रतलाम (नईदुनिया प्रतिनिधि)। मौसम विज्ञानियों के अनुमान के मुताबिक जिले में तीन दिन से रुक-रुककर मध्यम-तेज बारिश का सिलसिला चल रहा है। बुधवार रात शहर सहित अंचल में कई स्थानों पर तूफानी बारिश हुई। इससे नदी-नाले उफान पर आ गए। कई छोटी पुल-पुलियाओं व रपटों पर पानी आने से मार्ग अवरुद्ध हो गए। कई लोगों ने जान जोखिम में डालकर आवाजाही की। झमाझम से जिला सामान्य बारिश से आगे निकल गया है, लेकिन गत वर्ष से पिछड़ा हुआ है। रावटी तहसील में सर्वाधिक ढाई इंच से अधिक बारिश हुई है। अच्छी बारिश से किसान सहित आमजन के चेहरे खिल गए हैं।

शहर सहित अंचल में रुक-रुककर रिमझिम-तेज बारिश का दौर चल रहा है। गुरुवार को भी दिनभर रुक-रुककर कृपा बरसती रही। इससे जहां सड़कें तरबतर होती रही, वहीं जलस्रोतों का जलस्तर बढ़ने लगा। शहर का हनुमान ताल लबालब हो गया। ताल का पानी वेस्ट वियर से बहने लगा। प्रतिदिन रतलामवासियों के कंठ तर करने वाले धोलावड़ डैम का जलस्तर भी बढ़ गया है। डैम की कुल जल भराव क्षमता 395 मीटर है। वर्तमान में 394 मीटर तक पानी आ चुका है। एक-दो झमाझम बारिश के बाद डैम के गेट खोले जा सकते हैं। सुबह आठ बजे समाप्त हुए बीते चौबीस घंटों के दौरान जिले में 39.4 मिमी (करीब डेढ़ इंच) बारिश हुई। आलोट तहसील में तीन मिमी, जावरा में 51 मिमी, ताल में चार मिमी, पिपलौदा में 48 मिमी, बाजना में 39 मिमी, रतलाम में 60 मिमी, रावटी में 65.4 मिमी, सैलाना तहसील में 45 मिमी पानी बरसा।

अब तक 33 इंच से अधिक

जिले में अब तक 834.4 मिमी (33 इंच से अधिक) बारिश हो चुकी है। गत वर्ष इस अवधि में 983.3 मिमी (39 इंच) पानी बरसा था। जिले की कुल सामान्य बारिश 918.3 मिमी और अब तक 805.2 मिमी है। जिले की आलोट, जावरा व ताल तहसील को छोड़कर शेष सभी तहसीलें गत वर्ष की तुलना में पिछड़ी हुई हैं। आलोट में 16 मिमी, जावरा में 102 मिमी, ताल में 12 मिमी ज्यादा बारिश हुई है, वहीं पिपलौदा में 176 मिमी, बाजना में 535 मिमी, रतलाम में 123 मिमी, रावटी में 181.8 मिमी, सैलाना में 308 मिमी पानी कम बरसा है।

जान जोखिम में डालकर की आवाजाही

रानीसिंग। लगातार बारिश से ग्रामीण क्षेत्र के नदी-नाले उफान पर आ गए हैं। छोटी पुल-पुलियाओं, रपटों पर पानी आने के बावजूद ग्रामीण जान जोखिम में डालकर आवाजाही कर रहे हैं। व्यस्ततम रतलाम-लालगुवाड़ी नाले पर बनी छोटी पुलिया पर पानी होने के बाद भी गुरुवार को दिनभर ग्रामीण जान जोखिम में डालकर आना-जाना करते रहे।

ब्रिज में जलजमाव से ग्रामीण परेशान

सिमलावदा। क्षेत्र में बुधवार शाम से ही बारिश का दौर जारी है। कभी तेज तो कभी रिमझिम बारिश से क्षेत्र के नदी-नाले उफान पर रहे। गांव के कई क्षेत्रों में नालियों का पानी सड़कों पर बहने लगा। कई खेतों में जलजमाव की स्थिति बन गई। जावरा-लेबड़ फोरलेन पर सिमलावदा में बना ब्रिज ग्रामीणजनों के लिए परेशानी का कारण बन गया। फोरलेन कंपनी द्वारा ब्रिज के अंदर के पानी की निकासी को लेकर किसी प्रकार की व्यवस्था नहीं की गई। इसके कारण ब्रिज के अंदर कई फीट पानी जमा हो जाता है। ग्रामीणों को आवाजाही में परेशानी का सामना करना पड़ता हैं। पानी जमा होने के कारण स्कूल के बच्चों को ब्रिज के अंदर से निकलने में ज्यादा मशक्कत करनी पड़ती है। ब्रिज के अंदर जमा हो रहे पानी को लेकर ग्रामीण कई बार फोरलेन के अधिकारियों को अवगत करा चुके हैं, परंतु समस्या का किसी प्रकार से कोई समाधान अब तक नहीं किया गया है।

दोपहर तक बंद रहा रास्ता

नामली। क्षेत्र में बुधवार को हुई झमाझम बारिश से नदी-नाले उफान पर आ गए। शाम करीब चार बजे शुरू हुआ बारिश का सिलसिला देर रात तक चलता रहा। तेज बारिश खरीफ फसल के अलावा रबी फसल के लिए भी फायदेमंद रहेगी। वर्षाऋतु में तेज बारिश नहीं होने से किसान परिवार सहित आमजन चिंतित थे। तेज बारिश से फोरलेन के गांव मेवासा स्थित गंगायता नदी में पानी का बहाव तेज हो गया। नगर से गांव सिखेड़ी जाने वाले रास्ते के बीच स्थित गंगायता नदी की रपट (पुलिया) पर पानी आने से गांव का संपर्क दूसरे गांव से गुरुवार दोपहर तक टूटा रहा। कई खेतों में पानी निकासी सही नहीं होने से जलजमाव की स्थिति निर्मित हो गई।

Posted By: Nai Dunia News Network

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