रतलाम (नईदुनिया प्रतिनिधि)। सड़क दुर्घटनाओं से तभी बचा जा सकता है, जब सभी लोग यातायात नियमों का पालन करें। शराब पीकर, तेजगति व लापरवाही से वाहन चलाने वाले बम की तरह होते हैं। वे स्वयं व दूसरों के लिए भी खतरा बनते हैं। नशा नहीं करें। नियमों का पालन करते हुए दुर्घटनाओं से बचें और अपने परिवार को भी बचाएं।

यह बात जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव व अपर सत्र न्यायाधीश साबिर अहमद खान ने पुलिस प्रशासन द्वारा सोमवार दोपहर राजपूत बोर्डिंग परिसर में आयोजित 32वां राष्ट्रीय सड़क सुरक्षा माह के शुभारंभ समारोह को संबोधित करते हुए कही। उन्होंने कहा कि सड़क हादसे में जो व्यक्ति प्रभावित होता है, वह अकेला नहीं होता है। उसकी पीड़ा माता-पिता, भाई-बहन, पति, पत्नी, बेटा-बेटी यानि पूरा परिवार जीवन भर झेलता है। जिला पंचायत प्रधान प्रमेश मईड़ा ने कहा कि नियमों का पालन करें। मैं बस ड्राइवर रहा और जब भी बेटे के साथ वाहन पर जाता तो उसे नियमों से वाहन चलाने के लिए कहता था।

मंच पर जिला पंचायत सीईओ संदीप केरकट्टा, एएसपी (शहर) डा. इंद्रजीत बाकलवार भी उपस्थित रहे। प्रारंभ में यातायात डीएसपी मानसिंह चौहान, शहर सीएसपी हेमंत चौहान, जावरा सीएसपी प्रदीपसिंह राणावत, जिला परिवहन अधिकारी दीपक मांझी, सैलाना एसडीओपी एसआर सेंगर, आलोट एसडीओपी बीएल सोलंकी आदि ने अतिथियों का स्वागत किया। संचालन एएसपी (ग्रामीण) सुनील पाटीदार ने किया। अतिथियों ने राज्य शासन द्वारा शुरू किए गए नारी सम्मान अभियान पर आधारित पर्चे का भी विमोचन किया।

महामारी से बड़ी आपदा है सड़क हादसे

कलेक्टर गोपालचंद्र डाड ने कहा कि लापरवाही के साथ वाहन चलाना सड़क दुर्घटनाओं में मृत्यु का प्रमुख कारण है। लोगों को यातायात के नियमों का पालन अपनी आदत में लाना होगा। हर साल जिले में करीब 200 लोगों की मौत सड़क हादसों में होती है। जबकि सौ साल में आई कोरोना महामारी से जिले में 70 से 80 लोगों की मौत हुई है।

घायल को तत्काल उपचार दिलाएं

एसपी गौरव तिवारी ने सड़क सुरक्षा माह के आयोजन पर कहा कि पहले सड़क सुरक्षा सप्ताह मनाया जाता था। अब इसे माह के रूप में परिवर्तित कर दिया है। सड़क सुरक्षा व सैफ्टी के साथ हमारा फोकस हादसे में घायल को तत्काल इलाज उपलब्ध कराने पर भी है। घायल को पहले एक घंटे में तत्काल इलाज मिलना चाहिए। पुलिस अधिकारियों व कर्मचारियों की बैठकें लेकर उन्हें बताया कि घायल को अस्पताल लाने वाले को पूछताछ के नाम पर परेशान न करें। कोई भी निजी अस्पताल सड़क हादसे में घायल का इलाज करने से मना नहीं कर सकता। यह कानूनी अपराध है और दो साल तक की सजा का प्रविधान है।

Posted By: Nai Dunia News Network

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