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यूरिया और बीज की कालाबाजी रोकने के लिए हो रही कार्रवाई

सचित्र एसआरपी 1 पाड़ल्यामाता में मां अंबे कृषि सेवा केंद्र की जांच करते तहसीलदार व टीम सदस्य।फोटोःनवदुनिया।

2 टीम ने अब तक 14 दुकानों पर की है कार्रवाई, सैंपलिंग की है। फोटोःनवदुनिया।

सारंगपुर।नवदुनिया न्यूज

यूरिया की कालाबाजारी न हो और किसानों को निजी दुकानदार ज्यादा दामों में तथा घटिया क्वालिटी का खाद न दे दे इसलिए कार्रवाई की जा रही है। सारंगपुर अनुविभागीय अधिकारी राजस्व एसएल सोलंकी ने विकासखंड में 2 टीम बनाई। टीम ने दो दिनों में 14 दुकानों का निरीक्षण किया और नोटिस थमाए। वहीं कुछ स्थानों से सैंपल जब्त किए। किसान की गलत मसूर के बीच के शिकायत की खबर 6 नवंबर को नवदुनिया में खबर छपने के बाद प्रशासन हरकत में आया। जांच के लिए 2 टीम बनाई। जिन्होंने सारंगपुर, पचोर, पाड़ल्यामाता आदि स्थानो की 14 दुकानों व गोदामों में जाकर स्टाक व रजिस्टर का मिलान किया। शनिवार को ब्लॉक में निजी दुकानों की जांच की। स्टॉक रजिस्टर का गोदाम में रखी खाद से मिलान किया। सैंपल लेकर भेजे गए।

गहरा सकता है यूरिया का संकट

बोवनी के 21 दिन बाद 35 किलो प्रति हेक्टेयर यूरिया लगता है। 42 दिन बाद दूसरी बार इतनी ही मात्रा की फिर जरूरत होती है। पहली बार यूरिया लेने के गांव से आने वाले बड़े किसान एक ही बार में दोनों बार की जरूरत की खाद ले जा रहे हैं। जिससे उनका ईंधन, भाड़ा व समय बच सके। ऐसा करने वालों में 20 एकड़ से ज्यादा रकबे वाले किसान हैं। बड़े किसानों द्वारा अभी से दूसरी बार की जरूरत के खाद स्टॉक करने से छोटे रकबे वाले किसान परेशान हैं। जबकि सारंगपुर क्षेत्र की 18 मार्केटिंग सोसयटी में से एक पडाना सोसायटी को ही उदाहरण मना जाए तो यह अभी भी 1000 बोरी यूरिया की जरुरत है, जबकि स्टॉप इतना नहीं है।

तहसीलदार ने दो दुकानों में देखा खाद की बिक्री का रिकार्ड

शुक्रवार के बाद शनिवार को पाड़ल्यामाता में तहसीलदार निमिषा पाण्डेय की टीम ने निधारित मूल्य से अधिक दामों पर खाद बेचने की शिकायतों के चलते मां अम्बे कृषि सेवा केंद्र, सागर कृषि सेवा केंद्र दुकानों का निरीक्षण किया। कार्रवाई के दौरान राजस्व अमले के साथ कृषि विकास अधिकारी एके सिंह, कृषि विस्तार अधिकारी आरसी वर्मा, पटवारी अतुल सक्सेना पटवारी, रामबाबू देशवाली मौजूद थे। तहसीलदार ने दुकानदारों को आवश्यक निर्देश देकर दिए।

ये शिकायतें आ रही है

यूरिया 266.50 रुपए की बोरी है। कई दुकानदार इसे 300 रुपए में बेच रहे हैं। लेकिन बिल प्रिंट रेट का दे रहे हैं। इस जबरदस्ती का कारण पूछने पर दुकानदार खाद नहीं है यह कहकर इनकार कर देता है। बोवनी पहले ही लेट हो चुकी है। किसान नुकसान नहीं चाहता है। इस कारण शिकायत करने सामने आने को राजी नहीं होते हैं। वहीं शिकायत के लिए एफए डेविट तैयार कराने वकील के चक्कर लगाने से भी किसान बचते हैं। लेकिन टीम को इसकी जांच पड़ताल कर रोकथाम करनी बहुत जरुरी है ताकि किसान असुविधा से बच सके।

कम रकबे वाले किसानों को दुकानदार ने खाद नहीं दिया तो होगी कार्रवाई

कृषि विस्तार अधिकारी एके सिंह ने कहा कि वरिष्ठ अधिकारियों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि यदि कम रकबे वाले छोटे किसानों को किसी दुकानदार ने यूरिया नहीं दिया तो उस पर कार्रवाई होगी। निर्देश यह भी हैं कि चाहे ज्यादा रकबे वाले किसान ने खाद खरीद लिया और कम रकबे वाला किसान खाद मांगता है तो उसमें कटौती करके उसे देना होगा। ऐसी शिकायतों पर लाइसेंस निलंबन की कार्रवाई हो सकती है।

हिदायत दे रहे है

हमारा दल एसडीएम साहब के निर्देशन में सारंगपुर और पचोर तहसील में सतत्‌ कार्रवाई कर रहा है। खाद-बीज दुकानदारों को हिदायत दी जा रही है।

निमिषा पांडेय, तहसीलदार, सारंगपुर।

कार्रवाई जारी है

कार्रवाई करते हुए खाद की कालाबाजारी, खाद-बीज दुकानों के स्टॉक रजिस्ट्रर की जांच एवं गुणवत्ता की जांच की जा रही है। हम दुकानों से खाद एवं बीज के सैंपल लेकर प्रयोगशाला में जांच हेतु भेज रहे है।

एके सिंह, वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी, सारंगपुर।

Posted By: Nai Dunia News Network