने के बारे में बताया कि ब्रह्माजी जो सृष्टि के सृजनकर्त्ता हैं, उनको घमंड हो गया था कि बृज में नंदगोप के पुत्र के रूप में यह जो है, वह श्रीकृष्ण एक साधारण बालक हैं। यह लीलाओं के माध्यम से बृज वासियों को भ्रमित कर रहे हैं। तो उन्होंने भगवान श्री कृष्ण की परीक्षा लेने की ठानी। परीक्षा लेने के उद्देश्य से वह पृथ्वी लोक पर आए। बृज वासियों को गोवंश के साथ एक गुफा में बंद कर दिया। यह देखकर भगवान श्री कृष्ण ने अपनी योग माया से उतने ही गोवंश और गांव वालों को तैयार करके गोकुल आ गए। यह देख कर ब्रह्मा जी ने अपनी गलती का सुधार करते हुए भगवान श्री कृष्ण से क्षमा याचना की और उन्हें परब्रह्म परमात्मा का अवतार स्वीकार करके उनकी चरण वंदना की। श्रीमद् भागवत महापुराण कथा के आयोजक मंडल ने आरती पुष्पांजलि की एवं कथा में उपस्थित सभी श्रद्घालुओं का आभार व्यक्त किया। कथा का समापन 12 नवंबर को होगा।

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दूसरे दिन भी अलर्ट पर रहा प्रशासन

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सिलवानी। शहर में शांति व्यवस्था बनाए रखने पुलिस के साथ गश्त करते एसडीएम।

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रविवार को भी प्रशासन पूरी तरह सतर्क रहा। किसी भी तरह की अनहोनी से निपटने के लिए पुलिस व प्रशासन के अधिकारी मुस्तैदी के साथ ड्यूटी करते रहे। नगर में बनाए गए प्वाइंटों पर पुलिस जवानों के साथ ही राजस्व विभाग, नगर परिषद, कृषि उपज मंडी, वन विभाग सहित अन्य विभागों के अधिकारी तैनात रहे। नगर की प्रत्येक गतिविधि पर प्रशासन के अधिकारियों के द्वारा नजर रखी जा रही है। एसडीएम विशाल सिंह, एसडीओपी पीएन गोयल, तहसीलदार सीजी गोस्वामी, टीआई आशीष धुर्वे लगातार नगर का भ्रमण कर अधीनस्थ कर्मचारियों को आवश्यक निर्देश देते रहे। पुलिस के द्वारा अधिकारियों की उपस्थिति में नगर में रात्रि के दौरान फ्लेग मार्च निकाल कर नागरिकों को सुरक्षा का भरोसा दिलाया गया। नागरिकों के द्वारा प्रशासन को सहयोग दिया जा रहा है। श्रीराम जन्म भूमि मसले पर उधा न्यायालय के द्वारा सुनाए गए फैसले का प्रत्येक वर्ग के द्वारा स्वागत किया जा रहा है।

Posted By: Nai Dunia News Network