रतलाम। रतलाम ग्रामीण व जावरा पश्चिम क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी में कार्यरत करीब 20 बिजली आउटसोर्स ठेका कर्मचारियों को आंदोलन के दौरान नौकरी से निकाले जाने पर अब उनके सामने आजीविका का संकट खड़ा हो गया है। गुस्साए आउटसोर्सकर्मियों ने उन्हें नौकरी में वापस लेने की मांग को लेकर रविवार को मप्र बिजली आउटसोर्स कर्मचारी संगठन के प्रांतीय संयोजक मनोज भार्गव व रतलाम-नीमच के उपसंयोजक दिनेश सिसौदिया के नेतृत्व में रतलाम स्थित बिजली कंपनी वृत्त कार्यालय के बाहर नारेबाजी कर प्रदर्शन किया।

उन्होंने चेतावनी दी कि यदि आंदोलन के दौरान हटाए गए ठेका कर्मचारियों की तत्काल वापसी नहीं हुई तो कर्मचारी दो सप्ताह बाद इंदौर पोलोग्राउंड बिजली कंपनी परिसर में परिवार सहित भूख हड़ताल पर बैठने के लिए मजबूर होंगे। अब तक रतलाम वृत्त के जिन ठेका कर्मचारियों की नौकरी में वापसी नहीं हुई है, उनमें विजेंद्र मालवीय, सुरेश पोरवाल, लखनसिंह चौहान, पंकज प्रजापत, लक्ष्‌मण पाटीदार, भरतलाल रकवा, अंकित पाठक, दिनेश पारगी, कमल कटारा, गणेश कुमावत, अजय धाकड़, शंकर (रतलाम ग्रामीण), रमेश धाकड़, अनिल मालवीय, अखिलेश बोस, अर्जुनसिंह, फिरोज, मुकेश शर्मा (जावरा) प्रमुख रूप से शामिल हैं।

ठेकाकर्मियों का भविष्य अधर में

प्रांतीय संयोजक भार्गव ने कहा कि जब पूरे मप्र के 50 जिलों में आंदोलनरत रहे सभी बिजली आउटसोर्स कर्मी नौकरी पर वापस रखे जा चुके हैं तो रतलाम ग्रामीण व जावरा डिवीजन के अधिकारी ऊर्जा मंत्री के निर्देशों की अवहेलना कर उन्हें नौकरी में वापस रखने से क्यों कतरा रहे हैं। वह पुराने ठेकाकर्मियों उजाड़ कर अपने चहेतों को रखवा रहे हैं। वह पहले आओ-बाद में जाओ के सिद्धांत का उल्लंघन कर रहे हैं। इससे आउटसोर्सकर्मियों के स्वजनों में हाहाकार मच गया है। ठेकाकर्मियों का भविष्य अधर में है। भार्गव ने कहा कि पेट्रोल-रसोई गैस ठेकाकर्मी की जेब पर भारी पड़ रहे हैं। मप्र सरकार 31 अक्टूबर 2021 से मात्र 78 रुपये कुशल ठेकाकर्मी की पगार बढ़ा रही है, जो ऊंट के मुंह में जीरे के समान है। केंद्र सरकार, दिल्ली राज्य सरकार व तेलंगाना अपने ठेकाकर्मी को प्रतिदिन 824 रुपये वेतन देती है तो मप्र में मात्र 424 रुपये। मप्र सरकार को यह अंतर पाटना चाहिए।

Posted By: Nai Dunia News Network

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