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- दिसंबर तक 233534 परिवारों का होना है सत्यापन, अब तक 36.41 प्रतिशत ही हो पाया-

रतलाम। नईदुनिया प्रतिनिधि

जिले में सरकारी राशन दुकानों से सस्ता राशन प्राप्त करने वाले 233534 परिवारों का सत्यापन चल रहा है जिसमें अब तक 85020 का ही सत्यापन हो पाया है। सत्यापित परिवारों में 329 परिवार ऐसे हैं जिन्होंने एम राशन मित्र एप का उपयोग किया है जबकि हर परिवार को एम मित्र का उपयोग करना है जिसके लिए जिला प्रशासन की टीम काम कर रही है। पिछले महीने से सत्यापन का काम चल रहा है पर अभी तक की रिपोर्ट ठीक नही है। जिन परिवारों से टीम ने संपर्क किया है वहीं एम राशन मित्र का उपयोग नहीं कर रहे हैं।

जिले की सात नगर परिषद, एक नगर पालिका, एक नगर निगम और छह जनपद पंचायतों में चल रहे सत्यापन कार्य में नगर निगम रतलाम की स्थिति सबसे खराब है। अब तक 36.41 प्रतिशत हुए सर्वे में नगर निगम रतलाम की प्रगति 3.07 प्रतिशत है। एप मास्टर डाटा 92.74 प्रतिशत डाउनलोड कर लिया गया है पर सत्यापन धीरे हो रहा है। विक्रेताओं के दबाव में सत्यापन दल काम नहीं कर रहे है। 1226 दल में 1009 ही एप से सर्वे कर रहे हैं। 31 दिसंबर तक सर्वे पूरा करना है।

चेतावनी के बाद भी नहीं हो रहा सुधार

इसके पहले सत्यापन सर्वे की समीक्षा कलेक्टर रुचिका चौहान ने की थी और जिन निकायों का कार्य धीमा चल रहा था उन्हें चेतावनी दी गई थी पर कोई अधिक सुधार नहीं हो रहा है। 15 नगरीय निकायों में सात में अभी तक 50 से 80 प्रतिशत सत्यापन हो चुका है। वहीं आठ ऐसे हैं जो इससे नीचे हैं। दो नगरीय निकायों में एक भी परिवार ने एम मित्र का प्रयोग नहीं किया है।

जिले की नगरीय निकाय

निकाय परिवार सत्यापित एम राशन मित्र प्रयोग सत्यापन प्रतिशत

रतलाम 24308 747 24 3.07

धामनोद 905 706 00 78.01

ताल 1903 1514 19 79.56

सैलाना 1383 1015 41 73.39

आलोट 2475 1789 16 72.28

पिपलौदा 894 582 04 65.10

बड़ावदा 1177 684 00 58.11

जावरा 9333 4089 20 43.81

नामली 1400 684 04 48.86

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जनपद पंचायतें

निकाय परिवार सत्यापित एम राशन मित्र प्रयोग सत्यापन प्रतिशत

जावरा 25132 12777 15-50.84

आलोट 30765 15097 57 49.07

पिपलौदा 19686 8965 58 45.54

रतलाम 46404 19074 51 41.81

सैलाना 28700 8802 13 30.67

बाजना 39324 8495 7 21.60

वर्जन-

जिले में सत्यापन दल द्वारा सर्वे किया जा रहा है। समय सीमा में सर्वे पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं। -विवेक सक्सेना, जिला आपूर्ति अधिकारी

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दो बोरी यूरिया के लिए नकद विक्रय

केंद्रों के मापदंडों में उलझे किसान

-जिले में पर्याप्त आवंटन का दावा, केंद्र पर लंबी कतारें

रतलाम। नईदुनिया प्रतिनिधि

जिले में अऋणी, डिफॉल्टर किसानों को यूरिया उपलब्ध कराने के लिए 20 नकद विक्रय केंद्र खोले गए हैं। इन केंद्रों में वितरण के लिए ऐसे नियम बना दिए हैं कि किसानों को दिन भर का समय देने के बाद दो बोरी यूरिया मिल रहा है। एक हेक्टेयर हो या 10 हेक्टेयर, सभी को पहली बार में दो बोरी यूरिया ही दिया जा रहा है। पर्याप्त आवंटन का दावा करने के बावजूद किसानों की लंबी कतारें केंद्रों पर दिन भर लग रही हैं।

कृषि विभाग का तर्क है कि ज्यादा उपलब्ध कराने से अधिक उपयोग होता है। इसलिए एक बार में दो बोरी यूरिया ही दिया जा रहा है, जिससे खेती हो जाए।इधर किसानों का कहना है कि जरूरत के अनुसार यूरिया नहीं मिलने से रबी की खेती बिगड़ रही है। संदला के रामसहाय सिंह ने बताया कि दो बोरी यूरिया मुश्किल से मिला है। उप संचालक जीएस मोहनिया ने बताया कि दिसम्बर में शासन से प्राप्त आवंटन के अनुसार रतलाम रैक पाइंट पर कुल आठ रैक यूरिया उपलब्ध होगी जिसमें से अभी तक दो रैक प्राप्त हो चुकी है, शेष छह रैक यूरिया आना शेष है।

