रतलाम(नईदुनिया प्रतिनिधि)। नगर निगम चुनाव हो या विधानसभा, लोकसभा। हर चुनाव में शहर विधानसभा में पटरी पार के 01 से 13 वार्डों के मतदाताओं का रूख ही अहम रहा है। 2014 से हर चुनाव में भाजपा को पटरी पार के इन वार्डों से अच्छी बढ़त मिलती आई है। यही वजह है कि यहां भाजपा के साथ कांग्रेस भी गंभीरता से ध्यान दे रही है। खास बात यह है कि हार-जीत के अंतर में करीब चालीस प्रतिशत हिस्सा भी यहीं से होता है। अब 13 जुलाई तक दोनों दल यहां डोर-टू-डोर कैंपेनिंग के साथ ही नुक्कड़ सभा व सामाजिक जोड़-तोड़ अपने पक्ष में करने में लगे हैं।

मालूम हो कि पटरी पार इलाके में रहवासी व व्यावसायिक क्षेत्र तेजी से बढ़ा है। मेडिकल कालेज बंजली में शुरू होने के बाद से आसपास के सभी क्षेत्रों में पाश कालोनियों की संख्या भी बढ़ती जा रही है। वर्ष 2014 में निगम चुनाव में 13 में से 11 वार्डों में भाजपा ने जीत हासिल की थी। महापौर के लिए भी कुल 24011 में से करीब 9500 की लीड यहीं से मिली थी। वर्ष 2018 के विधानसभा चुनाव में शहर विधायक चेतन्य काश्यप को व 2019 के लोकसभा चुनाव में भी भाजपा को यहां से निर्णायक बढ़त मिली थी। इसके चलते इस बार भी यहां के मतदाताओं के रूख पर दोनों दलों का ध्यान है।

पटरी पार से जुड़े हैं दोनों प्रत्याशी

भाजपा के महापौर प्रत्याशी प्रहलाद पटेल का पटरी पार बरबड़ क्षेत्र में निवास व मैरिज गार्डन है। इसी तरह कांग्रेस प्रत्याशी मयंक जाट भी पटरी पार से लगते हुए हिस्से सैलाना बस स्टैंड क्षेत्र में रहते हैं और उनकी कृषि भूमि आदि पटरी पार है। दोनों प्रत्याशियों की इस क्षेत्र में उपस्थिति है।

13 वार्डों में ये प्रमुख इलाके

कस्तूरबा नगर, राममंदिर, अलकापुरी, अस्सीफीट रोड, जवाहर नगर, विनोबा नगर, इंद्रलोक नगर, गांधीनगर, देवरा देवनारायण नगर, इंदिरा नगर, वरदान नगर, डोंगरे नगर, राजीव नगर, शक्ति नगर, रत्नपुरी हाउसिंग बोर्ड कालोनी, नयागांव, टैंकर रोड, राजगढ़, राजबाग एक व दो, लाल बाग, गंगासागर हाउसिंग बोर्ड कालोनी, त्रिमूर्ति नगर, त्रिलोक नगर, तिरुपति नगर, सन सिटी, रिद्धि-सिद्धि कालोनी, मंगलमूर्ति कालोनी, नरीमन पाइंट, स्नेहर नगर, सुयोग परिसर आदि।

इन क्षेत्रों की तीन बड़ी समस्या

01-अवैध कालोनियों को वैध करना : शहर में अवैध से वैध की जाने वाली 50 कालोनियों में से 12 पटरी पार क्षेत्र से हैं। छह साल से इन कालोनियों को वैध किए जाने का मुद्दा उठता रहा है, लेकिन कभी न्यायालय तो कभी नियमों में उलझने के कारण अभी तक इस पर अमल नहीं हो पाया। अब इन कालोनियों में निर्माण अनुमति भी नहीं मिल रही है। पहले विकास शुल्क भरकर अनुमति मिल जाती थी। वर्षाकाल में अवैध कालोनियों के रहवासियों के लिए कच्चे मार्ग पर पैदल चल पाना भी चुनौती भरा होता है। इस बार निगम चुनाव में भी यही मुद्दा खास रहेगा।

02-खराब सड़कें : कस्तूरबा नगर से सुमंगल गार्डन होकर कामर्स कालेज तक सड़क निर्माण नए सिरे से करने की मांग की जा रही है। खराब सड़क को लेकर रहवासी लगातार आपत्ति जताते रहे हैं। रही-सही कसर सीवरेज लाइन डालने के लिए की गई खुदाई ने पूरी कर दी। जवाहर नगर से पीएनटी कालोनी, विनोबा नगर मार्ग को लेकर भी यही हाल है। शिकायत के बाद भी सुनवाई नहीं होने से लोगों में नाराजगी है।

03-अनियमित जल वितरण : गर्मी में पटरी पार के ऊंचाई वाले क्षेत्रों में पानी की समस्या सर्वाधिक रहती है। इन क्षेत्रों में नौकरीपेशा वर्ग की संख्या ज्यादा होने से शाम को या दोपहर में जल वितरण होने से उन्हें काम छोड़कर आना पड़ता है। जल वितरण में गड़बड़ी भी बड़ा मुद्दा रहेगा।

मतदाताओं की स्थिति पर नजर

वर्ष कुल मतदाता 13 वार्डों के मतदाता मतदान किया

2014 195166 59295 37509

2022 214336 68354 -----

प्रतिशत के मान से स्थिति

वर्ष 2014- कुल मतों में से 30.38 प्रतिशत मत 01 से 13 वार्ड तक थे। इनमें से 28.35 ने मतदान किया।

वर्ष 2022- कुल मत का 31.89 प्रतिशत हिस्सा 13 वार्डों में है।

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भाजपा को पूरे शहर में समान रूप से जनसमर्थन मिलता रहा है। 120 करोड़ रुपयों से सड़कों का निर्माण होना है। 20 करोड़ की लागत के काम शुरू भी हो चुके हैं। कालोनियों को अवैध से वैध करने की प्रक्रिया कांग्रेस शासनकाल में रोकी गई थी। हमारी सरकार ने इसे फिर से शुरू किया है। -राजेंद्रसिंह लूनेरा, जिलाध्यक्ष भाजपा

अवैध कालोनियों को वैध करने का मुद्दा हमेशा चुनाव में ही भाजपा लेकर आती है। इसके नियम इतने जटिल हैं, कि वैध करने की प्रक्रिया ही शुरू नहीं हो पाई। कांग्रेस सरलीकरण व्यावहारिकता के आधार पर सुविधाएं देगी। पटरी पार पूरे क्षेत्र में व्यापार व रहवासी क्षेत्र की समस्याओं को सुलझाया जाएगा। -महेंद्र कटारिया, अध्यक्ष शहर कांग्रेस कमेटी

Posted By: Nai Dunia News Network

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