राजेश शर्मा, राजगढ़। राजगढ़ से दो बार सांसद रहे दिग्विजय सिंह मध्य प्रदेश के ऐसे दूसरे नेता हैं, जो कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष का चुनाव लड़ने जा रहे हैं। इससे पहले मप्र से शंकरदयाल शर्मा कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाए गए थे। वह अर्जुन सिंह सरकार में कृषि मंत्री भी रहे। जब वह 1993 में मुख्यमंत्री बने तो अनुज लक्ष्मणसिंह लगातार यहां से पांच बार सांसद चुने गए। इतना ही नहीं 2018 में पुत्र जयवर्धनसिंह कैबिनेट मंत्री बने तो वह भी राजगढ़ के प्रभारी बनाए गए। दिग्विजयसिंह

राजगढ़ से सरोकार रखने वाले ऐसे एकमात्र नेता हैं, जो राष्ट्रीय स्तर पर पहुंचकर कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष का चुनाव लड़ने जा रहे हैं। उनके अलावा किसी भी दल में राष्ट्रीय अध्यक्ष का चुनाव लड़ने का गौरव किसी अन्य नेता को नहीं मिला। राजगढ़ लोकसभा क्षेत्र में कांग्रेस यानि की दिग्विजयसिंह। कांग्रेस की राजनीति करना है तो वह बिना दिग्विजयसिंह के संभव नहीं हैं। यहां पर ब्लाक कांग्रेस, जिला कांग्रेस अध्यक्ष बनाने का मामला हो या फिर नपाध्यक्ष,

विधानसभा व लोकसभा के टिकट हो सब दिग्विजयसिं हकी मर्जी के बिना संभव नहीं होते। 1980 से लेकर आज तक 40 वर्ष में लोकसभा हो या विधानसभा टिकट बिना दिग्विजयसिंह की मर्जी के नहीं हो सके। दिग्विजयसिंह ने जब जिसको चाहा, तब उसी को टिकट दिया। शुक्रवार को दिल्ली में होने वाले नामांकन पत्र दाखिल कार्यक्रम में पूर्व मंत्री जयवर्धन सिंह, पूर्व सांसद लक्ष्मण सिंह, विधायक प्रियव्रत सिंह खींची, जिला पंचायत अध्यक्ष चंदरसिंह सौंधिया, राजगढ़ विधायक बापू सिंह तंवर, ब्यावरा विधायक रामचंद्र दांगी दिल्ली रवाना हुए।

दो बार लोकसभा जीते, राजगढ़ से सांसद रहते प्रदेशाध्यक्ष और मुख्यमंत्री बने

दिग्विजयसिंह का जन्म राजगढ़ लोकसभा क्षेत्र के अधीन आने वाले राघौ.गढ राजपरिवार में हुआ है। वह 1971 में पहली बार राधौ.गढ नगर पालिका के अध्यक्ष बने थे। इसके बाद 1977 व 1980 में राधागैढ़ से विधायक चुने गए। 1980 में अजुर्नसिंह कैबीनेट में उन्हें कृषि मंत्री बनाया गया। इसके बाद 1984 के लोकसभा चुनाव में राजगढ़ से सांसद चुने गए थे। फिर 1989 के चुनाव में उन्हें भाजपा के प्यारेलाल खंडेलवाल के हाथों हार का सामना करना पड़ा। 1991 के लोकसभा चुनाव में वह फिर राजगढ़ से सांसद चुने गए। वह तीन चुनाव लड़े, जिसमें से राजगढ़ से दो बार सांसद चुने गए। राजगढ़ सांसद रहते हुए ही उन्हें प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष की कमान सौंपी गई थी। साथ ही 1993 के विधानसभा चुनाव के समय जब कांग्रेस सत्ता में आई तो राजगढ़ सांसद रहते हुए ही उन्होंने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली, हालांकि बाद में छह माह के अंदर चांचौड़ा विधानसभा से विधायक चुने गए। वह नवंबर 2003 तक 10 वर्ष मुख्यमंत्री रहे। इसके अलावा उनके अनुज लक्ष्मणसिंह राजगढ़ से 1994 में लोकसभा का उपचुनाव जीते। फिर 1996, 1998, 1999 लगातार कांग्रेस से सांसद बने। 2004 में भाजपा से सांसद राजगढ़ से सांसद चुने गए थे। उनके पुत्र जयवर्धनसिंह 2018 में कैबीनेट मंत्री बने तो राजगढ़ के प्रभारी मंत्री बनाए गए।

Posted By: Nai Dunia News Network

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