रायसेन। नवदुनिया प्रतिनिधि

नाबालिग लड़की के साथ बलात्कार करने वाले को न्यायाधीश ने बीस वर्ष का कारावास और पांच हजार रुपये जुर्माना से दंडित किया है। जिला न्यायालय की मीडिया प्रभारी किरण नंदकिशोर ने बताया कि न्यायालय अनन्य विशेष न्यायाधीश ने लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम 2012 के आरोपित आजाद सहरिया आत्मज पप्पू सहरिया वर्ष 26 वर्ष निवासी ग्राम कुदवई थाना रायसेन को नाबालिग के साथ बलात्कार करने के आरोप में दोषसिद्ध पाए जाने पर भादसं की धारा 363, 366, 376तए,बी, 376त2,एन एवं लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम 2012 की धारा 5 एम, ध 6, 5 एल,6 के अंतर्गत आरोपित को 20 वर्ष का कठोर कारावास एवं 5000 रुपये अर्थदण्ड से दण्डित किया गया। इस प्रकरण में राज्य की ओर से भारती गेडाम विशेष लोक अभियोजक ने पैरवी की है। प्रकरण का संक्षेप में विवरण इस प्रकार है किए अभियोक्त्‌री के पिता द्वारा थाना कोतवाली रायसेन में गुमशुदगी रिपोर्ट इस आशय की दर्ज कराई गई कि दिनांक 22- 4-2020 की रात्रि 11 बजे वह तथा उसकी पत्नी व लड़की खाना खाकर सो गए थे। अगले दिन सुबह 6 बजे उठे तो देखा कि अभियोक्त्‌री आयु 11 वर्ष घर पर नहीं थी। अभियोक्त्‌री की आसपास रिश्तेदारों में तलाश की, किंतु उसका कोई पता नहीं चला। उसे शंका है कि आरोपित उसकी पुत्री को बहला-फुसलाकर भगाकर ले गया है। जिसके आधार पर थाना कोतवाली रायसेन में आरोपित के विरुद्ध प्रथम सूचना रिपोर्ट लेखबद्ध की गई एवं प्रकरण पंजीबद्ध किया गया। प्रकरण की संपूर्ण विवेचना एवं आवश्यक अनुसंधान उपरांत आरोपी के विरुद्ध अभियोग पत्र न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया गया।

महिला को आत्महत्या के लिए उकसाने वाले को सात वर्ष की सजा

बेगमगंज। नवदुनिया न्यूज

प्रथम अपर सत्र न्यायाधीश विवेक शिवहरे ने आरोपित हरीशंकर पिता उमेद सेन निवासी सिलवानी को महिला को आत्महत्या के लिए उकसाकर एवं धोखा देकर प्रताड़ित करने पर धारा 306 भादवि में 7 वर्ष के कठोर कारावास एवं 2500 रुपये के अर्थदण्ड से दण्डित कर जेल भेजा है। उक्त प्रकरण में शासन की ओर से पैरवी बद्री विशाल गुप्ता अपर लोक अभियोजक ने की है। गुप्ता ने बताया कि घटना ग्राम सिलवानी थाना के ग्राम बेगवा कला की है। मृतिका अपने पति एवं दो संतानों के साथ बेगवा खुर्द में रहती थी। उसके पड़ोस में आरोपित रहता था। उसके आठ माह से मृतिका से अवैध संबंध थे। जिसमें उसके पति ने पूर्व में भी आरोपित के विरुद्ध रिपोर्ट दर्ज कराई थी। मृतिका को आरोपित द्वारा प्रताड़िता करने से वह परेशान थी। अभियुक्त ने उसे रखने से मना कर दिया मृतिका ने परेशान होकर मिट्टी का तेल डालकर अपने शरीर में आग लगा ली। प्रकरण में अभियोजन की ओर 11 साक्षी पेश किए गए। जिनमें कार्यपालिक मजिस्ट्रेट विनोद कुमार साहू ने मृतिका के मृत्यु कालीन कथन लिया। चिकित्सक द्वारा मृतिका के कथन के समय स्वस्थ रहने की साक्ष्‌य दी। इस संबंध में मृतिका के पति एवं ससुर द्वारा साक्ष्‌य में आरोपित के प्रताड़ना के तथ्य बताए। अन्य साक्षियों से भी मृतिका को प्रताड़ित करना और इसके कारण उसकी आत्महत्या करने का कारण पाते हुए न्यायाधीश ने प्रकरण में संपूर्ण साक्ष्‌य का विवेचन कर महत्वपूर्ण न्याय दृष्टांतों के आधार पर अपराध सिद्ध पाते हुए आरोपित को 7 वर्ष के कठोर कारावास से दण्डित किया तथा उच्चतम न्यायालय के न्याय दृष्टांत अंकुश शिवाजी गायकवाड़ विरुद्ध महाराष्ट्र राज्य के न्याय सिद्धांत अनुसार मृतिका के वारिसों को प्रतिकर प्रदान किए जाने के लिए भी अनुशंसा की है जो मृतिका के पुत्र श्रेयांश और पुत्री श्रीया को दिया जाएगा।

Posted By: Nai Dunia News Network

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