प्रतापगढ़। प्रतापगढ़ में सागरमल पारसमल तडवेचा रमेशचंद मोगरा के एरियापति रोड स्थित निवास पर शासन प्रभाविका मालव कीर्ति महासती कीर्ति सुधा आदि ठाणा-पांच का पदार्पण हुआ। धर्मसभा में महासती आराधना श्रीजी ने कहा जिनशासन सागर के रत्नाकर के समान हैं। भिखारी सड़क पर भीख मांगता है और करोड़पति मंदिर में। महासती ने कहा कि त्रास जीवों को सताना भी महापाप है।

वेदना की चीख सुनना सीख जाओगे तो पाप से डरने लग जाओगे। भव तीर जाएगा। मन के दुर्भाव पतन का कारण है। परिवार के प्रति समर्पण, मैत्री भाव आएगा तो तू-तू मैं-मैं नहीं होगी। परिवार नहीं टूटेगा। महासती कीर्ति सुधाजी ने कहा सुखी बनना चाहते हो तो अपनी ओर देखो। भीतर देखो। संसार कर्म प्रधान है। जैसा कर्म वैसा फल। व्यक्ति की पहचान वाणी से बोली की गोली हजारों की होली जला देती है। छोटी-सी जुबान मचाती तूफान, जिनवाणी सभी को आनंद देती है जो पीछे रहता है, वह आगे नहीं बढ़ सकता। भाषा शैली ही ऐसा जादू है, जो दुश्मन को मित्र बना देती है। गलत वाणी हॉस्पिटल व हाईकोर्ट पहुंचा देती है। अपनी वाणी सुंदर होगी तो सांवला रंग भी सुंदर लगेगा। सब चाहेंगे कोयल बोलती है, उसे सब पसंद करते हैं। जीभ बोलकर भी बिगाड़ा करती है व खाकर भी बिगाड़ा करती है। आजीवन शीलव्रत पालन करने के सौगंध शांतिचंद नागौरी ने ली।

वर्धमान स्थानकवासी जैन श्रावक संघ की ओर से नागौरी का बहुमान किया गया। संचालन वर्धमान स्थानकवासी जैन श्रावक संघ अध्यक्ष अंबालाल चंडालिया ने किया। आभार पारसमल तड़वेचा ने माना। चातुर्मास समिति सदस्य गजेंद्र चंडालिया ने बताया कि बुधवार सुबह 9 बजे राजेंद्र कुमार, पवन कुमार, प्रदीप कुमार चौधरी दलोट वाले के निवास राधाकृष्ण नगर, प्रगति स्कूल के पीछे अमलावद रोड प्रतापगढ़ पर भक्तामर पाठ व प्रवचन होंगे।

Posted By: Nai Dunia News Network