रतलाम। शहर की बंद फैक्टरियों में पड़े खतरनाक औद्योगिक कचरे को हटाने के लिए नेशनल ग्रीन एनर्जी फंड (एनडीईएफ) से काम होगा। कई सालों से यह कचरा पड़ा होने के कारण भूमिगत जल प्रदूषित हो गया है। इससे पहले हुए सर्वे में भी औद्योगिक कचरे से ही लाल पानी की समस्या पैदा होने की बात कही गई थी, लेकिन फंड की उपलब्धता नहीं होने से काम अटक गया। अब केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की टीम व कंसल्टेंट द्वारा निरीक्षण के बाद पूरे प्लान के लिए राशि को लेकर भी स्थिति साफ हो गई है।

सज्‍जन इंपेक्‍स में सबसे ज्‍यादा कचरा

देश के सर्वाधिक अति प्रदूषित 12 क्षेत्रों में से रतलाम-नागदा का नाम शामिल है। शहर के औद्योगिक क्षेत्र में बंद पड़ी सज्जन इंपेक्स में सर्वाधिक औद्योगिक कचरा पड़ा हुआ है। इसे हटाने व लाल पानी की समस्या खत्म करने के लिए एनजीईएफ के माध्यम से 40 प्रतिशत राशि व शेष 60 प्रतिशत राशि राज्य सरकार द्वारा संबंधित उद्योग से या पीपीपी के माध्यम से जुटाई जाएगी। राज्य शासन ने इस पर सहमति दे दी है।

केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की टीम के निरीक्षण के बाद अब कंसल्टेंट संस्था द्वारा सितंबर माह के तीसरे व चौथे सप्ताह में आमजन के सुझाव व लाल पानी की समस्या के मूल स्रोत को जानने के लिए बैठक आयोजित कर सुझाव लिए जाएंगे। इस संबंध में राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के उज्जैन कार्यालय से कलेक्टर को पत्र लिखा गया है। जिला उद्योग केंद्र इसके लिए तैयारी करेगा। बैठक में फैक्ट्री के संचालन से बंद होने व बंद होने के बाद वर्तमान स्थिति तक भू-जल की स्थिति व लाल पानी की समस्या पर चर्चा कर जरूरी जानकारी एकत्र की जाएगी।

20 हजार टन कचरा

सज्जन इंपेक्स सहित दो अन्य फैक्ट्रियों में करीब 20 हजार टन कचरा पड़ा होने की जानकारी प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा दी गई है। इस वजह से शहर के आसपास के 10 गांवों में लाल पानी की समस्या पैदा हो गई है।

बारिश के पानी का उपयोग

कचरे के निष्पादन के साथ लाल पानी की समस्या का निदान करने के लिए कुछ स्थानों को सीपीसीबी की टीम चि-ति कर वहां निस्तार गड़ढे व अन्य माध्यमों से बारिश का पानी जमीन में छोड़ने का प्रबंध करेगी। इस तरह के प्रयोग से पता किया जाएगा कि कहां सर्वाधिक समस्या है।

दरअसल उद्योग चालू रहने के दौरान अपशिष्ट का पर्याप्त निपटारा नहीं किया गया, कुछ मामलो में तो गहरे बोरिंग के माध्यम से अपशिष्ट पानी को जमीन में छोड़ दिया गया जिससे कि अब लाल पानी की समस्या हो रही है।-निप्र