सारंगपुर(नवदुनिया न्यूज)। भारतीय संस्कृति में स्नान एवम दान का धार्मिक एवं आध्यात्मिक माहात्म्य है। पुरुषोत्तम मास की अमावस्या के दिन कई धार्मिक आयोजन, पवित्र नदी में स्नान, पूजन और कर्मकांड का विधान है। पुरुषोत्तम मास आध्यात्मिक एवं शारीरिक ऊर्जा संचय के लिए सर्वश्रेष्ठ माना गया है। पुरुषोत्तम मास में दीप दान करने के भी बहुत महत्व हैं। दीप दान किसी नदी में, किसी मंदिर, पीपल, चौराहा, किसी दुर्गम स्थान आदि में करना चाहिए। भगवान पुरुषोत्तम को ध्यान में रखकर किसी स्थान पर दीप जलाना ही दीपदान कहलाता है। दीप दान का आशय अंधकार मिटाकर उजाले के आगमन से है। मंदिरों में दीप दान अधिक किए जाते हैं। पुरुषोत्तम मास की अमावस्या को स्नान अर्घ्य, तर्पण, जप-तप, पूजन, कीर्तन एवं दान-पुण्य करने से स्वयं भगवान विष्णु पापों से मुक्त करके जीव को शुद्घ कर देते हैं। शास्त्रीय मतानुसार सनातन धर्मावलंबियों ने इस दिन स्नान के बाद श्री सत्यनारायण की कथा का श्रवण, गीता पाठ, विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ व ओम नमो भगवते वासुदेवाय का जप किया। भगवान विष्णु को प्रसन्ना करने के लिए आसमान के नीचे सांयकाल घरों, मंदिरों, पीपल के वृक्षों तथा तुलसी के पौधों के पास दीप प्रज्जवलित किया। पवित्र नदियों सहित सरोवरों में दीप दान किया। क्षेत्र के तीर्थ कपिलेश्वर धाम पर प्रातःकाल से ही भक्तों ने जीवनदायिनी कालीसिंध नदी में डुबकी लगाकर भूतभावन कपिलेश्वर के दर्शन कर अर्चन पूजन किया और दीपदान किया। पुरुषोत्तम मास के अंतिम दिवस पर पूरे मास व्रत करने वाले व्रतियों ने मालपुआ आदि सामग्रियों का दान किया ओर अपने व्रत की पूर्णता की मंगल कामना की।

Posted By: Nai Dunia News Network

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