सारंगपुर(नवदुनिया न्यूज)। मालवा का पीला सोना कहे जाने वाले सोयाबीन की फसल के दाम मंडियों में काफी कम हैं। इससे किसानों में काफी निराशा देखने को मिल रही है। इस बार मुनाफा तो दूर किसान लागत मूल्य निकालने की जद्दोजहद कर रहे हैं। सारंगपुर सहित अन्य मंडियों में नए सोयाबीन की आवक शुरू हो गई है। उत्पादन में गिरावट के बाद सोयाबीन किसानों को दोहरा झटका लगा है। दरअसल, मालवा का पीला सोना कहे जाने वाले सोयाबीन के दाम जमीन पर आ गए हैं।

सोयाबीन के कम दाम मिलने से खफा एक किसान की परेशानी का वीडियो भी किसानों के बीच खुब वायरल किया जा रहा है, इसमें किसान मंडी के बाहर अपना दुख जाहिर करते हुए कहता है कि इतना कम रेट में बेचने से बेहतर है कि पानी में बहा दें। किसान कहता है कि 3,100 रुपये रेट मिल रहा है। इससे तो लागत निकलना भी मुश्किल है। बीज, खाद, डीजल सब महंगा, लेकिन उपज सस्ता? ये कहां का न्याय है।

सारंगपुर क्षेत्र सोयाबीन के लिए जाना जाता है। सोयाबीन की खेती करने वाले किसान भी समृद्घ रहे हैं। लेकिन पिछले कुछ सालों से सोयाबीन किसानों के किस्मत में ग्रहण लगी हुई है। सोयाबीन की फसल जून और जुलाई के महीने में बोई जाती है, जबकि इसकी कटाई दीपावली के पहले हो जाती है। इस बार भी 62 हजार 130 हेक्टेयर में सोयाबीन की बोवनी हुई थी। किसानों को सबसे ज्यादा उम्मीद सोयाबीन की फसल पर रहती है। लेकिन अब ये उम्मीद भी टूटती दिख रही है।

इस बार मौसम ठीक रहने से सामान्य उत्पादन की उम्मीद है। इस बार लागत अधिक लगी है जबकि किसानों को सोयाबीन के कम दाम की दोहरी मार उठानी पड रही है। मंडियों में 7 हजार रुपये क्विंटल बिकने वाली सोयाबीन आज बमुश्किल आधे कीमत से कम यानी न्यूनतम मूल्य 3 हजार रुपये में बिक रही है। पड़ाना के किसान सरफराज अंसारी ने बताया कि एक एकड जमीन में करीब 15 हजार रुपये लागत आती है। अंसारी बताते हैं कि इस बार बमुश्किल एक एकड में औसतन साढे तीन से चार क्विंटल सोयाबीन की पैदावार की संभावना है। इस तरह उन्हें एक एकड़ के उपज का भाव 12 हजार रुपये तक ही मिल रहा है जबकि लागत 15 हजार है। यानी फायदा दो दूर सोयाबीन घाटे का सौदा बन गया है। किसान कांग्रेस के जिला मीडिया प्रभारी लक्ष्मीनारायण राठौर ने सोयाबीन उत्पादक किसानों कि दुर्दशा के लिए सरकार को जिम्मेदार बताया है। राठौर के मुताबिक मौसम की मार अपनी जगह है, किसानों को सबसे ज्यादा कॉर्पोरेट और सरकार के गठजोड की मार पड रही है। उन्होंने कहा कि बडे स्तर पर सोयाबीन के बीज की गुणवत्ता के साथ समझौते हुए। कीटनाशक दवाओं के नाम पर किसानों को लूटा जाता है। कॉरपोरेट लॉबी ने अपने फायदे के लिए सोयाबीन की उपज कम कराई है। एक तो उत्पादन कम है, ऊपर से मंडियों में व्यापारी रेट नहीं चढ़ने दे रहे हैं। किसानों की मजबूरी का हर जगह गलत फायदा उठाया जा रहा है।

सारंगपुर मंडी में इतने मिल रहे दाम

सारंगपुर मंडी में सोयाबीन की आवक की बात करते तो यह 300 से 400 क्विंटल सोयाबीन की आवक हो रही है। मंडी कर्मचारी बृजेश कुंभकार ने बताया कि सारंगपुर में इन दिनों न्यूनतम सोयाबीन के दाम 3 हजार रुपये प्रति क्विंटल तथा अधिकतम 4900 रुपये प्रति क्विंटल है। उनके मुताबिक औसत दाम किसानों को 4 हजार से 4200 रुपये तक मिल रहे है।

सोयाबीन की तेज गति से कटाई शुरू

वर्षा का दौर थमने के साथ ही मौसम खुलते ही किसानों ने खेतों का रुख किए हुए है। इस समय तेजी के साथ सोयाबीन की कटाई का काम तेज हो गया है। हालांकि जो खेत गीले हैं उनमें हार्वेस्टर मशीनों के नहीं जाने से किसानों को मजदूरों से कटाई कराना पड़ रही है। इस वजह से एकाएक मजदूरी के रेट भी बढ़ गए है जो किसानों के संकट हैं। जिसके चलते किसानों को कटाई महंगी पड रही है। शुरुआत में जहां मजदूरी के रेट ढाई सौ थे तो वहीं अब तीन सौ से लेकर 400 रुपये मजदूर ले रहे हैं।

मजदूरों की कमी से बढ़े मजदूरी के रेट

किसान संतोष धनगर ने बताया कि मौसम खुलने के साथ ही किसानों ने एकाएक फसल की कटाई का काम शुरू कर दिया है साथ ही खेत गीले होने की वजह से हार्वेस्टर नहीं जा रही हैं। जिस कारण मजदूरों की जरूरत तेजी से बढी है। इस समय मजदूर 300 से लेकर 400 तक प्रतिदिन के ले रहे हैं। किसान लखन खाती ने बताया अभी तक जो बारिश हुई है वह फसल के अनुकूल ही हुई है। जिससे सोयाबीन के अच्छे उत्पादन की उम्मीद लग रही थी, लेकिन पिछले दिनों हुई बारिश की वजह से नुकसान होने की संभावना है।

मौसम अनुकूल होने से सारंगपुर क्षेत्र में सोयाबीन कटाई तेज गति से शुरु हो चुकी है। इस बार सामान्य उत्पादन की उम्मीद है। किसानों को इन दिनों कम दाम सोयाबीन के मिलने की समस्या आ रही है।

एसके उपाध्याय, ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी, सारंगपुर।

Posted By: Nai Dunia News Network

NaiDunia Local
NaiDunia Local
  • Font Size
  • Close