सीएमओ के 46 खाते फ्रीज, पंजीयन विभाग से मांगी संपत्ति की जानकारी

लोकायुक्त की कार्रवाईः बैंकों को पत्र लिख खातों की पूरी डिटेल मांगी

-उज्जैन, इंदौर, आलोट, शाजापुर व तराना की बैंकों में है खाते

उज्जैन (नईदुनिया प्रतिनिधि)। लोकायुक्त जांच के घेरे में आए बड़नगर के सीएमओ कुलदीप किंशुक के 46 खाते फ्रीज कर दिए गए हैं। जांच अधिकारियों ने उसकी संपत्तियों के बारे में पता लगाकर पंजीयन विभाग को पत्र लिखा है। साथ ही बैंक प्रबंधकों से भी खातों की जानकारी मांगी गई है। किंशुक और उसके परिवारवालों के नाम पर उज्जैन, इंदौर, आलोट, शाजापुर व तराना की बैंकों में खाते हैं।

लोकायुक्त निरीक्षक राजेंद्र वर्मा ने बताया कि मंगलवार को बड़नगर के सीएमओ कुलदीप किंशुक के माकड़ोन, बड़नगर व उज्जैन स्थित घरों पर आय से अधिक संपत्ति के मामले में छापे मारे गए थे। जांच में किंशुक के माकड़ोन के घर से आधा किलो सोने के जेवरात, 2.50 किलो चांदी के आभूषण, माकड़ोन में दो मकान, एक दुकान व साढ़े 21 बीघा जमीन, उज्जैन में तीन मकान, एक निर्माणाधीन होटल व अन्य स्थानों पर जमीन होने की जानकारी हाथ लगी थी। इसके अलावा 56 बैंक खातों की बैंक पासबुक भी मिली थी। एचडीएफसी बैंक में 10 खातों में 1.08 करोड़ रुपये जमा मिले हैं। अब तक कुल 5.63 करोड़ की संपत्ति होने का पता चला है।

इंदौर के गांव बारोली में 10 खाते

लोकायुक्त अधिकारियों ने बुधवार को इंदौर, उज्जैन, शाजापुर, तराना, आलोट की 10 बैंकों में 46 खातों को फ्रीज करने के लिए पत्र लिखा। इसके अलावा इन खातों को खोले जाने से लेकर अब तक किए गए ट्रांजेक्शन की जानकारी भी मांगी गई है। पता चला है कि इंदौर के गांव बारोली में ही उसके 10 खाते थे। इसमें उसकी फर्म के भी खाते थे।

खुद ही ठेकेदार बन गया

जांच के दौरान सीएमओ किंशुक की तीन फर्मों के बारे में भी पता चला था। गायत्री ट्रेडर्स, अक्षत ट्रेडर्स उसने अपने दोस्त मुकेश परमार के नाम पर बना रखी है, वहीं विनायक ट्रेडर्स मां के नाम पर रजिस्टर्ड है। इन फर्मों के माध्यम से वह विभिन्ना नगरीय निकायों में सामान सप्लाय करता था। जांच अधिकारियों ने नगरीय प्रशासन विभाग को पत्र लिखकर इन फर्मों द्वारा सप्लाय किए जाने वाली सामग्री और निकायों के बारे में भी जानकारी मांगी है।

सील व खाली बिल बुक पर बढ़ सकती हैं धाराएं

निरीक्षक राजेंद्र वर्मा के अनुसार किंशुक के घर से अलग-अलग 68 सीलें मिली हैं। ये पंचायत, नगर पंचायत, सचिव सहित कंपनियों की भी हैं, वहीं कुछ खाली बिल बुक भी मिले हैं। इनकी जांच करवाई जा रही है। इसके बाद उसके खिलाफ आइपीसी की धाराएं बढ़ाई जाएंगी। इस पर किंशुक को गिरफ्तार कर जेल भी भेजा जा सकता है। हालांकि अभी मामला जांच में है।

