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- चातुर्मास : पिपलौदा में आयोजित धर्मसभा में डॉॅ. सिद्धरत्न विजयजी ने कहा -

पिपलौदा। नईदुनिया न्यूज

गच्छाधिपति नित्यसेन सूरीश्वरजी की निश्रा में श्री शंखेश्वर पार्श्वनाथ धाम पर चल रहे पावनीय चातुर्मास महोत्सव में उपधान तप व नवपद ओली के आराधक नित्य धार्मिक क्रियाएं कर कठोर तपस्या में लीन हैं, वहीं प्रतिदिन दूरदराज क्षेत्र से ग्रामीणजन व श्रीसंघ पहुंचकर प्रवचन श्रवण कर दर्शन लाभ ले रहे हैं। प्रवचन के दौरान मुनिश्री डॉ. सिद्धरत्न विजयजी ने नवपद ओली आराधना के आठवें दिन चारित्र पद के बारे में बताते हुए कहा कि जिनशासन में चरित्र विण मुक्ति नहीं यह सिद्धांत सर्वोपरि है। इस सिद्धांत की सिद्धि स्वयं तीर्थंकर परमात्मा चारित्र ग्रहण कर करते हैं। हमारे 16वें, 17वें, 18वें तीर्थंकर चक्रवर्ती थे। वे जानते भी थे कि इसी भव में अवश्य ही मोक्ष होने वाला है। फिर भी छह खंड की रिद्धि को त्याग कर चारित्र ग्रहण किया। वे यह भी जानते थे कि चारित्र ग्रहण किए बिना मुक्ति नहीं है।

मुनिश्री तारकरत्न विजयजी ने आत्म भावना प्रार्थना करवाई। मुनिश्री विद्वदरत्न विजयजी, प्रशमसेन विजयजी, निर्भयरत्न विजयजी, साध्वी भाग्यकला श्रीजी आदि ठाणा उपस्थित थे। श्री शंखेश्वर पार्श्वनाथ धाम प्रचार सचिव प्रफुल्ल जैन ने बताया कि सुबह नरेंद्र पटवा परिवार ने गहुली की। वाटिका अध्यक्ष शैलेंद्र हर्ष कटारिया परिवार ने दादा गुरुदेव राजेंद्र सूरीश्वरजी व पुण्य सम्राट लोकसंतश्री जयंत सेन सूरीश्वरजी की आरती उतारी। पारसमल धींग राकोदा, देवीचंद्र हस्तीमल हिराणी मद्रास, अंबुजा मेटर्स ग्रुप नेनावा, छतिदेवी गणेशमल छाजेड़ नेनावा ने प्रभावना वितरित की। श्रीसंघ अध्यक्ष बाबूलाल धींग ने सभी लाभार्थियों का बहुमान किया। संचालन चातुर्मास प्रभारी राकेश जैन ने किया।

'ऐतिहासिक पिपलौदा' पुस्तक भेंट

पिपलौदा नगर व आसपास क्षेत्र के इतिहास को संजोकर बनी 'ऐतिहासिक पिपलौदा' पुस्तक गच्छाधिपतिश्री को नगर के इतिहासकार बाबूलाल पाठक ने भेंटकर आशीर्वाद लिया। श्रीसंघ व परिषद परिवार ने पाठक को अभिनंदन पत्र, शॉल, श्रीफल भेंटकर सम्मानित किया। पिपलौदा नगर के इतिहास को संजोने पर खूब-खूब अनुमोदना की गई।

12आरटीएम-31 : पिपलौदा में आयोजित धर्मसभा में उपस्थित श्राविकाएं। नईदुनिया

12आरटीएम-32 : गच्छाधिपतिश्री नित्य सेन सूरीश्वरजी को पुस्तक भेंट करते हुए बाबूलाल पाठक व अन्य। नईदुनिया

बाल स्नात्र महोत्सव

रतलाम। सायर चबूतरा स्थित गुजराती उपाश्रय में आचार्यश्री अशोक सागर सूरीश्वरजी, सौम्यचंद्र सागरजी, विवेकचंद्र सागरजी, मतिचंद्र सागरजी, मुनिश्री धैर्यचंद्र सागरजी, श्रुतचंद्र सागरजी, साध्वी गुणज्ञा श्रीजी, प्रियदर्शना श्रीजी, मुक्तिदर्शना श्रीजी आदि की निश्रा में नवपद ओलीजी की तपस्या की जा रही है। प्राचीन बिबड़ौद तीर्थ में 48 दिवसीय उपधान तप किया जा रहा है। पारस भंडारी ने बताया कि बाल स्नात्र महोत्सव श्री चिंतामणि शंखेश्वर पार्श्वनाथ जिनालय स्टेशन रोड पर होगा। गीत-संगीत के साथ परमात्मा का अभिषेक-पूजन किया जाएगा।

