रतलाम। किसी भी तरह का व्यापार करते समय, छोटे या बड़े व्यापारी बंधुओं को स्वच्छता के नियमों का सख्ती से पालन करना चाहिए। वे स्वयं अपनी दुकान/ प्रतिष्ठानों पर स्वच्छता को महत्व दे और दूसरों को भी इसके लिए प्रेरित करेंगे तो रतलाम भी स्वच्छता के मामले में एक मिसाल कायम कर सकता है। अपनी दुकानों से निकले कचरे का निपटान संग्रहण वाहन में ही करें।

यह बात नगर निगम आयुक्त सोमनाथ झारिया ने कही। स्वच्छ सर्वेक्षण-2021 के परिणामों के बाद संचालनालय नगरीय प्रशासन व विकास के निर्देश पर आयोजित धन्यवाद मध्यप्रदेश अभियान के तहत शुक्रवार को शहर के चारों जोन अनेक वार्डों में स्थित दुकानों पर जाकर उन व्यापारीबंधुओं का सम्मान किया गया, जो अपने दुकान-प्रतिष्ठानों का कचरा अलग-अलग डस्टबिनों में एकत्र कर इसका निपटान कचरा संग्रहण वाहन के अलग-अलग खानों में ही करते हैं। इस अवसर पर निगमकर्मियों और सफाई मित्र समूह की टीम ने व्यापारियों का स्वागत तिलक लगाकर किया। इसके बाद फूलमालाओं के साथ मिठाई व प्रमाण-पत्र देकर सम्मानित किया गया। उपायुक्त विकास सोलंकी, स्वास्थ्य अधिकारी जीके जायसवाल, जोन प्रभारी एपी सिंह, किरण चौहान, पर्वत हाड़े, विनय चौहान, विराट मेहरा, मोनिका चौहान, सफाई मित्र समूह के सदस्य आदि उपस्थित रहे।

गेहूं, चना के साथ जिले में सरसों की खेती भी बढ़ी

रतलाम (नईदुनिया प्रतिनिधि)। जिले में गेहूं की बंपर पैदावार होती है, लेकिन अब किसान गेहूं की फसल के साथ चना और सरसों की फसल करने लगे हैं। वापस किसान तिलहन फसलों की तरफ रूख करने लगे हैं। इसके पीछे कारण यह है कि, पिछले तीन-चार साल से सरसों के दाम में बढोत्तरी हुई है, इसलिए किसान अब सरसों की फसल कर रहे हैं।

जिले में इस बार पिछले साल की तुलना में सरसों का रकबा 12 हजार हेक्टेयर तक बढ़ गया है। रबी सीजन में किसान गेहूं, चना की खेती अधिक करते हैं। बंपर उपज के बाद किसानों को दाम सही नहीं मिल पाते हैं, इसलिए अब सरसों की फसल की ओर ध्यान देने लगे हैं। अब तक रबी सीजन की लभगग 85 प्रतिशत बोवनी हो चुकी है, जिसमें सरसों का रकबा बढ़ते हुए 6344 हेक्टेयर हो गया है। इसके साथ गेहूं और चना की बोवनी हुई है, लेकिन इस बार लक्ष्‌य से अभी तक कम है। हालांकि गंहू, की बोवनी अभी भी चालू है, लेकिन रकबा बढ़ने की संभावना कम ही है।

सरसों में लागत कम मुनाफा ज्यादा

सरसों के भाव में तेजी होने के चलते इस साल सरसों की बोवनी बढ़ी है। जिले में सरसों का रकबा बीते वर्ष की तुलना में काफी बढ़ गया है। किसान राजू पाटीदार कहते हैं कि तिलहन के भाव में काफी तेजी आई है। किसान अब सरसों की खेती की तरफ आकर्षित हो रहे हैं। इस समय सरसों का भाव बढ़ा और इसके अलावा सरसों में लागत और मेहनत भी कम आती है। प्रति एक हेक्टेयर खर्च भी कम आता है, इसलिए भी किसान सरसों की फसल में अब अच्छा मुनाफा की संभावना देखकर इस ओर कदम बढ़ा रहे हैं।

इस बार में सरसों का रकबा काफी बढ़ा है और किसान अभी भी गेहूं की बोवनी कर रहे हैं। अभी तक लक्ष्‌य से कम बोवनी हुई है, लेकिन लक्ष्‌य तक पहुंच जाएंगे। किसानों को गेहूं के साथ तिलहन की खेती अधिक करना चाहिए। - विजय चौरसिया, उपसंचालक कृषि रतलाम

Posted By: Nai Dunia News Network

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