रतलाम (नईदुनिया प्रतिनिधि)। जिला मुख्यालय से 12 किलोमीटर दूर ग्राम बांगरोद में मुक्तिधाम को ग्रामीणों ने नया स्वरूप दिया है। यहां अंतिम संस्कार के साथ बच्चों का जन्मदिन मनाते हुए अन्य धार्मिक कार्यक्रम भी आयोजित किए जाते हैं। परिसर में बगीचा तैयार करने के साथ ही बच्चों के लिए झूला और म्यूजिक सिस्टम लगाया गया है। भक्तिमय संगीत के बीच अंतिम संस्कार कराया जाता है।

गांव के लोग मुक्तिधाम समिति से जुड़कर सुविधाओं को बेहतर बनाने की दिशा में काम कर रहे हैं। 1994 में समाजसेवी एवं मुक्तेश्वर महादेव मुक्तिधाम समिति के अध्यक्ष देवीलाल पाटीदार ने कायाकल्प का बीड़ा उठाया था।

सरकारी योजनाओं व जनसहयोग से परिसर में टीनशेड निर्माण, कुर्सियां, पानी की टंकी, नलों की व्यवस्था की गई। समाजसेवी देवीलाल की प्रेरणा से दो शव दाह गृह, काष्ठ गृह, टिनशेड, स्नानगृह, पेयजल टंकी है। साथ ही 1100 पौधे लगाए गए थे। जो आज फलदार और छायादार हैं।

इनमें से 1000 तो पेड़ बन चुके हैं। बच्चों का जन्मदिन मनाते समय यहां एक पौधा अवश्य लगाता जाता है। डेढ़ लाख रुपये की लागत से शवदाह स्टैंड का निर्माण कराया गया। इससे कम लकड़ी में दाह संस्कार हो पाता है। हर साल पितरों की शांति के लिए भागवत कथा भी होती है। दीपावली के बाद अन्नाकूट के आयोजन में भंडारा किया जाता है। गांव के युवाओं ने करीब डेढ़ लाख रुपये की लागत से म्यूजिक सिस्टम इसी साल लगाया है।

इस तरह मिली प्रेरणा

देवीलाल बताते हैं कि करीब 26 साल पहले उनके एक मित्र की मौत हुई थी। मुक्तिधाम के अभाव में दो दिन तक अंतिम संस्कार नहीं हो पाया। उसी दिन तय कर लिया था कि गांव में मुक्तिधाम बनाएंगे। सरकारी मदद से जितना काम हो सका, कराया, बाकी जनसहयोग से करा रहे हैं। गांव के हर वर्ग का जुड़ाव हमारी पहल से हो गया है। यहां मानसिक शांति भी मिलती है।

Posted By: Nai Dunia News Network

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