रतलाम। जिले में एक गांव ऐसा है, जहां के 28 युवा देश की सरहदों पर तैनात हैं। इनसे प्रेरित होकर गांव के अन्य युवाओं के लिए भी सेना की नौकरी पहली पसंद है। गांव वालों को भी इस पर गर्व है। जिला मुख्यालय से करीब 10 किमी दूर स्थित अमलेटा ग्राम पंचायत के युवाओं में देश भक्ति का जुनून है।

दस साल में इस गांव के युवा फौज में भर्ती हुए और अब अलग-अलग स्थानों पर तैनात हैं। सेना में जाने के लिए तैयारी भी सभी ने अपने स्तर पर की, किसी को ज्यादा गाइडेंस नहीं मिला। अधिकतर के परिजन खेती करते हैं। फौज में भर्ती के लिए गांव की सड़कों पर ही सुबह-शाम दौड़ लगाई। आज भी गांव के कई युवा फौज में जाने की तैयारी कर रहे हैं। इनके साथ युवतियां भी आगे आई हैं। अभी आठ युवाओं का चयन हुआ है, जिनकी भर्ती प्रक्रिया का अंतिम दौर चल रहा है।

परिवार का होता है सम्मान

रियासत काल में गांव के तत्कालीन महाराज दिवंगत संग्रामसिंह भी आर्मी में मेजर रहे। इनके अलावा गांव के वरिष्ठ भी सेना से रिटायर्ड हो चुके हैं। ग्राम पंचायत द्वारा इन युवाओं के परिवार का सम्मान 15 अगस्त व 26 जनवरी पर किया जाता है। जिले का यह ऐसा गांव है जहां से सबसे ज्यादा युवा फौज में हैं।

देश भक्ति के जज्बे ने दिलाई अलग पहचान

गांव के उपसरपंच दिनेश पाटीदार के बड़े भाई महेशचंद्र पाटीदार दिल्ली आर्मी में मेजर हैं तो इन्हीं का भतीजा शुभम पाटीदार जम्मू के उधमपुर में पदस्थ है। इन्हीं के परिवार से सरपंच रह चुकी लक्ष्मीबाई पाटीदार के दो पुत्र योगेंद्र पाटीदार दिल्ली में तो बलराम पाटीदार असम में पदस्थ हैं। पाटीदार समाज के ही 10 युवा आर्मी में है।

गांव के हेमेंद्र गुर्जर सियाचीन में पदस्थ है। दो दिन पहले ही ड्यूटी से वापस लौटे। गांव के हर युवा में बड़ी सुविधावाली नौकरियों की बजाए फौज में जाने का उत्साह अलग ही नजर आता है। इसी जज्बे ने पूरे गांव की अलग पहचान बना दी है। गांव के सरपंच प्रतिनिधि वीरेंद्रसिंह ठाकुर बताते हैं कि पिछले 10 साल में युवाओं में देश भक्ति का जुनून जागा है। इसी का नतीजा है कि 28 युवा वर्तमान में देश के अलग-अलग हिस्सों में पदस्थ होकर अपनी सेवा दे रहे हैं।

एक नजर गांव पर

- आबादी करीब 3500

- वोटर 1500

- मकान 400