रतलाम/आलोट (नईदुनिया प्रतिनिधि)। ग्राम दयालपुरा में 15 वर्षीय किशोर की हत्या के मामले में गांव छोड़कर भागे एक आरोपित के परिवार सहित आधा दर्जन परिवारों के लोगों ने सोमवार शाम जिला मुख्यालय पहुंचकर कलेक्टर कार्यालय में धरना दिया। ये सभी दलित समाज के हैं, उनका आरोप है कि मृतक के स्वजन व समाज के लोगों ने उनके घरों में तोड़फोड़ कर गांव से भगा दिया है। डिप्टी कलेक्टर शिराली जैन व सीएसपी हेमंत चौहान ने चर्चा करने उन्हें सुरक्षा प्रदान करने का आश्वासन दिया।

उल्लेखनीय है कि 14 मई की रात 18 वर्षीय आरोपित उल्फतसिंह व उसके 16 वर्षीय साथी ने चुगली करने की बात को लेकर अपने ही दोस्त 15 वर्षीय विशालसिंह की गला दबाकर हत्या करने के बाद शव जमीन में गाड़ दिया था। दूसरे दिन पुलिस ने आरोपितों की निशानदेही पर गड्ढे से शव निकलवाकर पीएम कराया था। घटना को लेकर आक्रोशित ग्रामीणों व मृतक के स्वजनों ने 16 मई की सुबह आरोपितों के घरों पर तोड़फोड़ कर दी थी। घबराकर वे गांव छोड़कर भाग गए थे। नाबालिग आरोपित मालवीय (दलित) समाज का है। जबकि आरोपित उल्फतसिंह मृतक के समाज (सामान्य वर्ग) का ही है।

मालवीय समाज के लोग सोमवार शाम कलेक्टर कार्यालय पहुंचे और घरने पर बैठ गए। उनके साथ महिलाएं व छोटे बच्चे भी थे। सूचना मिलने पर डिप्टी कलेक्टर शिराली जैन व सीएसपी हेमन्त चौहान धरना स्थल पहुंचे और पीड़ित परिवारों से चर्चा की तो उन्होंने बताया कि उनके समाज के आरोपित किशोर को पुलिस के हवाले कर दिया। इसके बाद भी मृतक के परिवार व समाज के लोगों ने उनके मकानों में जेसीबी से तोड़फोड़ की। ट्यूबवेल भी तोड़ दिया। सीएसपी ने उनसे आलोट थाने जाकर रिपोर्ट दर्ज कराने का कहते हुए आलोट थाना प्रभारी दीपक शेजवार को फोन पर कहा कि ये लोग ताल तक आ जाएंगे, वहां से आलोट तक पुलिस अभिरक्षा में ले जाए, इनकी रिपोर्ट दर्ज कर इन्हें सुरक्षा दी जाए।

सुबह लगाया फोन, शाम को पहुंची पुलिस

धरने पर बैठी अनीता मालवीय, ईश्वरलाल व पप्पू मालवीय ने कहा कि जब उनके घर तोड़े जा रहे थे, तब उन्होंने आलोट पुलिस को फोन किया था। पुलिस ने मदद नहीं की। हमारा क्या गुनाह था, जो हमारे घर तोड़े गए और हमें गांव से भगाया गया। पप्पू मालवीय ने कहा कि उन्होंने थाना प्रभारी को फोन किया था, उन्होंने मेरा मोबाइल नंबर ब्लैक लिस्ट में डाल दिया। एसडीओपी को सुबह फोन किया था, वे शाम को गांव पहुंची, तब तक हम गांव छोड़कर भाग चुके थे। पीड़ित लोगों का यह भी कहना है कि रिपोर्ट करने की बजाय पुलिस ने कहा कि माहौल ठीक नहीं है, गांव से भाग जाओ। उधर, आरोपित उल्फतसिंह का मकान भी तोड़ा गया था, उसके परिवार के लोग भी गांव छोड़कर भाग चुके हैं।

किसी ने रिपोर्ट नहीं की

थाना प्रभारी दीपक शेजवार ने बताया कि आक्रोशित लोगों द्वारा आरोपियों के घरो में तोड़फोड़ जिसकी सूचना मिली है। किसी भी व्यक्ति ने इसकी रिपोर्ट थाने में दर्ज नहीं कराई है। वे रिपोर्ट कराते हैं तो हम कार्रवाई करने को तैयार हैं।

Posted By: Nai Dunia News Network

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