रतलाम (नईदुनिया प्रतिनिधि)। नर्सिंग होम एक्ट के प्रविधानों के पालन को लेकर कलेक्टर कुमार पुरुषोत्तम के निर्देश पर दल का गठन करके निजी अस्पतालों का निरीक्षण किया जा रहा है। इसमें सागोद रोड स्थित सीएचएल जैन दिवाकर हास्पिटल में बड़ी गड़बड़ी मिली है। स्वास्थ्य विभाग से पंजीयन में अस्पताल प्रशासन ने चार रेसीडेंट डाक्टर होने का हवाला दिया था, लेकिन छह सितंबर को विभाग की टीम को निरीक्षण में एक भी डाक्टर अस्पताल में नहीं मिला।

मालूम हो कि अस्पताल संचालन के लिए 24 घंटे रेसीडेंट डाक्टर का होना अनिवार्य होता है। बेड की संख्या के मान से पंजीयन के समय डाक्टरों की संख्या भी तय की जाती है। एक भी रेसीडेंट चिकित्सक कार्यरत नहीं होते हुए भी संस्था का संचालन मप्र उपचर्यागृह तथा रोगोपचार संबंधी स्थापनाएं (रजिस्ट्रीकरण तथा अनुज्ञापन) अधिनियम 1973 तथा नियम 1997 का स्पष्ट उल्लंघन मानते हुए विभाग ने नर्सिंगहोम एक्ट अंतर्गत किया पंजीयन तत्काल प्रभाव से निरस्त कर दिया। इसके साथ ही चेतावनी दी गई कि पंजीयन निरस्तीकरण के बाद यदि संस्था का संचालन किया गया तो कार्रवाई की जाएगी।

दो नोटिस दिए, जवाब नहीं दिया

मुख्य चिकित्सा व स्वास्थ्य अधिकारी कार्यालय से सीएचएल जैन दिवाकर अस्पताल प्रबंधन को पक्ष रखने के लिए दो नोटिस जारी किए, लेकिन दोनों का समय सीमा में जवाब नहीं दिया गया। कार्यालय से लिखे पत्र का भी प्रतिउत्तर प्रस्तुत नही दिया गया। इसके बाद पंजीयन निरस्त की कार्रवाई की गई।

दो डाक्टर छोड़ चुके, दो विजिटर के रूप में

नोडल अधिकारी नर्सिंग होम एक्ट द्वारा किए गए निरीक्षण के दौरान सीएचएल जैन दिवाकर अस्पताल में एक भी रेसीडेंट डाक्टर नहीं था जबकि पंजीयन आवेदन में चार रेसीडेंट डाक्टरों के सहमति पत्र प्रस्तुत किए गए थे। सहमति पत्र के आधार पर संबंधित डाक्टरों को सीएमएचओ कार्यालय से पत्र जारी किया गया। इसमें डा. अंजुम सैय्यद एवं डा. एए सैय्यद द्वारा संस्था से त्यागपत्र देने, डा. एसजी बेंजामिन द्वारा प्रातः 9.00 से 01.00 बजे तक व डा. देवेंद्र वैष्णव द्वारा भी विजिटर डाक्टर के तौर पर सेवा देने की जानकारी दी। इससे स्पष्ट हो गया कि संस्था में कोई आवासीय चिकित्सक नहीं हैं।

Posted By: Nai Dunia News Network

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