मोहनपुरा परियोजना द्वारा 3 साल पहले दिए 192 करोड़, फिर भी नही बन सका ब्रिज न पटरी हुई शिफ्ट

राजेश शर्मा, राजगढ़। रेलवे की पटरी एवं रेलवे ब्रिज को डूबने से बचाने के लिए लगातार तीन दिन से मोहनपुरा डैम का पानी बहाया जा रहा है। परियोजना द्वारा रेलवे को तीन साल पहले 192 करोड़ रुपये दिए जा चुके हैं, लेकिन इसके बावजूद अभी तक न पुल पूरा हुआ, न ट्रेक शिफ्ट किया जा सका। जिसके चलते तीन दिन से लगातार पानी बहाया जा रहा है।

उल्लेखनीय है कि यहां पर नेवज नदी के ऊपर 3800 करोड़ रुपये की लागत से तीन साल पहले मोहनपुरा बांध बनकर तैयार हो चुका है। डैम की कुल जल भराव क्षमता 398 मीटर लेवल है और इस लेवल तक उसी साल से डैम को भरा जाना था, लेकिन खास बात यह है कि जिस नेवज नदी पर उक्त डैम बना है, उसकी सहायक नदी है दूधी। दूधी नदी के उपर से होकर ग्वालियर-इंदौर रेलवे लाइन गुजरती है। ऐसे में जैसे ही डैम को अपनी पूरी जल भराव क्षमता 398 मीटर लेवल तक भरा जायेगा उसी के साथ यह रेलवे पुल व पटरी डूब जाएंगे। साथ ही रेल यातायात भी ठप हो जायेगा। अब रेलवे के पुल व पटरी को डूब से बचाने के लिए पिछले तीन साल से बारिश के समय डैम के गेट खोलकर पानी को 390 मीटर लेवल तक मेंटेन करने के लिए पानी बहाया जाता है। इस बार भी जिले में हुई मूसलाधार बारिश के कारण जैसे ही डैम का जल स्तर बढ़ने लगा तो रविवार से ही बांध के 8 गेट खोलकर 1800 क्यूसेक प्रति सेकंड पानी बहाया जा रहा है। रविवार से मंगलवार शाम 4.30 बजे तक 08 गेटों से प्रति सैकंड 1800 क्यूमेक पानी बहाया गया। मंगलवार शाम को 4 गेट बंद कर दिए व 4 गेटों से 500 क्येमेक पानी अब भी बहाया जा रहा है।

3 साल पहले दिए थे 192 करोड़, दो साल शुरू नही हुआ काम

जैसे ही मोहनपुरा डैम का काम चल रहा था उसी समय विशेषज्ञों ने यह स्प्ष्ट कर दिया था कि डैम को जैसे ही उसकी कुल जल भराव क्षमता 398 मीटर लेवल तक भरा जायेगा उसी के साथ रेलवे का पुल व पटरी डूब जाएंगे। इसलिए नए पुल की जरूरत है व पटरी भी शिफ्ट की जाना जरूरी है। इसके बाद मोहनपुरा परियोजना द्वारा पुल पटरी शिफ्ट करने के लिए आने वाले खर्च का आंकड़ा रेलवे से लिया था। रेलवे की ओर से आंकड़ा मिलने के बाद तीन साल पहले ही मोहनपुरा परियोजना द्वारा रेलवे के खाते में पुल निर्माण व पटरी के लिए 192 करोड़ रुपये डाल दिए थे। राशि डालने के बाद रेलवे को कहा था कि जल्द से जल्द नया ऊंचा पुल बना लिया जाए व पटरी को शिफ्ट कर दिया जाए, ताकि डैम को उसकी पूरी क्षमता तक भरा जा सके, लेकिन हैरानी की बात यह है कि तीन साल बाद भी न पुल बनकर कम्प्लीट हुआ और न ही पटरी शिफ्ट की जा सकी। हालात यह रहे कि शुरू के दो साल तक तो रेलवे द्वारा पुल बनाने के लिए काम ही शुरू नही किया, नही तो एक साल पहले ही पुल बनकर तैयार हो जाता। अब वर्तमान अवस्था में पुल का कुछ हिस्सा बना है व गत दिनों जिले के दौरे पर आए रेलवे के जीएम शैलेंद्रसिंह ने फरवरी 2022 तक इसको पूरा करने के निर्देश अपने अधीनस्थ अमले को दिए हैं।

1 लाख हेक्टेयर जमीन की सिंचाई होगी बाधित

डैम से कुल करीब 1 लाख 50 हजार हेक्टेयर जमीन में सिंचाई होना है। जिसमे से पिछले रबी के सीजन में कालीपीठ क्षेत्र में अंडरग्राउंड नहरों के जरिए करीब 25 हजार हेक्टेयर में सिंचाई की गई थी। इस बार आने वाले रबी सीजन में पचोर क्षेत्र में करीब 16 हजार हेक्टयर में ओर सिंचाई शुरू कर दी जायेगी। लेकिन फुल क्षमता तक जल भराव न होने के कारण आने वाले रबी सीजन में करेड़ी-खुजनेर क्षेत्र के करीब 1 लाख हेक्टेयर में सिंचाई नही हो सकेगी।

डैम नही भराने के कारण, नहरों में भी लेटलतीफी

खास बात यह है कि फुल क्षमता तक डैम नही भराने का असर अंडरग्राउंड नहरों के निर्माण पर भी पड़ रहा है। पानी कम भरने के कारण नहर की एजेंसी भी यह मानकर चल रही है कि करेड़ी क्षेत्र में सिंचाई अभी होना सम्भव नही है, इसलिए वह भी धीमी गति से काम कर रही है।

फेक्ट फाइल

डैम की लागत-3800 करोड़

जल भराव क्षमता-398 मीटर लेवल

वर्तमान में जल भरते हैं-393 मीटर लेवल अधिकतम

पटरी डूबना है-2,7 किमी का हिस्सा होगा प्रभावित

रेलवे को दी राशि-192 करोड़ रुपये

पुल की लागत-166 करोड़

पटरी शिफ्ट होना है-7 किमी का हिस्सा

इनका कहना है

पुल व पटरी को डूबने से बचाने के लिए पानी बहाया जा रहा है। यदि पुल-पटरी कंपलीट हो जाते तो इस बार फुल क्षमता तक पानी भर देते। फरवरी तक पूरा करने के लिए रेल प्रबंधन ने कहा है।

अशोक दीक्षित, एसडीओ व परियोजना प्रबंधक महोनपुरा डैम

Posted By: Nai Dunia News Network

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