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ठेकेदार पर नहीं कलेक्टर के आदेश का असर

-खुदाई के बाद मलबा नहीं हटाया, सड़क पर फैल रही मिट्टी

रतलाम। नईदुनिया प्रतिनिधि

शहर सराय से डाट की पुल तक सिटी टू-लेन निर्माण में पाइप लाइन डालने के कार्य में ठेकेदार की मनमानी जारी है। शनिवार को कलेक्टर रुचिका चौहान ने निरीक्षण के दौरान नाराजगी के बाद सड़क से मलबा, मिट्टी तत्काल उठाने के निर्देश दिए थे लेकिन रविवार को भी वही हालात बने रहे। पाइपलाइन फूटने से पानी सड़कों पर बहता रहा और कीचड़ से वाहन चालक फिसलते रहे।

कलेक्टर सहित निगमायुक्त एसके सिंह ने ठेकेदार को लाइन शिफ्टिंग के दौरान टूटने वाले नल कनेक्शनों में बूच लगाने के अलावा रहवासियों को नई लाइन से कनेक्शन देने, सड़क की मरम्मत करने के निर्देश दिए थे। रविवार सुबह सप्लाई होने पर न्यू रोड से दोबत्ती क्षेत्र में अलग-अलग जगह पानी बहता रहा और सड़क पर कीचड़ हो गया। अब आयुक्त ने कार्रवाई की चेतावनी दी है।

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ठेकेदार को पाइप लाइन डालने के बाद सड़क सुधारने व नल कनेक्शन बंद करने के लिए कहा था। रविवार को समस्या सामने आई जो कि सही नहीं है। ठेकेदार को नोटिस जारी कर कार्रवाई करेंगे।- एसके सिंह, आयुक्त-नगर निगम रतलाम

15आरटीएम-39 : न्यू रोड पर खुदाई से पाइप लाइन फूटने पर बहे पानी से फैल रहा कीचड़। नईदुनिया

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जिला अस्पताल में विशेषज्ञ डॉक्टर के दो

वर्षीय डिप्लोमा कोर्स की अनुमति का इंतजार

-सीपीएस से होगी संबद्धता, एमसीआई ने भी दी मान्यता

रतलाम। नईदुनिया प्रतिनिधि

शासकीय जिला अस्पताल में सीपीएस कोर्स चालू करने के लिए अनुमति का इंतजार है। कॉलेज ऑफ फिजिशियन एंड सर्जन मुंबई की टीम ने निरीक्षण कर रिपोर्ट भी पक्ष में दे दी है। बोर्ड से अनुमति मिलते ही कॉलेज ऑफ फिजिशियन एंड सर्जन मुंबई, सीपीएस के माध्यम से जिला अस्पताल में विशेषज्ञ डॉक्टर तैयार होने लगेंगे। एमसीआई से अनुमति मिलने के बाद प्रक्रिया पूरी हो गई है, सिर्फ अनुमति मिलना शेष है।

शासन स्तर से जिला अस्पताल में ही व्यावहारिक कक्षाओं के लिए तैयारी की गई है। दो साल के इस डिप्लोमा कोर्स के बाद संबंधित डॉक्टर विशेषज्ञ की भूमिका में काम करेंगे। इससे अस्पतालों में विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी को पूरा किया जा सकेगा। प्रदेश के 15 जिलों में चालू हो रही इस नई व्यवस्था में रतलाम सबसे आगे है। यहां पहले चरण में आर्थोपेडिक, मेडिसीन और सर्जरी के विशेषज्ञ तैयार किए जाएंगे। इसके लिए सिविल सर्जन से आवेदन लिए गए थे तो उन्होंने पांच तरह के विशेषज्ञ बनाने की मांग की थी पर तीन की ही अनुमति मिली है। सिविल सर्जन की देखरेख में यह कोर्स चलेगा और पीजी की पढ़ाई कराई जाएगी। इसके चालू हो जाने से जिला अस्पताल या जिले के अन्य अस्पतालों में पदस्थ डॉक्टर ड्यूटी के साथ आगे की पढ़ाई भी कर सकेंगे। जिला अस्पताल में ही क्लास लगेगी। सेवारत डॉक्टर्स के लिए यह नई व्यवस्था लाई गई है। जिला अस्पताल को अभी मेडिकल कॉलेज से संबद्ध किया गया है। इसके बाद उपकरणों, मरीजों की बुनियादी सुविधाओं को लेकर लगातार सुधार किया जा रहा है। संसाधनों की स्थिति में पहले से बेहतर सुधार हुआ है। कायाकल्प जैसी योजना पर अमल होने से सुविधाओं सुधार हो रहा है। नए भवन बनाने की तैयारी भी चल रही है।

