जावरा। (नईदुनिया न्यूज)। नगर के एक उद्योगपति द्वारा 12 साल पहले क्रेडिट कार्ड जमा कराने के बाद भी बैंक ने डिफाल्टर बताने का मामला सामने आया है। उद्योगपति ने इस मामले में जिला उपभोक्ता फोरम से न्याय की गुहार लगाकर सिबिल सही करवाने की मांग की है।

कॉलोनाइजर एवं उद्योगपति भूपेंद्र डांगी ने बताया कि मैंने यूनियन बैंक से 20 हजार लिमिट वाली क्रेडिट कार्ड सन 2006 में लिया था। सन् 2008 में संपूर्ण बकाया राशि जमा करवाकर कार्ड वापस जमा करवा दिए, जो कार्ड वर्तमान में बंद हो गया है। बारह साल बीत जाने के बाद मुझे बैंक द्वारा डिफाल्टर बताते हुए सिविल खराब कर दो लाख 27 हजार 151 रुपये बकाया बताया व उक्त राशि को जमा कराने के लिए सूचना पत्र जारी किया। जब मैंने बैंक शाखा में आपत्ति दर्ज करवाते हुए कार्ड का ब्योरा मांगा, लेकिन मुझे नहीं मिला। केवल 2020 की स्थिति का बकाया का स्टेटमेंट भेज दिया। उक्त राशि लेट फीस सर्विस चार्ज के नाम पर बकाया बताई। जबकि नियत तो यह है कि तय लिमिट से ज्यादा बकाया होने पर बैंक द्वारा संबंधित को नोटिस दिया जाता है, लेकिन मुझे कोई नोटिस नहीं दिया गया। बैंक ने 20 नवंबर 2020 को उसी क्रेडिट कार्ड पर सिर्फ 33 हजार 759 रुपये का सूचना पत्र जारी किया था। मेरे द्वारा 2008 में सारी बकाया राशि जमा करवा दी गई थी और बाद में अलग से कोई राशि जमा नहीं की, तो पुनः दो लाख 27 हजार 151 रुपये से घटकर 33 हजार 759 रुपये कैसे हो गया। इस मामले में एडवोकेट चंद्रप्रकाश रामनानी के माध्यम से जिला उपभोक्ता फोरम में परिवाद पेश किया है। जिसमें न्याय दिलाते हुए बैंक की सिबिल सही करवाने की मांग की।

Posted By: Nai Dunia News Network

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