अन्य सीएमओ पर बैठाई जा सकती है जांच

लोकायुक्त कार्रवाई के दौरान बड़नगर स्थित शासकीय आवास पर किंशुक के साथ महिदपुर सीएमओ प्रदीप शास्त्री, शाजापुर के पोलायकलां सीएमओ वीरेंद्र मेहता भी पाए गए थे। पुलिस अब जांच में जुटी है कि सीएमओ किंशुक की आय से अधिक संपत्ति के मामले में इन लोगों की क्या भूमिका है? इसके अलावा इन पर जांच बैठाई जा सकती है। बता दें कि तीनों सीएमओ को संभागायुक्त आनंद शर्मा ने मंगलवार को ही निलंबित कर दिया था।

आलोट, माकड़ोन में पोस्टिंग के दौरान भी धांधली

लोकायुक्त की जांचः अपने लोगों को दिलाई दुकानें, कई योजनाओं में हेरफेर

- पंचायत सचिव से सीएमओ के प्रभार तक भ्रष्टाचार

लोकायुक्त के शिकंजे में फंसे सीएमओ कुलदीप किंशुक को लेकर जांच अधिकारी कई बिंदुओं पर पड़ताल कर रहे हैं। किंशुक माकड़ोन और रतलाम जिले के आलोट में भी सीएमओ रहा। इस दौरान भी गड़बडियां हुईं। जांच अफसरों को पता लगा है कि किंशुक ने आलोट में नगर परिषद की दुकानों की नीलामी में धांधली कर अपने परिचित को तीन दुकानें दिलवाई। इसके साथ संचय निधि का उपयोग दूसरे मद में कर लिया।

लोकायुक्त सूत्रों के अनुसार सीएमओ रहते हुए किंशुक ने कई धांधलियां की। आलोट में राजेंद्र चौक और बस स्टैंड पर बनी दुकानों की नीलामी में अपने मित्र को दुकान दिलवाई। इसके अलावा प्रधानमंत्री आवास योजना में भी गड़बड़ियां की। मामले में तत्कालीन आलोट एसडीएम ने किंशुक को नोटिस भी जारी किया था, मगर बाद में मामला ठंडे बस्ते में चला गया।

खाते खोलने में भी गड़बड़ी

जांच में यह भी पता लगा है कि किंशुक ने नगर परिषद के खाते अन्यत्र स्थानांतरित कर गड़बड़ी की। इसमें नियमों का उल्लघंन किया गया। ये गड़बड़ी भी माकड़ोन और आलोट पोस्टिंग के दौरान हुई। इन नगर परिषदों के बैंक खाते इंदौर जिले की एक बैंक में खोल दिए गए थे। हालांकि लोकायुक्त अधिकारियों का कहना है कि अभी और भी कई पहलुओं पर जांच कर रहे हैं।

टेंडर निकालकर खुद की कंपनियों को देता ठेका

सूत्रों का कहना है कि किंशुक विभिन्न कामों को टेंडर जारी करता था। इसके लिए अखबार में विज्ञापन देता था, मगर अपनी ही फर्मों के नाम से टेंडर जमा करता था। इसके बाद खुद ही अपनी फर्मों को टेंडर दे देता था।

लोन के नाम पर भी गड़बड़ी

बुधवार को लोकायुक्त कार्यालय तीन लोग किंशुक की शिकायत लेकर पहुंचे थे। इनमें से दो व्यक्तियों का कहना था कि किंशुक ने उन्हें लोन दिलाने का झांसा देकर कागजात ले लिए मगर लोन नहीं करवाया। बीते दिनों उनके पास बैंकों से पत्र आए थे कि लोन की किश्त जमा नहीं कर रहे हैं। बैंक जाकर पता किया तो उनके नाम से 4-4 लाख रुपये के लोन थे। वहीं एक व्यक्ति का कहना था कि उसने किंशुक से 4 लाख रुपये ब्याज पर लिए थे। वह रुपये ब्याज सहित वापस कर चुका है। बावजूद इसके उससे रुपये की मांग की जा रही है।

Posted By: Nai Dunia News Network

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