रायसेन। थूक लगाकर फल बेचने का एक वीडियो शुक्रवार को वायरल होने के बाद फल विक्रेता शेरू मियां को शनिवार सुबह पुलिस ने कोरोना टेस्ट कराए जाने के उपरांत पठारी उपजेल भेज दिया है। उनकी कोरोना जांच की रिपोर्ट सोमवार तक आएगी। वहीं शेरू की बेटी फिजा का कहना है कि उनके पिता की मानसिक स्थिति ठीक नहीं है, एक पुराना वीडियो वायरल होने के बाद उसे कोरोना से जोड़ दिया गया अब उनके पिता और परिवार के लोग किसी का सामना तक नहीं कर पा रहे है।

गौरतलब है कि शेरू मियां का यह वीडियो कल सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हुआ था और इसे 16 फरवरी को बनाकर सबसे पहले टिकटॉक पर लेने वाले दीपक नामदेव द्वारा शुक्रवार दोपहर को थाने में आवेदन देने पर पुलिस ने मामला जांच में लेकर प्रकरण पंजीबद्ध कर लिया था और शेरू को विशेष न्यायालय में पेश किया था जहाँ से उसे जेल भेजे जाने के आदेश किए गए थे।

शाम हो जाने और कोरोना जांच शेष रहने के कारण शनिवार सुबह पुलिस ने पहले उसका टेस्ट करवाया और फिर पठारी उपजेल भेज दिया। इस मामले में कोतवाली टीआई जगदीश सिंह सिद्धू का कहना है कि मानसिक स्थिति से जुड़ी बात तो मेडिकल विशेषज्ञ ही स्पष्ट कर सकते हैं शेरू के खिलाफ जो कल शिकायत हुई थी उसकी जांच में यह वीडियो सही लेकिन अभी का न होकर 16 फरवरी का पाया गया जिससे भादवि की धारा 269-270 में प्रकरण पंजीबद्ध कर उन्हें न्यायालय में पेश किया था।

उल्लेखनीय है कि फलों पर थूक लगाकर फल जमाने का रायसेन का एक वीडियो सोशल मीडिया पर देश भर में वायरल हुआ था वीडियो को लेकर लोगों ने जमकर अपनी नाराजगी भी जाहिर की थी। वीडियो के सामने आते ही रायसेन एसपी मोनिका शुक्ला ने कोतवाली थाने को जांच के बाद कार्रवाई करने के निर्देश दिए थे।

पुलिस ने माना पुराना है वीडियो

फल विक्रेता शेरू के इस वीडियो को पुलिस भी पुराना मान चुकी है। इसके सामने आने के बाद जांच और कार्रवाई के निर्देश एसपी ने दिए थे। इस मामले में एसपी मोनिका शुक्ला का कहना है कि शिकायत पर पुलिस ने जांच और कार्रवाई की है। मामला संज्ञान में आने के बाद दूसरे फल बेचने वालों पर भी नजर रखी जा रही है।

बेटी बोली...कोई तो हमारी गरीबी देखता, पिता की मानसिक स्थिति ठीक नहीं

रायसेन के गवोइपुरा में टीन वाली मस्जिद के पास रहने वाले 57 वर्षीय शेरू की बेटी फिजा का कहना है कि मेरे पिता की मानसिक स्थिति ठीक नहीं है। अब्बू का एक पुराना वीडियो सामने आने के बाद असलियत समझने की किसी ने कोशिश ही नहीं की।

उसका कहना है कि अब्बू की तबियत भी ठीक नहीं रहती है उन्हें कई साल पहले दूध का काम अच्छा चलने के दौर में नोट गिनने की आदत थी इसके बाद अचानक उनके बीमार होने से धंधा खत्म से हो गया फिर वापिस फल का ठेला लगाने लगे। ऐसा कभी कभी नोट गिनने जैसा व्यवहार करते रहते है उनकी मंशा थूक लगाना नहीं थी।

बेटी का कहना है कि कल वो सब्जी बेंच रहे थे उन्हें कई जगह पुलिस मिली सबने उनकी पिटाई की। फिजा का कहना है कोई हमारे घर आकर हमारी गरीबी तो देख लेता फिर सोशल मीडिया पर हमारा मजाक बनाता। उसका कहना है कि लोगों की मजहबी लड़ाई में हमारा तो परिवार ही बर्बाद हो गया।

क्या कहती हैं भादवि की धारा 269-270

धारा- 269: किसी बीमारी को फैलाने के लिए गैरजिम्मेदाराना काम किया गया। इससे किसी अन्य व्यक्ति की जान को खतरा हो सकता है। इस धारा के तहत अपराधी को छह महीने की जेल या जुर्माना या फिर दोनों की सजा हो सकती है।

धारा- 270 : किसी जानलेवा बीमारी फैलाने के लिए किया गया घातक या फिर नुकसानदायक काम इस काम से किसी अन्य व्यक्ति की जान को खतरा हो सकता है। इस धारा के तहत नुकसानदेह शब्द ये दर्शाता है कि आरोपी ने जानबूझकर ये कदम उठाया है दोनों ही धाराओं में सजा की अवधि लगभग एक समान है।

क्या कहते है कानूनविद

यह मामला जमानती है लेकिन उसके लिए जमानत की अर्जी लगाई जाए।

Posted By: Sandeep Chourey

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