रतलाम/आलोट (नईदुनिया न्यूज)। ताल तहसील के अलग-अलग गांवों में स्थित किसानों की भूमियों को दूसरों के नाम करने व जिन लोगों के नाम जमीन हुई उनके द्वारा बैंकों से 28.80 लाख रुपये का केसीसी (किसान क्रेडिट कार्ड) लोन लेने के मामले सामने आए हैं। जांच के बाद बरखेड़ा पुलिस ने ग्राम सुरजना, केलूखेड़ा एवं शमीमाबाद के तत्कालीन पटवारी गोवर्धनलाल ओहरी, उनके साथी रामेश्वर पाटीदार सहित दस आरोपितों पर भादंवि की धारा 420, 467, 468, 471, 120 बी, 34 के तहत कूटरचना कर दस्तावेजों में हेरफेर करने व षड्यंत्रपूर्वक धोखाधड़ी करने के दो प्रकरण दर्ज किए हैं।

कुछ माह पहले किसानों ने आलोट विधायक मनोज चावला के नेतृत्व में प्रशासन को राजस्व अभिलेखों में तत्कालीन हल्का पटवारी गोवर्धनलाल ओहरी द्वारा हेरफेर करने के संबंध में शिकायत की थी। ताल व आलोट के तहसीलदार व राजस्व निरीक्षक की टीम ने जांच की। अब एक मामले में आरोपित पटवारी गोवर्धनलाल ओहरी निवासी ग्राम झरखेड़ी हालमुकाम रतलाम तहसील कार्यालय, रामेश्वर पाटीदार निवासी ग्राम रणायरा (ताल), रवि श्रीवास्तव, जगदीश, श्यामाबाई पत्नी रंगलाल, मायाबाई पत्नी जगदीश, कारूलाल पुत्र रायसिंह व राजेंद्रसिंह पुत्र जयनारायण सभी निवासी ग्राम केलूखेड़ा के खिलाफ प्रकरण दर्ज किया गया है। दूसरे मामले में पटवारी गोवर्धनलाल ओहरी, रामेश्वर पाटीदार, जगदीश, समरथ पुत्र भग्गाजी निवासी ग्राम सुरजना व रवि श्रीवास्तव, जानी को आरोपित बनाया गया है।

पट्टे की जमीन की रजिस्ट्री भी करा दी

जांच में पाया कि ग्राम सुरजना में अलग-अलग किसानों के खसरा नंबरों की कुल रकबा 1.210 हेक्टेयर भूमि वर्ष 2020-21 में गोकुलनाथ पुत्र उंकारलाल के नाम से दर्ज कर पारित आदेश में न्यायालय तहसीलदार के 9 अगस्त 2007 को पारित आदेश का उल्लेख किया है। गोकुलनाथ का कहना है कि वह मजदूरी करता है। उक्त भूमियां उसकी नहीं है, न ही उक्त संबंध में राजस्व न्यायालय में कोई प्रकरण चला है। ग्राम सुरजना में ही खसरा नम्बर 426 पर वर्ष 20-21 में भुवान गुर्जर के नाम पट्टे की अहस्तांतरणीय भूमि दर्ज थी, जबकि उक्त भूमि वर्तमान में मोडीबाई के नाम से दर्ज है। भुवान की पत्नी अमरीबाई ने बताया कि उनके पति का निधन हो चुका है। एक वर्ष पहले उक्त जमीन मोडीबाई को बेच दी थी। रजिस्ट्री रमेश पाटीदार ने उन्हें नहीं देकर अपने पास रखी है।

इसी प्रकार ग्राम सुरजना की दस अलग-अलग खसरा नम्बरों की रकबा 5.320 हैक्टर व एक अन्य खसरा नम्बर की रकबा 1.550 हैक्टर भूमि समरथ पुत्र भग्गा के नाम से दर्ज करा दी गई है। उक्त भूमि इंडसइंड बैंक जावरा में बंधक रखी गई है। समरथ ने अपने बयान में बताया कि जगदीश उनका दोस्त है। उनके दादा की पट्टे की जमीन के कागज उसे दिए थे। उक्त भूमि मेरे नाम से दर्ज की थी। उसने बताया कि बंदोबस्त हो जाने से खसरा नंबर बदल गए हैं। जब तीसरी बार बैंक गए, तब जगदीश व रवि श्रीवास्तव साथ थे। 8.80 लाख रुपये उसी दिन बैंक से निकाले थे। उन्हें तीस हजार रुपये दिए थे, शेष रुपये जगदीश व रवि ने रखे थे। वहीं ग्राम सुरजना की 14 खाता नंबरों की रकबा 6.570 हेक्टेयर जमीन परसराम पुत्र लक्ष्‌मण के नाम से दर्ज की गई है। परसराम ने बताया कि उक्त भूमि उनके नाम पर कैसे आई, उन्हें पता नही।

केसीसी कराने के बाद पावती जला दी

शमीमाबाद स्थित दो भूमियां श्यामाबाई पत्नी रंगलाल के नाम दर्ज कर दी गई। उसमें तहसीलदार के 2008 के आदेश का उल्लेख किया गया है। यह प्रकरण एवं इस वर्ष की राजस्व प्रकरण पंजी तहसील कार्यालय में उपलब्ध नहीं है। यह जमीन इंडसइंड बैंक इंदौर मे बंधक रखी गई है। श्यामाबाई ने बयान मे बताया कि शमीमाबाद में उनकी कोई भूमि नही है। केसीसी बनवाने के लिए उसे ऋण पुस्तिका पटवारी ने दी थी। बैंक का एजेंट केसीसी बनवाने जावरा लेकर गया था। साढ़े ग्यारह लाख की केसीसी बनवाई थी। केसीसी बनवाने के बाद पावती जला दी गई।

जिनके नाम पर जमीन, उन्हें पता ही नहीं

कुछ खसरा नंबरों की भूमि विष्णुबाई पत्नी अमरसिंह व अन्य सह खातेदारों के नाम पर थी, जिसे कमलसिंह पुत्र जुझार के नाम दर्ज कर दी। कमलसिंह का कहना है कि समस्त जमीन विष्णुबाई पत्नी अमरसिंह, कैलाशबाई दलपतसिंह, माधोसिंह, सजनबाई देवजी, कचरू तथा उनके नाम से शामिल शरीक दर्ज थी। बंटवारा अनुसार नाम कटवाने का आवेदन दो साल पहले पटवारी को दिया था। उक्त सभी जमीन उनके अकेले के नाम कैसे दर्ज हुई उन्हें नहीं पता। कुछ माह पहले ऋण पुस्तिका पटवारी के साथी पाटीदार ने ले ली थी। इसी प्रकार अन्य लोगों की भूमियों में भी हेरफेर की गई।

Posted By: Nai Dunia News Network

NaiDunia Local
NaiDunia Local