रतलाम (नईदुनिया प्रतिनिधि)। राजस्थान सरकार के रतलाम से डूंगरपुर वाया बांसवाड़ा रेल परियोजना की लागत का आधा हिस्सा देने से इन्कार के बाद रेलवे बोर्ड द्वारा परियोजना फ्रीज करने से मप्र में भी इसका काम रुक गया है। अब क्षेत्र के सांसदों ने इस परियोजना को गति देने की दिशा में प्रयास शुरू कर दिए हैं। मप्र में यह दूसरी बड़ी रेल परियोजना है, जो रुकी है। कोरोना संकट के कारण रेलवे ने इंदौर से छोटा उदयपुर-दाहोद रेल परियोजना का काम भी फिलहाल बंद कर दिया है।

मप्र के रतलाम व राजस्थान के बांसवाड़ा, डूंगरपुर जिले आदिवासी बहुल क्षेत्र हैं। इस परियोजना से इन क्षेत्रों में विकास को गति मिलने की उम्मीद जताई जा रही थी। वर्ष 2010-11 में राजस्थान सरकार ने लागत का आधा हिस्सा वहन करने का प्रस्ताव दिया तो रेलवे बोर्ड ने काम आगे बढ़ाया।

राजस्थान के बांसवाड़ा में प्रस्तावित पॉवर प्लांट के लिए इस रेल लाइन की बेहद आवश्यकता थी, लेकिन योजना का काम चल ही रहा था कि पॉवर प्लांट की योजना निरस्त हो गई। इस पर मई 2018 में राजस्थान सरकार ने लागत वहन करने से इन्कार कर दिया। योजना का बड़ा हिस्सा राजस्थान में ही है।

मप्र के हिस्से में भू-अर्जन के लिए रतलाम कलेक्टर ने मई 2019 में उत्तर पश्चिम रेलवे के उप मुख्य अभियंता निर्माण को पत्र लिख मुआवजे की बकाया 28.18 करोड़ रुपये की राशि मांगी जो नहीं मिली। हाल ही में लंबित परियोजनाओं को लेकर फिर से जानकारी मांगी गई। कलेक्टर गोपालचंद्र डाड ने प्रदेश के परिवहन विभाग के अपर सचिव को राशि नहीं मिलने व परियोजना की वर्तमान स्थिति की जानकारी 7 नवंबर को भेजी है।

तीन सांसदों ने रेलमंत्री को बताए हालात

राजस्थान सरकार के रवैये से योजना बंद होने के बाद रतलाम सांसद गुमानसिंह डामोर, बांसवाड़ा सांसद कनकमल कटारा, उज्जैन सांसद अनिल फिरोजिया ने रेलमंत्री पीयूष गोयल से मुलाकात कर परियोजना को आदिवासी क्षेत्रों के विकास के लिए अहम बताया। सांसदों ने बताया कि आदिवासी अंचल में राजस्व के बजाए विकास को केंद्र में रखकर परियोजना का काम शुरू किया जाए।

योजना की वर्तमान स्थिति

मप्र सीमा में 49 किमी ट्रैक रतलाम रेल मंडल की सीमा में है। रेलवे ने 175.56 हेक्टेयर जमीन अधिग्रहित की। इसके बाद, सैलाना व शिवगढ़ क्षेत्र में अर्थवर्क शुरू हो गया। कुल 38 करोड़ रुपए मुआवजा बंटना था। राजस्थान सरकार से पहले चरण में 20 करोड़ रुपये मिले। शेष 18 करोड़ रुपये नहीं दिए। मई 2019 में जिला प्रशासन ने उत्तर पश्चिम रेलवे के उप मुख्य अभियंता निर्माण को पत्र लिख मुआवजे के 18 करोड़ 48 लाख 19 हजार 832 रुपये, देरी के चलते 30 अप्रैल 2019 तक ब्याज के 9 करोड़ 13 लाख 92 हजार, अवशेष राजस्व सेवा प्रभार राशि 93 लाख 78 हजार 928 रुपये व वन विभाग के 56 लाख रुपये सहित कुल 28 करोड़ 18 लाख 11 हजार 832 रुपये की राशि मांगी थी। यह राशि नहीं मिलने से काम रोक दिया गया।

ये परियोजना भी अटकी...

-दाहोद-इंदौर रेल परियोजना- इंदौर को धार-झाबुआ -छोटा उदयपुर होते हुए दाहोद से जोड़ने के लिए वर्ष 2008 में इंदौर-दाहोद परियोजना शुरू की गई थी। 204 किमी लंबी और 2 हजार करोड़ रुपए की लागत वाली इस योजना को 2022 में पूरा होना था। इस योजना में 41 बड़े पुल, 290 छोटे पुल और 32 रेलवे स्टेशन बनाए जाने थे। डेढ; साल पहले पीथमपुर के पास 140 करोड़ की लागत से 2.90 किमी की सुरंग का निर्माण भी शुरू कर दिया गया था। सुरंग का काम करीब 50 प्रतिशत तक पूरा हो चुका था। लेकिन बाद में इसे बंद कर दिया गया, जबकि इस पर 70 करोड़ रुपए से अधिक राशि खर्च की जा चुकी है। अब इस सुरंग को बंद करने की बात की जा रह है। इस पर भी करोड़ों रुपए खर्च होंगे। फिलहाल पूरे ट्रैक पर ही काम बंद कर दिया गया है।

इनका कहना है

रेलमंत्री से मिलकर रेल परियोजना की आवश्यकता से अवगत कराया है। राजस्थान सरकार के रवैये से काम अटक गया है। हर परिस्थिति में काम वापस प्रारंभ करवाएंगे।

गुमानसिंह डामोर, सांसद रतलाम

फैक्ट फाइल

-2082.74 करोड़ थी प्रारंभिक लागत।

-4262 करोड़ रुपये से अधिक हुई वर्तमान लागत।

-192 किमी रेल लाइन डाली जाएगी।

-142.85 किमी राजस्थान में

-49.15 किमी मध्यप्रदेश में

- 19 प्रस्तावित स्टेशन

- 400 छोटे ब्रिज

-6 बड़े रोड ओवर ब्रिज

- 90 पुलिया रूट में

Posted By: Hemant Kumar Upadhyay

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