राजगढ़ (नवदुनिया प्रतिनिधि)। सुठालिया सिंचाई परियोजना में जिन किसानों की जमीन व आबादी जा रही है उसके तहत उन किसानों का दर्द है कि जमीनों का मुआवजा 7-8 लाख रुपये हेक्टर ही दिया जाएगा, जो बेहद कम है। जितना मुआवजा देने की तैयारी है उतनी राशि मे दूसरी जगह भी जमीन नहीं मिल सकती।इसको लेकर वह चिंतित है। बांध में जहां एक ओर 41 गांव प्रभावित होंगे वहीं दूसरी ओर जिले के 220 गांव लाभान्वित भी होंगे। किसानों की जमीन का मुआवजा बढाने की मांग को लेकर ही पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजयसिंह भोपाल में सीएम निवास के बाहर धरना दिया था।

उल्लेखनीय है सुठालिया के नजदीक पार्वती नदी पर 1375 करोड़ रुपये की लागत से सिंचाई परियोजना बनना है। इसके लिए बाकायदा टैंडर होने के साथ ही जमीनों के भूअर्जन, दावे-आपत्ति सहित अन्य प्रक्रिया को प्रशासनिक व सिंचाई विभाग द्वारा अपने स्तर पर आगे बढ़ाया जा रहा है। बांध को लेकर प्रभावित गांवों निवारा रेखम लोधी, टोडी के हरकिशन लोधी, गुर्जरखेड़ी के दशरथसिंह गुर्जर सहित अन्य किसानो का कहना है कि जो जमीने डूब में जा रही है उनके बदले में बहुत कम दर से मुआवजा देने की बात अधिकारियों द्वारा कही जा रही है। सिर्फ 7 से 8 लाख हेक्टेयर के आसपास मुआवजा देने की तैयारी है, जबकि गांवों में वर्तमान रेट ही कम से कम 20 लाख हेक्टेयर है। एक हेक्टेयर में 4 बीघा जमीन होती है ओर इस क्षेत्र मद सिंचित जमीन की कीमत कम से कम 6-6 लाख रुपये बीघा है। ऐसे में एक तो सिंचित जमीन जा रही है और ऊपर से मुआवजा आधा भी नहीं मिल पा रहा है। किसानो का कहना है कि जितनी राशि शासन द्वारा देने की तैयारी की जा रही है, उस राशि मे तो उतनी जमीन भी नहीं मिल सकती। उक्त राशि में महज आधी भी जमीन खरीद पाना सम्भव नहीं है। शासन को कम से कम 35-40 लाख हेक्टेयर की दर से मुआवजा दिया जाना चाहिए। किसानों ने बताया कि हमारी जमीन सिंचित थी, सुखी नहीं थी। इसलिए उसी हिसाब से मुआवजा मिलना चाइए। गुर्जरखेड़ी के पृथ्वीसिंह, हरिनारायण, हुडा के रमेश गुर्जर, टोडी के लक्ष्मीचंद, गुर्जरखेड़ी के बलरामसिंह,घीसालाल, नारायणसिंह ने बताया कि मुआवजा कम से 35-40 लाख रुपये हेक्टेयर से मिले या जमीन के बदले जमीन मिले। जहां बांध बनाया जा रहा वह साइड ठीक नहीं है। पानी का फैलाव अधिक है। साथ ही जिन गांवों को लाभ देने की बात कही जा रही है वह गांव पहले से सरकारी रिकर्ड में सिंचित है। इन्ही मांगो को लेकर पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजयसिंह ने शुक्रवार को भोपाल में मुख्यमंत्री निवास के बाहर धरना दिया, जिसमें शामिल होने ब्यावरा विधायक रामचंद्र दांगी, पूर्व जनपद अध्यक्ष विजयबहादुर सिंह सहित बड़ी संख्या में प्रभावित क्षेत्र के किसान भी पहुंचे थे।

41 गांव होंगे प्रभावित तो, 220 गांवों में लहलहाएगी फसलें

जानकारी के मुताबिक उक्त बांध बनने के कारण राजगढ़ व गुना जिले के मिलाकर 41 गांव प्रभावित हो रहे हैं। जिसमे गुर्जरखेड़ी कला व गुर्जरखेड़ी खुर्द पूरी तरह से डूब रहे हैं। इसके अलावा तीन गांव गुना जिले के रघुनाथपुरा, तेजाखेड़ी व कादीखेड़ा पूरी तरह से डूब में जाएंगे। लेकिन इस सबके बीच खास बात यह भी है कि बांध बनने के कारण सुठालिया, ब्यावरा व नरसिंहगढ तहसील के कई गांवों की सूखी जमीन सिंचित हो सकेगी। इन तीनो तहसीलों के 220 गांवों की जमीन पर बेहतर पैदावार हो सकेगी। जहां कभी फसलें नहीं होती थी वहां फसलें लहलहना शुरू हो जाएंगी। इन 220 गांवों में कई ऐसे गांव है जहां पानी के अभाव में अब तक ठीक से पैदावार नहीं होती थी, लेकिन इस बांध के बनने से वहां फसलों का अच्छा उत्पादन शुरू हो सकेगा।

भाजपा नेता भी कर चुके मुख्यमंत्री से मुआवजा बढ़ाने की मांग

हाल ही 15 जनवरी को जब मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान राजगढ़ तसहसील के ओला प्रभावित गांव छायन आए थे उस समय भाजपा नेताओं ने भी मुख्यमंत्री को मुआवजा राशि बढाने की मांग की थी। छायन गांव में सांसद रोडमल नागर, ब्यावरा के पूर्व विधायक नारायणसिंह पंवार व भाजपा जिलाध्यक्ष दिलबर यादव ने किसानों के प्रतिनिधि के रूप में मौजूद दशरथसिंह गुर्जर गुर्जरखेड़ी को साथ लेकर मुख्यमंत्री को यहां प्रभावित जमीन का मुआवजा बढाने की मांग करते हुए एक मांग पत्र सौंपा था। जिसमे कहा था कि यह जमीनें कीमती है, इसलिए मुआवजा बढ़ाया जाना चाहिए।

फैक्ट फाइल

-कुल लागत-1375 करोड़

-कुल प्रभावित गांव- 41

-पूरी तह से डूबने वाले गांव-5

-कुल कितनी जमीन पर पानी भरायेगा-4300 हेक्टेयर

-लाभान्वित होने वाले गांव-220

-कुल सिंचित होने वाला रकबा-49800 हेक्टेयर

-जहां बांध बनेगा वहां उस पाल की ऊंचाई-25 मीटर

-25 मीटर ऊंची पाल की लंबाई-4 किलोमीटर

Posted By: Nai Dunia News Network

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