रायसेन। नवदुनिया प्रतिनिधि

हलाली डैम के निर्माण को दो दशक बीत गए है, लेकिन अभी तक चैनल गेट नहीं लगाए गए। पिछले दिनों हुई अति वर्षा के कारण डैम में क्षमता से अधिक 146 फीसद जलभराव हो गया। इस कारण सैकड़ों किसानों की हजारों एकड़ खेतों में लगी धान व सोयाबीन की फसल बर्बाद हो गई है। डैम की जलभराव क्षमता 1508 फीट तक के लिए सुरक्षा दीवार बनी हुई है। इससे अधिक पानी एकत्र होने पर उसकी निकासी की अलग व्यवस्था है। तीन दिनों पूर्व 36 घंटे हुई लगातार तेज वर्षा और कोलार, कलियासोत तथा दाहोद बांधों के गेट खोलने के कारण हलाली डैम की सुरक्षा दीवार से चार फीट ऊपर तक पानी बह रह था। डैम से अतिरिक्त जल निकासी के लिए बना छरछरा अति वर्षा में बौना साबित हुआ। इसका दुष्परिणाम यह हुआ कि डैम का बैकवाटर आसपास के सैकड़ों हेक्टेयर खेतों में भर गया। जिससे करीब दो सौ किसानों की 1500 हेक्टेयर भूमि डूब में आ गई। किसानों की कड़ी मेहनत से लगाई धान व सोयाबीन की फसलें पानी में बह गई हैं। डैम के क्षमता से अधिक जलभराव से न केवल फसलें तबाह हुई हैं बल्कि किसानों की उन उम्मीदों पर भी पानी फिर गया है जो उन्होंने फसल पैदावार के बाद अपनी बेटी-बेटों की शादी करने, घर-गृहस्थी का सामान जुटाने और रिश्तेदारी में जाकर खुशियां मनाने के लिए बनाई हुई थी। शासन-प्रशासन व जल संसाधन विभाग की कमजोरी व लापरवाही का खामियाजा क्षेत्र के गरीब किसान भुगत रहे हैं। बर्बाद हुई फसलों को हाथ में लेकर किसान अब सरकार से मुआवजा की गुहार लगा रहे हैं। गुरुवार को जल संसाधन मंत्री तुलसी सिलावट ने डैम का दौरा करते हुए प्रभावित किसानों को मुआवजा दिलाने का आश्वासन दिया है।

छरछरा ने निकाला जा रहा पानी

विभागीय अधिकारियों ने बताया कि हलाली डैम से 300 क्यूसेक पानी सलूज पाइंट से निकाला जा रहा है। जबकि 4014.46 क्यूसेक पानी छरछरा के माध्यम से बाहर निकल रहा है। हलाली डैम में गेट नहीं होने से जितनी तेजी से पानी की आवक हुई है उससे कम बहाव से पानी की निकासी हो रही है। इस कारण रायसेन, विदिशा व भोपाल जिले के 29 गांवों की करीब 1500 हेक्टेयर भूमि बैकवाटर की वजह से डूब में आ गई है। ग्राम बूदोन, नीनोद, अंबाड़ी के किसान हरीशंकर, कालूराम शर्मा, बीरबल, मुकेश, सौरभ, फूलसिंह व शरीफ खान इत्यादि ने बताया कि उनकी पूरी फसल बर्बाद हो गई है।

गेट का निर्माण कार्य चल रहा

हलाली डैम का निर्माण 1974 में हुआ था। तब से यहां केवल सुरक्षा दीवार के माध्यम से पानी रोका जाता है। पानी निकासी के लिए गेट नहीं बनाए हैं। वर्ष 2016 में आई बाढ़ के कारण सरकार ने डैम में पांच गेट बनाने की स्वीकृत दी थी। वर्तमान में जहां से अतिरिक्त जल निकासी के लिए वेस्ट वीयर बना है वहीं करीब 24 करोड़ की लागत से पांच गेट बनाए जा रहे हैं। प्रत्येक गेट की लंबाई 9 मीटर और चौड़ाई 5 मीटर की होगी। ये गेट बांध के सिल लेवल 456.15 मीटर से बनाए जा रहे हैं। हलाली पर गेट निर्माण होने से वेस्ट वीयर का दायरा मौजूदा 41 मीटर बढ़कर 57. 50 मीटर हो जाएगा। इसकी निर्माण एजेंसी भोपाल की कंस्ट्रक्शन कंपनी मेसर्स अंब्रीश त्रिपाठी भोपाल द्वारा किया जा रहा है। बांध परियोजना से जुड़े अधिकारियों के मुताबिक मार्च 2023 तक गेट निर्माण का कार्य पूर्ण लिया जाएगा।

बांध में गेट नहीं होने के कारण किसानों को समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। किसानों की फसलें डूब रही हैं और उनका नुकसान हो रहा है। 24 करोड़ की राशि से पांच गेट का निर्माण कराया जा रहा है। अगली बारिश के पहले इस डूब की समस्या का समाधान हो जाएगा। प्रभावित किसानों को फसल नुकसान का मुआवजा दिलाने सीएम से बात की है।

तुलसीराम सिलावट, जल संसाधन मंत्री।

जिला प्रशासन, कृषि तथा जल संसाधन विभाग को बांध के डूब प्रभावित किसानों की खराब हुई फसलों का सर्वे करने के निर्देश दिए हैं। सर्वे रिपोर्ट शासन को भेजकर किसानों को समुचित मुआवजा दिलाया जाएगा। जमुनिया गांव में पुलिया निर्माण के निर्देश भी दिए।

- प्रभुराम चौधरी, क्षेत्रीय विधायक व स्वास्थ्य मंत्री।

Posted By: Nai Dunia News Network

NaiDunia Local
NaiDunia Local
  • Font Size
  • Close