- इस बार स्वाद से वंचित रह गए शौकीन

सैलाना। क्षेत्र के कैक्टस गार्डन, खरमोर अभयारण्य, केदारेश्वर, कीर्ति स्तंभ के साथ बालम ककड़ी ने भी अपनी एक अलग पहचान बनाई है। यहां की बालम ककड़ी अनूठे स्वाद के चलते दूर-दूर तक प्रसिद्ध है। आदिवासी अंचल में व्यावसायिक दृष्टि से भी बालम ककड़ी की पैदावार की जा रही है, लेकिन इस वर्ष अभी तक बालम ककड़ी के दर्शन नहीं हुए हैं।

यहां लगता ककड़ी का बाजार

नगर के राजवाड़ा चौक, नाला रोड पर ककड़ी का बाजार सुबह-सुबह लगता था। सुबह-सुबह करीब पांच बजे से लोग बाजार मे ककड़ी विक्रय करने के लिए आना शुरू हो जाते थे। यहां आने के बाद ककड़िया या तो स्थानीय व्यापारियों को थोक भाव में दे देते थे या फिर सड़क किनारे दुकान लगाकर विक्रय करते थे। व्यापारी यहां थोक मूल्य पर ककड़ी बीस से लेकर सत्तर- अस्सी रुपये तक खरीदते थे।

उपहार में देते थे ककड़ी

नगर में कोई मेहमान आता है तो सैलाना के नागरिक अपने रिश्तेदारों को उपहार स्वरूप बालम ककड़ी भेंट करते थे। कहते हैं कि जब भी ककड़ी की सीजन आती है मेहमानों को ककड़ी का स्वाद जरूर चखाते थे। व्यापारी अशोक चंडालिया ने बताया कि ककड़ी के लिए रिश्तेदार के फोन आते हैं। रिश्तेदार को ककड़ियां भिजवाते हैं। इस बार रिश्तेदारों के फोन जरूर आए, मगर ककड़ी नहीं आई। भारी बारिश में सारी ककड़ी गल गई।

दूर-दूर तक पहचान

नगर के ककड़ी व्यापारी कारू चंद्रवंशी आदि कहते हैं हम यहां से ककड़ी खरीद कर उज्जैन, देवास, इंदौर, भोपाल, मंदसौर, नीमच के अलावा दिल्ली, राजस्थान तथा गुजरात के कुछ शहरों में जाकर ककड़ी का व्यवसाय करते हैं, लेकिन इस बार उत्पादन नहीं होने से शौकीन बालम ककड़ी के स्वाद से वंचित रह गए।

ऐसे तैयार होता है बीज

ग्राम बड़ीकलां निवासी शंकर निनामा बताते हैं कि बोवनी के लिए अच्छी ककड़ी देखकर उसे बेल पर ही पूरी तरह पकने देते हैं। शुक्ल पक्ष की रात को चंद्रमा के उजाले में लकड़ी से बनी चम्मच से बीज निकालकर एकत्र करते हैं। बीज में हल्दी मिलाकर सुखाने के लिए मकानों के उपर रखते हैं। बीजों को ओस से बचाते हैं। इससे ककड़ी का स्वाद मीठा होता है।

यहां भारी मात्रा में होती है ककड़ी

यूं तो पूरे आदिवासी अंचल में बालम ककड़ी की पैदावार होती हैं, लेकिन इनमें ग्राम वाली, बड़ीकलां, राधाकुआं, उंडेर, रिछी, आम्बाकुड़ी तथा चावड़ाखेड़ी की ककड़ी नाम से बिकती है। वाली गांव की ककड़ी का स्वाद बेहतर होता है। ककड़ी की पैदावार करने वाले ग्रामीण बताते हैं कि क्षैत्र में कई वर्षों से ककड़ी का उत्पादन हो रहा है, लेकिन इस बार ककड़ी की पैदावार नहीं हुई। सारी ककड़ियां भारी बारिश में गल गई।

17आरएटी-37 : बालम ककड़ी का फाइल फोटो।

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वाटर कूलर का लोकार्पण

रतलाम। लायनेस क्लब रतलाम के सौजन्य से रेलवे कॉलोनी स्थित प्रसिद्ध अम्बे माता मंदिर श्री मां आद्या शक्ति धाम में जल मंदिर वाटर फिल्टर व वाटर कूलर का लोकार्पण पूर्व डिस्ट्रिक्ट गवर्नर राजेंद्र गर्ग के आतिथ्य में किया गया। रीजन चेयरपर्सन जगदीश सोनी, जोन चेयरपर्सन गोपाल जोशी, डॉ. सुलोचना शर्मा, योगेंद्र रूनवाल, विक्रम सिसोदिया, संजय गुणावत, सुनील के. जैन, नीरज सिरोलिया, निमिष व्यास विशेष रूप से उपस्थित रहे। अध्यक्ष सीमा भारद्वाज ने बताया कि उक्त वाटर कूलर क्लब की कोषाध्यक्ष कांता छंगाणी, कल्पना छंगाणी के सहयोग से लगाया जा रहा है। श्रीराम मंडल के संयोजक जीतू वाधवा, सचिव कौशल्या त्रिवेदी, प्रथमा कौशिक, दीपा दुबे, अमरजीत कौर, अरुणा सोनी, प्रमिला चौपड़ा आदि उपस्थित रहे।

17आरएटी-24 : श्री मां आद्या शक्ति धाम में जल मंदिर वाटर फिल्टर व वाटर कूलर का लोकार्पण करते हुए पूर्व डिस्ट्रिक्ट गवर्नर राजेंद्र गर्ग। नईदुनिया

Posted By: Nai Dunia News Network

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