रतलाम(नईदुनिया प्रतिनिधि)। इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च, स्वास्थ्य मंत्रालय और अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान द्वारा संयुक्त रूप से कोरोना मरीजों के लिये एक डाटाबेस तैयार किया जा रहा है। इसे नेशनल कोविड रजिस्ट्री नाम दिया गया है। देश के 100 मेडिकल कॉलेज इस पर काम कर रहे हैं, जिसमें शासकीय मेडिकल कॉलेज रतलाम भी शामिल है। इसके लिए कोरोना संक्रमितों के घर तक डॉक्टरों की टीम जाएगी और यह पता किया जाएगा कि कोरोना मरीजों का और कैसे बेहतर ढंग से इलाज किया जा सकता है। इलाज की कौन सी नयी पद्दतियां कोरोना मरीजों के लिये ज्यादा कारगर साबित होंगी।

आइसीएमआर की एथिक्स समिति की मंजूरी मिलने के बाद रतलाम मेडिकल कॉलेज की टीम ने इस पर काम शुरू कर दिया है। डॉ. ध्रुवेंद्र पांडेय ने बताया कि डीन डॉ. शशि गांधी के निर्देश पर हमारी टीम नेशनल कोविड रजिस्ट्री के जरिये डाटाबेस तैयार करेगी। पता लगाया जायेगा कि जो लोग ठीक हो रहे हैं, उनमें क्या समानताएं हैं। वे कैसे ठीक हो रहे हैं। उसमें रोग प्रतिरोधक क्षमता और दवाइयों का कितना योगदान है। जिन मरीजों की मौत हो गई है, उन्हें किस तरह की परेशानी हुई? रोग प्रतिरोधक क्षमता का इससे कितना संबंध है। क्या वे अनुवांशिक तौर पर ही कमजोर थे या किसी बीमारी को ढो रहे थे। इसके जरिये कोरोना वायरस को लेकर किये जा रहे अनुसंधान को बढ़ावा दिया जायेगा।

वैज्ञानिक तरीके से जुटाएंगे जानकारी

नेशनल कोविड रजिस्ट्री के माध्यम से क्लिनिकल एंटरप्राइजेस और क्लिनिकल वर्क से हासिल आंकड़ों के जरिये व्यवस्थित, वैज्ञानिक और संरक्षित तरीके से डाटा जुटाया जाएगा। डॉक्टरों, वैज्ञानिकों, विश्लेषकों और जैव वैज्ञानिकों की टीम इस डाटाबेस को संचालित करेगी। इस स्टडी के जरिये कोरोना महामारी को बेहतर ढंग से समझा जा सकेगा। इस स्टडी के जरिये पता लगाया जाएगा कि बीमारी को फैलने में कौन से कारक मदद करते हैं। इसका क्या प्रतिकूल परिणाम होता है। साथ ही ये पता लगाने की कोशिश की जायेगी कि क्या कोरोना संक्रमण के पीछे और भी कारक काम करते हैं।

आयु व वर्ग वार संक्रमण की स्थिति समझेंगे

डॉ. धुर्वेंद्र पांडेय का कहना है इसमें ये भी पता लगाया जा सकेगा कि किस लिंग या आयु वर्ग के लोगों को कोरोना वायरस ज्यादा नुकसान पहुंचा रहा है। किस लिंग या आयु वर्ग के लोग गंभीर रूप से बीमार पड़ जाते हैं और किस लिंग या आयु वर्ग के लोगों की व्यापक पैमाने पर मौत हो जाती है। इससे स्वास्थ्यकर्मियों को इलाज करने में सुविधा मिलेगी, साथ ही वैक्सीन के ट्रायल में भी मदद मिलेगी। किस लिंग या आयु वर्ग को कौन सी दवा देनी है, नेशनल कोविड रजिस्ट्री इसमें भी स्वास्थ्यकर्मियों की मदद करेगी। डॉ. ध्रुवेंद्र पांडेय ने बताया कि जितने भी मरीज जिले में पॉजिटिव आए है, उनका डाटाबेस तैयार किया जाएगा। एक साल में रिपोर्ट देनी है।

Posted By: Nai Dunia News Network

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