आम्बा। मौसम में हो रहे परिवर्तन को दृष्टिगत रखते हुए क्षेत्र के किसानों को कृषि विभाग व कृषि वैज्ञानिकों के संयुक्त दल द्वारा तकनीकी सलाह दी गई।

सहायक संचालक कृषि रतलाम भीका वास्के ने बताया कि वर्तमान में रतलाम जिले में गेहूं की बोवनी 175000 हेक्टेयर व चने की बोनी 69915 हेक्टेयर में की गई है। वर्तमान समय में फसल की स्थिति अच्छी है, लेकिन मौसम को देखते हुए किसानों को सावधानी बरतनी होगी।

संयुक्त भ्रमण दल में कृषि विज्ञान केंद्र जावरा के वैज्ञानिक डॉ सीआर कांटवा ने किसानों को सलाह दी कि देरी से बोई की गई फसल में सिंचाई से पहले यूरिया का छिड़काव करें। समय से बोई की गई गेहूं की फसल में 20-20 दिन के अंतराल पर चार सिंचाई करें। उन्होंने किसानों को बताया कि आवश्यकता से अधिक सिंचाई करने पर फसल के दानों में दूधिया धब्बे आ जाते हैं। इससे उपज कम हो जाती हैं, वहीं बालियां निकलते समय फव्वारा विधि से सिंचाई करने पर फसल के फूल गिर जाने से दानों का मुंह काला पड़ जाता है। इससे फसलों में करनाल बंट तथा कुंडवा रोग के प्रकोप का डर रहता है। वैज्ञानिक डॉ जीपी तिवारी (पौध संरक्षण) ने किसानों को समझाइश देते हुए बताया कि महू का प्रकोप सरसों की फसल में ऊपरी भाग जैसे तना पत्ती पर होने की दशा में इमिडाक्लोप्रिड छह एमएल प्रति लीटर पानी में डालकर छिड़काव करें। गेहूं की बालियां निकलने शुरू होते ही फसल की अन्य प्रजातियों के पौधों को पहचान कर जड़ से उखाड़ कर खेत से बाहर कर दें। 15 दिन के बाद दूसरी बार खेत में घूम कर बचे हुए अवांछित पौधों को फिर से निकाल दें। उच्च गुणवत्ता युक्त बीज जैसे कि आधार बीज की फसल की कटाई से पहले एक बार और अवांछित पौधों को फसल से अलग कर लें, ताकि बीज की गुणवत्ता बढ़ सके।

Posted By: Nai Dunia News Network

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