रायसेन। व्यापारियों की दो दिवसीय हड़ताल के बाद गुरुवार को मंडी भले ही खुली दिखी, परंतु अनाज की खरीद-बिक्री को लेकर रौनक नजर नहीं आई। आम दिनों में कृषि उपज मंडी रायसेन में रोजाना करीब पचास ट्रालियां गेहूं की बिक्री के लिए आती थीं। लेकिन आज करीब दस ट्रालियां भी नजर आईं। गेहूं के दाम भी अन्य दिनों की अपेक्षा कम रहे। गेहूं की नियमित नीलामी में आज न्यूनतम दो हजार रुपये से लेकर अधिकतम 26 सौ रुपये प्रति क्विंटत तक ही बोली लगाई गई। व्यापारियों की गेहूं खरीदी के प्रति रुचि दिखाई नहीं देने के कारण किसानों ने अपनी उपज को अन्यंत्र बेचना आरंभ कर दिया है। भारत सरकार ने गेहूं के निर्यात पर प्रतिबंध लगा दिया है। जिसके कारण व्यापारियों के मंसूबों पर पानी फिर गया है।

कटाई के बाद खरीदी शुरू कर दी थी

इस सीजन में गेहूं की कटाई होने के बाद से ही व्यापारियों ने बड़ी मात्रा में गेहूं की खरीदी शुरू कर दी थी। रूस-यूक्रेन युद्ध के कारण अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत के गेहूं की मांग बढ़ गई थी। विदेशों में गेहूं निर्यात करने से तगड़ा मुनाफे को देखते हुए व्यापारियों ने सभी मंडियों में गेहूं की जमकर खरीदी की थी। हालांकि किसानों को अपेक्षाकृत दाम कम ही मिले हैं। व्यापारियों ने समर्थन मूल्य पर गेहूं की खरीदी शुरू होने से पहले तो 18 सौ रुपये तक प्रति क्विंटल गेहूं खरीदा था। जिसकी शिकायत कई बार किसानों ने प्रशासन से की और चक्काजाम इत्यादि करते हुए विरोध जताया था। बाद में व्यापारियों ने अच्छे गुणवत्ता वाले गेहूं की 22 सौ से 26 सौ रुपये तक प्रति क्विंटल खरीदी की थी। जबकि व्यापारियों को विदेशों में गेहूं बेचने पर मोटा मुनाफा हो रहा था, लेकिन किसानों को उनकी उपज के दाम कम दी दिए गए।

गेहूं की बंपर पैदावार

जिला सहित पूरे प्रदेश में इस वर्ष गेहूं की बंपर पैदावार हुई है। जिले में ढाई लाख हेक्टेयर में गेहूं की बोवनी की गई थी। प्रति हेक्टेयर 50 क्विंटल के औसत अनुसार जिले में 12 लाख 50 हजार टन पैदावार हुई है। समर्थन मूल्य पर इस वर्ष सरकार ने छह लाख टन गेहूं खरीदी का लक्ष्‌य रखा है। जिसमें से करीब साढ़े चार लाख टन खरीदी हो गई है। शेष डेढ़ लाख टन खरीदी 31 मई तक पूरी हो जाएगी। जबकि मंडी में व्यापारियों ने करीब दो लाख टन गेहूं की खरीदी की है। लगभग एक लाख टन खरीदी और करने का अनुमान है। सरकारी खरीदी से करीब आधी मात्रा में व्यापारी निजी रूप से गेहूं की खरीदी करके विदेशों में निर्यात कर रहे हैं।

अनाज निर्यात करने से बढ़ती है महंगाई

कृषि अर्थव्यवस्था के जानकारों के अनुसार यदि बड़ी मात्रा में अनाज विदेशों में निर्यात करने से हमारे देश में महंगाई बढ़ने के आसार रहते हैं। किसानों को उनकी उपज के दाम तो देशी मुद्रा में मिलते हैं, लेकिन अनाज विदेशी मुद्रा में बेचकर व्यापारी मुनाफा कमाते हैं। व्यापारी विदेशी मुद्रा प्राप्त करके जब निवेश करते हैं तो आवश्यक वस्तुओं के दामों में बढ़ोतरी होती है। जैसा कि पिछले एक पखवाड़े से महंगाई का सूचकांक बढ़ गया है। इस कारण सरकार ने महंगाई को नियंत्रित करने के लिए निर्यात पर रोक लगाई है।

समर्थन मूल्य पर गेहूं की खरीदी का कार्य 31 मई तक चलेगा। सरकार द्वारा दिए गए लक्ष्‌य के अनुरूप करीब छह लाख टन खरीदी हो जाएगी। किसानों को समय पर भुगतान कराया जा रहा है। जिन किसानों का बैंक में खातों की गड़बड़ी के चलते भुगतान अटका है वे जिला सहकारी बैंक में सूचना देकर भुगतान प्राप्त कर सकते हैं।

- विवेक रंगारी, महाप्रबंधक

Posted By: Nai Dunia News Network

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