यह फायदा होगा

- जिला अस्पताल सहित अन्य सरकारी अस्पतालों में विशेषज्ञ डॉक्टरों की पूर्ति की जा सकेगी

-डॉक्टरों को ड्यूटी के दौरान कोर्स पूरा करने मौका मिलेगा।

-ग्रामीण क्षेत्रों के अस्पतालों में विशेषज्ञों की कमी दूर की जा सकेगी।

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वर्जन--

सीपीएस का कोर्स संचालित करने के लिए तैयारी पूरी हो चुकी है। सीपीएस बोर्ड से अनुमति मिलने का इंतजार है। हमें तीन तरह के विशेषज्ञ कोर्स की अनुमति एमसीआई से मिली है। -डॉ. आनंद चंदेलकर, सिविल सर्जन, जिला अस्पताल रतलाम

15आरटीएम-40 : रतलाम जिला अस्पताल। (फाइल फोटो)

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राजधानी एक्सप्रेस में दो इंजन लेकिन 20 मिनट से ज्यादा की बचत नहीं

-ट्रेन की गति बढ़ाने के लिए रेलवे ने की थी कवायद

रतलाम। नईदुनिया प्रतिनिधि

मुंबई-दिल्ली रेलमार्ग राजधानी एक्सप्रेस को तेज गति से चलाने के लिए पुश-पुल के तहत दो इंजन जोड़कर ट्रायल ली जा रही है। अब तक की ट्रॉयल में गंतव्य तक पहुंचने के समय में मामूली बचत हुई है। ऐसे में ट्रायल फिलहाल कारगर साबित नहीं होता दिखाई दे रहा है। अतिरिक्त इंजन से परिचालन का खर्च भारी पड़ने लगा है। हर ट्रायल की रिपोर्ट पश्चिम रेलवे मुख्यालय एवं रेलवे बोर्ड भेजी जा रही है। रेलवे द्वारा हवाई मार्ग की तुलना में बेहतर सेवाएं देने की दिशा में प्रयोग किए जा रहे हैं। गति बढ़ाने के लिए मार्ग में बदलाव भी किए गए हैं। रतलाम स्टेशन पर भी लाइन नंबर 6 की लंबाई बढ़ाई गई है।

15.30 घंटे में गंतव्य तक पहुंच रही ट्रेन

राजधानी एक्सप्रेस मुंबई से दिल्ली की दूरी 15.30 घंटे में तय कर रही है। मुंबई से यह ट्रेन शाम को 5 बजे रवाना होकर रतलाम होते हुए सुबह 8.30 बजे दिल्ली पहुंचती है। दो इंजन जोड़कर दो दर्जन से अधिक बार ट्रायल लिया गया। शनिवार रात को भी ट्रेन दो इंजनों से परिचालित की गई लेकिन पूरे मार्ग में महज 20 मिनट की ही बचत हुई। परेशानी यह है कि ट्रेन का ट्रॉयल सेक्शन की तय गति में ही किया जाता है। इससे कॉशन ऑर्डर वाले सेक्शनों में मजबूरन 100 से 120 की ही गति से ही ट्रेन निकाली जा रही है। हालांकि दिल्ली से शामगढ़ के बीच में 160 किमी प्रतिघंटे की ट्रॉयल ली गई है।

अतिरिक्त इंजन में अमले के इंतजाम

दो इंजन से ट्रेन चलाने के लिए रेल प्रशासन को दूसरे इंजन में लोको पायलट, सहायक लोको पायलट तथा एलआई को साथ भेजना पड़ रहा है। ट्रायल रिकॉर्ड के लिए स्टेशनों पर कर्मचारियों की तैनाती सहित अतिरिक्त बिजली की खपत हो रही है। इन सारे इंतजामों में रेलवे को एक फेरे में करीब तीन लाख रुपए अतिरिक्त खर्च वहन करना पड़ रहा है। ऐसे में ट्रेन यदि समय नहीं बचा पा रही है तो पुश-पुल योजना को स्थगित करना पड़ सकता है।

गति बढ़ाने के यह बदलाव

-रेल मंडल के गोधरा से नागदा के बीच 60 किग्रा मानक की पटरियां डाली गई।

-रेलवे स्टेशन व यार्ड क्षेत्र में भी इसी तरह पटरियां बदलने का काम किया गया।

-रेलमार्ग की सिग्नलिंग को अत्याधुनिक कर नई तकनीक के सिग्नल डाले गए।

-ब्रिज मजबूत किए तो सेक्शनों में कर्व कम करने का काम भी किया गया।

राजधानी एक्सप्रेस की गति बढ़ाने के लिए दो इंजन जोड़कर रेल मार्ग पर ट्रायल ली जा रहा रही है। यह मामला रेलवे बोर्ड स्तर का है। यहां केवल मैसेज आते हैं। ट्रायल रिपोर्ट जोन एवं रेलवे बोर्ड भेजी जा रही है। -जेके जयंत, जनसंपर्क अधिकारी, रेल मंडल रतलाम

Posted By: Nai Dunia News Network

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