मामला व्यापारी के साथ 12 करोड़ 89 लाख रुपए की धोखाधड़ी की साजिश का

-न्यायालय ने आरोपित को 24 अक्टूबर तक जेल भेजा

-फर्जी बिल बनाने के मामले में पुलिस ने प्रकरण तीन धाराओं का किया इजाफा

जावरा। नईदुनिया न्यूज

एक व्यापारी द्वारा दूसरे व्यापारी के साथ 12 करोड़ 89 लाख की धोखाधड़ी करने के मामले में शहर थाना पुलिस ने शुक्रवार शाम भाजपा व्यापारी प्रकोष्ठ के नगर संयोजक राजकुमार पिता मांगीलाल पोरवाल (48) निवासी कोठी बाजार जावरा को गिरफ्तार किया। आरोपित को पुलिस ने शनिवार को न्यायालय में पेश किया, जहां से उसे 24 अक्टूबर तक जेल भेजने के आदेश जारी किए। पुलिस ने आरोपित को जेल भिजवाया। मुख्य आरोपित विजय पोरवाल भी न्यायिक हिरासत में है।

शहर थाना से मिली जानकारी अनुसार मामले में मुख्य आरोपित विजय पोरवाल को पुलिस ने 28 अगस्त को हिरासत में लिया था। मुख्य आरोपित से पूछताछ के आधार पर पुलिस ने व्यापारी राजकुमार पोरवाल से दस्तावेज मांगे थे। व्यापारी राजकुमार पोरवाल ने फर्म स्वामी ट्रेडर्स के दस्तावेज पेश किए। उक्त फर्म की प्रोप्रायटर अलका पोरवाल, जो राजकुमार पोरवाल की पत्नी है। उक्त फर्म की लेन-देन का कार्य राजकुमार द्वारा किया जाता था। राजकुमार द्वारा पुलिस को जो दस्तावेजों पेश किए, उनमें जिन कि सानों को खल बेचना बताया था, उनसे पुलिस ने पूछताछ की, तो उन्होंने खल खरीदने से इंकार किया। वहीं वर्ष 2017 के बाद के खल के जो भी बिल बने हैं, उसमें कि सी भी खरीददार का नाम नहीं लिखकर फर्जी बिल बनाए गए। फर्जी बिल बनाने के आरोप में पुलिस ने उक्त प्रकरण में भादवि की धारा 467, 468, 34 का इजाफा किया है। जबकि पूर्व में पुलिस द्वारा उक्त प्रकरण में भादवि की धारा 420, 406 में अपराध पंजीबद्ध किया था। पुलिस ने फर्जी बिल बनाने व फरियादी के साथ धोखाधड़ी करने के मामले में आरोपित राजकुमार पोरवाल को गिरफ्तार किया। उसे शनिवार को न्यायालय में पेश किया, जहां से आरोपित को 24 अक्टूबर तक जेल भेजने के आदेश जारी हुए।

यह है मामला

मालूम हो कि 21 अगस्त को फरियादी मोहम्मद इरफान ने शहर थाना पर रिपोर्ट दर्ज कराई थी। इसमें बताया था कि विजय पोरवाल को वह करीब 10 वर्षों से जानता है। विजय खल-कपास व अनाज का व्यापार करता है। मेरी दुकान का नाम मोहम्मद अजीज ट्रेडर्स है। मेरा परिवार उक्त व्यापार बरसो से कर रहा है। विजय को व्यापार करने के लिए अप्रैल 2015 से समय-समय पर किस्तों में राशि दी। अप्रैल 2015 से अक्टूबर 2018 तक 12 करोड़ 89 लाख रुपए की राशि उधार दी थी। जब विजय से उधारी के पैसे मांगे, तो उसने टालमटोल जवाब दिए और वर्तमान में विजय तीन माह से फरार है। विजय ने उससे गेहूं का व्यापार करने के लिए 30 से 35 लाख रुपए 2015 तक लिए थे। उस समय विजय ने मुझे नया बिजनेस करने की सलाह दी। इसमें शासकीय गोडाउन से एफसीआई का अनाज का टेंडर प्राप्त कर व्यापार करने का बतलाया और बताया कि उसने उक्त व्यापार करने की सभी कार्रवाई पूरी कर ली है। अब व्यापार में माल खरीदने के लिए बड़ी रकम की आवश्यक होती है और विजय ने मुझे उक्त व्यापार में रुपए लगाने व उस पर मुनाफा प्राप्त करने का प्रस्ताव दिया था। मैंने अप्रैल 2015 से उक्त व्यापार चालू किया था। विजय को नकदी राशि अदा की थी। विजय मुझसे नकद राशि प्राप्त कर बैंक ऑफ इंडिया शाखा जावरा में जमा करवाने के लिए बैंक में ही बुलाता था। व्यापार में लगाई गई राशि का 9 से 10 प्रतिशत मुनाफा प्राप्त होता था। जिससे विजय व मैं अपना हिस्सा आधा-आधा कर लेते थे। विजय ने शासन से अनाज खरीदने के दस्तावेज कई बार मुझे दिखाए थे, जिस पर एफसीआई की सील लगी होती थी। उक्त फर्म विजय की माता कलावती के नाम से बनाई गई थी। मैंने विजय को अप्रैल 2015 से मार्च 2018 तक करीब 12 करोड़ 90 लाख रुपए की राशि अदा की थी। उक्त राशि मैं अपने मिलने वालो, साथियों, रिश्तेदारों व कि सानों से व्यापार में रुपया लगाने के लिए प्राप्त करता था। उक्त नकद राशि मैं विजय को देता था। उसके बाद विजय पोरवाल ने मुनाफा देना बंद कर दिया। इस मामले में 25 मार्च 2018 को हमारी बैठक हुई। विजय ने राशि अदा करने का आश्वासन दिया था। लेकि न विजय ने मुझे कोई राशि नहीं लौटाई। विजय पर भरोसा कर 12 करोड़ 89 लाख रुपए की राशि प्राप्त कर उसने मेरे साथ धोखाधड़ी की है। पुलिस ने फरियादी की रिपोर्ट पर आरोपित विजय पोरवाल को 28 अगस्त को हिरासत में लिया था। जिसे 30 अगस्त को न्यायालय में पेश किया, जहां से न्यायालय ने उसे जेल भेजा था। तभी से आरोपित विजय न्यायिक हिरासत में है। आरोपित विजय ने पुलिस को पूछताछ में जिन चार लोगों के नाम बताए थे, उनसे पुलिस ने पूर्व में ही पूछताछ की थी। इसमें आरोपित राजकुमार भी शामिल है।

फोटो 12 जेएओ 14 - शहर थाना प्रांगण में पुलिस के साथ आरोपित राजकुमार पोरवाल।