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-भय प्रकट कृपाला दीनदयाला के उद्घोष के साथ हुआ कृष्ण जन्म

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रायसेन। कथा सुनाते रामानंदाचार्य स्वामी रामललाचार्य महाराज।

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रायसेन। कथा के दौरान श्री कृष्ण जन्मोत्सव का मंचन किया गया।

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रायसेन। कथा में श्रद्घालु नृत्य करने से स्वयं को रोक नहीं पाए।

रायसेन। नवदुनिया प्रतिनिधि

नगर में भागवत कथा के चतुर्थ दिवस पीठाधीश्वर जगतगुरु श्री रामानंदाचार्य स्वामी रामललाचार्य महाराज मानसपीठ खजुरी ताल सतना के श्रीमुख से भगवान श्री कृष्ण के जन्म की गाथा का वर्णन किया गया। भागवत कथा में महाराज श्री द्वारा कथा का

प्रारंभ 'भजमन श्री राधे गोपाल श्री श्याम राधे' भजन की स्तुति के साथ कीर्तन शुरु किया। रविवार को कथा के दौरान श्रीकृष्ण जन्मोत्सव का मंचन हुआ।

कथा के चौथे दिन महाराज रामलला चार्य ने बताया कि गोविंद को साधने से जग सध जाता है, गोविंद अनुकूल हों तो सब अनुकूल होता है। ऐसी महिमा है भागवत कथा श्रवण की। व्यक्ति को अपनी वृत्ति पर संयम रखना चाहिए। व्यक्ति जैसा चिन्तन करता है, वैसी ही योनी मिलती है। भरत महाराज की जन्म-जन्मों की कथा के संबंध में भक्तों को बताया। जड़ भरत की कथा का वर्णन भक्तों को बताया। भगवान कृष्ण जन्म से पूर्व प्रभु की अनेकों लीलाओं का वर्णन किया। हिरण्यकश्यप-भक्त प्रह्लाद की लीला का वर्णन भक्तों को बताया। भागवत कथा में भगवान राजा राम के प्रतापी वंश की गाथाओं का वर्णन करते हुए साप्ताहिक रविवारीय बाजार लगाने की शुरुआत राजा रघु के समय अयोध्या जी से होने की बात कही। अपने सैनिकों को राजा रघु के निर्देश थे कि कोई बाजार से धन की कमी के कारण खाली हाथ वापिस न जाये, ऐसा था राम राज। भागवत कथा में कृष्ण जन्म से पहले राम के जीवन को जीवन में उतारने की बात व्यासगादी से कही। कंस देवकी के बीच हुए संवाद को भक्तगणों बताया। देवकी कारागार में है जिस देवकी को ससुराल में होना चाहिए, जिस देवकी को राज परिवार में होना चाहिए, वह आज कारागार में हैं। देवकी की पहली संतान से लेकर आठवीं संतान के जन्म होने का भगवत कथा का वर्णन किया। आठवीं संतान आते ही ब्रह्मांड से देवता भगवान के प्रकट होने के लिये स्तुतिगान करने लगे। श्री कृष्णा के भजन को सुन भक्तगण झूम उठे। नवे माह में भगवान देवकी के सामने खड़े होकर कहने लगे माँ मैं तेरे पुत्र रूप में द्वापर में तेरी कोख से जन्मा हूं। कृष्ण जन्म होते ही कथा स्थल भगवान के जयकारों से गूंज उठा। मानो रामलीला मैदान की धरा प्रभुमय हो गई। कथा के मुख्य यजमान दिलीप त्रिपाठी एवं श्रीमती सुनीता त्रिपाठी हैं।

Posted By: Nai Dunia News Network