बड़ावदा। व्यक्ति पद प्रतिष्ठा, मान-मर्यादा, लोभ के वशीभूत में होकर मानव जीवन को बर्बाद कर रहा है। भागवत कथा श्रवण करने से सात जन्मों के पाप से मुक्ति मिल जाती है।

यह बात ग्राम खजुरिया में भागवताचार्य पं. कपिल पौराणिक ने श्रीमद् भागवत कथा में धर्मालुओं को संबोधित करते हुए कही। उन्होंने कहा कि धर्म की रक्षा के लिए मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम भी चौदह वर्ष के लिए वनवास चले गए। हम भी भगवान श्रीराम के धर्म का अनुसरण करके सद् मार्ग पर चले। आज व्यक्ति को धर्म-आराधना करने के लिए समय नहीं है, वह फालतू और फुल्लड़ कार्य करने के लिए उसके पास पर्याप्त समय है। धर्म ही सच्चा सुख देकर मुक्ति पथ पर पहुंचता है। धर्म हमें निरंतर करते रहना चाहिए। इस अवसर पर भोरमगरा के महात्मा अभयदानपुरी जी, हिंदू जागरण मंच के प्रांतीय महामंत्री नेपालसिंह डोडिया, भेरूसिंह सिसौदिया, भेरूलाल गोयल, मांगूसिंह सिसौदिया, रतनसिंह डोडिया, भारतसिंह डोडिया, मदनलाल परमार, सुरेंद्रसिंह डोडिया, जितेंद्रसिंह, राजेंद्रसिंह सोलंकी, जसवंतसिंह, पर्वतसिंह डोडिया सहित कई गणमान्य उपस्थित थे। श्रीमद् भागवत कथा समापन पर ग्राम खजुरिया में चल समारोह निकालकर महाआरती उतारकर प्रसाद का वितरण किया गया।

मोक्षदायनी है भागवत कथा

करिया। भागवत कथा में तमाम धार्मिक ग्रंथों का निचोड़ है। इसके श्रवण मात्र से जीवन के दुख-दर्दों से निजात मिलती है, इसीलिए इसे मोक्षदायनी कहा गया है। यह बात भगवताचार्य ललित शास्त्री (सांगाखेड़ा) ने कही। वे गोपाल गौ शाला बोदीना में हरिदास बैरागी की स्मृति में आयोजित भागवत कथा के समापन पर श्रद्धालुओं को संबोधित कर रहे थे। कथा के अंतिम दिन वैदिक मंत्रोच्चार के साथ बैरागी परिवार द्वारा हवन-पूजन किया गया। इस दौरान गांव के प्रमुख मार्गों से भागवत पोथी की शोभायात्रा के साथ कलश यात्रा निकाली गई। श्रद्धालुओं द्वारा पुष्प वर्षा से यात्रा का स्वागत किया गया। समापन पर महाआरती कर प्रसादी का वितरण किया गया।

हमेशा अच्छे कर्म करते रहें

आम्बा। मनुष्य जब अच्छे कर्मों के लिए आगे बढ़ता है तो संपूर्ण सृष्टि की शक्ति समाहित होकर मनुष्य के पीछे लग जाती है और हमारे सारे कार्य सफल होते हैं। ठीक उसी तरह बुरे कर्मों की राह के दौरान संपूर्ण बुरी शक्तियां हमारे साथ हो जाती है। इस दौरान मनुष्य को निर्णय करना होता कि उसे किस राह पर चलना है।

यह बात भागवताचार्य पं. विनोद कुमार व्यास ने श्रीराम मंदिर गुडरखेड़ा में चल रही भागवत कथा के दौरान भक्तो को संबोधित करते हुए कही। उन्होंने कहा कि मानव जीवन में भक्ति और सत्संग करना आवश्यक है। भगवान के अब तक हुए अवतारों में सभी की अलग-अलग महिमा है। सत्संग की महिमा का बखान करते हुए कहा कि जब-जब भी धरती पर पाप और अत्याचार बढ़े हैं, तब-तब भगवान ने स्वयं विविध रूपों में अवतार लेकर पापियों-अत्याचारियों का संहार कर अपने भक्तों को भयमुक्त किया है। त्रेता युग में भी जब पृथ्वी पर लंका नरेश व राक्षसराज रावण के पाप अत्याधिक बढ़ गए थे, उस समय भगवान श्रीराम के रूप में रघुुकुल में नर रूप में अवतार लेना पड़ा था। कथा वाचन के दौरान भजनों की प्रस्तुति ने श्रद्धालुओं को भक्ति में तल्लीन होकर झूमने पर मजबूर कर दिया।

Posted By: Nai Dunia News Network

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