मन को नियंत्रित करने का अभ्यास करें

बाजना। उपधान तप की आराधना के चौथे दिन गणिवर्य आदर्श रत्न सागरजी ने धर्मसभा को संबोधित करते हुए कहा कि क्रिया करते समय अनुभूति होना चाहिए तो ही आराधना सार्थक होती है। मन अति चंचल होता है। उसे स्थिर नहीं किया तो वह विपरीत परिस्थितियों में उधा कक्षा की भावना को नीचे ले जाता है। मन आराधना में साधक भी बनता है और बाधक भी। अतः उसे नियंत्रण करने का अभ्यास करना चाहिए। उपधान तप की दूसरी नीवी का लाभ बांसवाड़ा के भरतलाल हार्दिक नानावटी परिवार ने लिया। संघ पूजा आशीष पालरेचा ने की। उदयपुर से गुरुदेव के दर्शन के लिए डॉ. शैलेंद्र जैन ट्रस्ट मंडल ने चातुर्मास की विनती की। आदर्श रत्न सागरजी की 16 दिवसीय मौन सूरी मंत्र आराधना रविवार रात से प्रारंभ होगी, जो 28 अक्टूबर दीपावली तक चलेगी। आराधना पूर्ण होते ही 29 अक्टूबर को नववर्ष की महामांगलिक होगी। श्रीसंघ की ओर से डॉ. शैलेंद्र जैन ट्रस्ट मंडल व भरतलाल नानावटी का बहुमान किया गया। दीपक कोठारी, विनोद पालरेचा, अर्पण चौरड़िया, लोकेश पालरेचा, सतीश चौरड़िया आदि उपस्थित थे। संचालन विमल कोठारी ने किया।

12आरटीएम-24 : बाजना में गुरुदेव से चातुर्मास की विनती करते हुए उदयपुर श्रीसंघ के पदाधिकारी। नईदुनिया

कुशलकुंवरजी की जयंती आज

रतलाम। आचार्यश्री आनंद ऋषिजी की शिष्या साध्वी कुशल कुंवरजी की 80वीं जयंती 13 अक्टूबर को मनाई जाएगी। जयंती पर अनेक सेवा कार्य किए जाएंगे। यह जानकारी आनंद धाम ऋषि संप्रदाय ट्रस्ट अध्यक्ष एससी कटारिया ने दी।

मोक्ष पाने के लिए पद्म बनना पड़ेगा

- नीमचौक स्थानक में सौम्यदर्शनजी ने कहा

रतलाम। श्री वर्धमान स्थानकवासी जैन श्रावक संघ नीमचौक में सौम्यदर्शनजी ने मोक्ष को पाना है तो पद्म बनना पड़ेगा। पद्म मतलब है कमल। कमल का जन्म कीचड़ में होता है, लेकिन वो कीचड़ में गलता नहीं है, सड़ता नहीं है, धंसता नहीं है। कमल कीचड़ से ऊपर रहता है। कीचड़ से निर्लिप्त रहता है। कमल के ऊपर एक झिल्ली होती है। उसे सड़ने गलने से बचाती है।

नवकार डिजाइन प्रतियोगिता

बालिक मंडल अध्यक्ष आयुषी पटवा ने बताया कि 13 अक्टूबर से प्रियदर्शन मुनिजी के मार्गदर्शन व सान्निाध्य में बालिका मंडल द्वारा नवकार डिजाइन प्रतियोगिता आयोजित की जा रही है। इसमें विजेताओं को कमला बहू मंडल द्वारा पुरस्कृत किया जाएगा। प्रतियोगिता में रतलाम नगर का कोई भी इच्छुक व्यक्ति भाग ले सकेगा। न्यूनतम उम्र नौ वर्ष रखी गई है। नवकार डिजाइन में विजेताओं का चयन डिजाइनिंग, डेकोरेशन, बॉर्डर, शुद्ध लेखन इन सब मानदंड के अनुसार किया जाएगा। फाइल जमा करवाने की अंतिम तिथि 2 नवंबर रखी गई है।