रतलाम/आलोट। रतलाम जिले के आलोट नगर से चार किलोमीटर दूर ग्राम पाल नगरा में खेत की मेढ़ पर मगरमच्छ आ गया। इससे गांव में सनसनी फैल गई। आसपास बड़ी संख्या में लोग जमा हो गए। पुलिस व वन विभाग का अमला भी वहां पहुंचा। शोर-शराबा होने व भीड़ होने पर मगरमच्छ पास में स्थित पानी की खाल (नाला) में चला गया। ग्रामीणों ने पानी की मोटरें लगाकर खाल का काफी मात्रा में पानी खाली किया। तब वह नाले में एक स्थान पर बैठा दिखा। रतलाम से रेस्क्यू टीम बुलवाई गई है। टीम के आने के बाद उसे पकड़ा जाएगा।

जानकारी के अनुसार उक्त पानी की खाल (नाला) कुछ दूर जाकर क्षिप्रा नदी में मिलती है। वहीं करीब 20 किलोमीटर दूर शिवापरा में चंबल नदी व क्षिप्रा नदी का संगम होता है। जिले की सीमा से लगे मंदसौर जिले में गांधी सागर बांध है, वहां से जिले में मगरमच्छ आ जाते हैं।

रविवार दोपहर दो बजे किसान दुला निवासी कालाजी का खेड़ा पाल नगरा के गेहूं के खेत के सेड़े पर मगरमच्छ दिखाई दिया। खबर फैलने पर लोग मौके पर जमा हो गए। ग्रामीण विक्रम ने नईदुनिया को बताया कि वह अपने खेत की तरफ जा रहा था तभी नाले के किनारे खेत के सेड़े पर मगरमच्छ दिखाई दिया।

मगरमच्छ देखकर वह डर गया। उसने गांव जाकर लोगों को जानकारी दी। दोपहर तीन बजे आलोट पुलिस को सूचना दी गई। पुलिस व स्थानीय वन विभाग का अमला भी पहुंचा। कुछ देर बाद मगरमच्छ नाले के पानी में कूदकर गायब हो गया। ग्रामीणों ने पानी खाली करने दो मोटरें लगाई।

करीब दो घंटे में काफी मात्रा में नाले का पानी बाहर निकाला गया तो मगरमच्छ एक स्थान पर बैठा दिखा। शाम छह बजे ग्रामीणों व स्थानीय वन विभाग के अमले ने उसे निकालने का काम रोक दिया। रतलाम की रेस्क्यू टीम को सूचना दी गई है। रेस्क्यू टीम आकर उसे पकड़कर सुरक्षित स्थान पर ले जाकर छोड़ेगी।

पांच माह पहले मान्याखेड़ी में आया था मगरमच्छ

पांच माह पहले 17 व 18 जुलाई 2021 की दरमियानी रात चंबल व मलेनी नदी के पास स्थित रिंगनोद थाना क्षेत्र के ग्राम मान्याखेड़ी में मगरमच्छ किसान तुलसीराम पाटीदार के खेत में लकड़ियों के ढेर के पास आकर बैठ गया था। आधी रात वन विभाग की टीम ने रेस्क्यू कर मगरमच्छ को पकड़कर बोरे में बांध दिया था।

दूसरे दिन सुबह मगरमच्छ को मंदसौर जिले के गांधीसागर डेम के वन्यप्राणी अभ्यारण क्षेत्र में ले जाकर छोड़ा गया था। मान्याखेड़ी के पास नाला है, जो चंबल व मलेनी नदी से जुड़ा है। नदियों में बहकर नाले से होता हुआ पाटीदार के खेत में पहुंचा था।

Posted By: Hemant Kumar Upadhyay

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