सारंगपुर(नवदुनिया न्यूज)। महिला सशक्तिकरण के लिए सरकार ने निर्देश जारी किए है कि कहीं भी निर्वाचित महिला जनप्रतिनिधियों के पति या कोई पुरुष प्रतिनिधि के रूप में कार्य नहीं करेंगे, लेकिन सारंगपुर जनपद पंचायत क्षेत्र की ग्राम पंचायतों में इन निर्देशों पर कोई अमल नहीं हो पा रहा है। ग्राम पंचायतों में महिला सरपंचा को शासन द्वारा चुनाव नहीं होने की स्थिति पर कार्यकाल समाप्ति के बाद प्रशासकीय समिति का प्रधान नियुक्त किया था। जनपद पंचायत सारंगपुर अंतर्गत लगभग 50 ग्राम पंचायतो महिला सरपंच थी जो अब प्रधान है लेकिन उन महिला प्रधानों के प्रतिनिधि न केवल पंचायतों में प्रधान (सरपंच) की कुर्सी पर जमे नजर आ रहे है, बल्कि वे पंचायत की सभा, ग्रामसभा में भी जनता का फर्जी प्रतिनिधित्व करते नजर आ रहे है। इस स्थिति से निपटने के लिए शासन से जिला पंचायत को सख्ती से कार्रवाई करने के वरिष्ठ स्तर से निर्देश है। बावजूद इसके महिला प्रधानों के प्रतिनिधियों से सरकारी कार्यालय में अधिकारी मिलते जुलते है मगर उसने यह नहीं पूछते कि महिला प्रधान के स्थान पर आप क्यूं आते हों। ऐसे में महिला सशक्तिकरण की अवधारणा पर पानी फिर रहा है।

शासन के स्पष्ट निर्देश है कि महिलाओं को प्रतिनिधित्व देना जरूरी है इसलिए चुनाव में 50 फीसद आरक्षक महिलाओं के लिए आरक्षित है। इसलिए महिला प्रधानों (सरपंचो) के प्रतिनिधियों को पंचायतों की कार्रवाई में दखल नहीं देने को चाहिये। और महिला प्रधानों को ही पंचायत की सभी गतिविधियों में स्वयं भाग लेना चाहिये। यदि पंचायतों में प्रतिनिधि कार्य करें या ग्रामसभा आदि कार्रवाईयों में पुरुष प्रतिनिधि प्रतिनिधित्व करें तो वरिष्ठ स्तर से कार्रवाई हो सकती है लेकिन ऐसा वास्तव में हो नहीं रहा है। कार्रवाई के अभाव में प्रतिनिधि ही नियम तोड़कर पंचायतों में मनमर्जी से काम-काज कर रहे है।

16 महीने पहले समाप्त हो चुका है कार्रवाई

गौरतलब है कि करीब 16 महीने पहले जनपद पंचायत की 98 ग्राम पंचायतो के निर्वाचित हुए जनप्रतिनिधियों का भी प्रदेश भर की सभी पंचायतों की तरह कार्यकाल समाप्त होने जाने के बाद सरकार द्वारा पंचायतों में प्रशासकीय समिति बनाई थी उसमें वर्तमान सरपंच को प्रधान बनाकर दो विशेष सदस्यों को समिति में मनोनित कर शामिल करते हुए पंचों को सदस्य बनाया था। लेकिन महिला प्रधानों के प्रतिनिधियों के द्वारा बिना प्रशासकीय समिति के सदस्यों के संज्ञान में लिये काम किया जा रहा है समिति को भी महत्व नहीं दिया जा रहा है। पंचायतों के प्रधान प्रतिनिधि कोरोना आपदा में अवसर तलाश कर भ्रष्टाचार कर रहे है। सूत्रो की माने तो मास्क, सैनिटाइजर और अन्य राहत के नाम पर फर्जी बिल लगाते हुए भ्रष्टाचार किया जा रहा है। जिस पर कार्रवाई की जरूरत है।

पंचायतों में निर्वाचित सरपंचो का कार्यकाल समाप्ति के बाद कांग्रेस सरकार ने महिला सरपंच को सशक्त बनाने के लिए उन्हें प्रशासकीय समिति की जिम्मेदारी सौंपते हुए प्रधान बनाया था लेकिन वर्तमान सरकार की अनदेखी के चलते महिलाओं की तरह उनके प्रतिनिधि पुरुष मनमानी कर रहे है। जिन पर कार्रवाई नहीं की जा रही है। कोरोना के नाम पर पंचायतों में हो रहे भ्रष्टाचार पर रोक लगनी चाहिये।

कृष्णमोहन मालवीय, पूर्व विधायक, सारंगपुर।

जिन-जिन पंचायतो में महिला प्रधान है उन्ही को पंचायत की सभी गतिविधियों में शामिल होना जरूरी है। जिन पंचायतों में नियम तोड़े जा रहे है उनकी जांच करवाई कर कार्रवाई की जाएगी।

केदारसिंह, जिपं, सीईओ, राजगढ़।

Posted By: Nai Dunia News Network

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