रीवा नईदुनिया प्रतिनिधि।

रीवा में नगरीय निकाय के चुनाव में अजब गजब प्रत्याशी मैदान पर है ऐसे ही एक प्रत्याशी ने महापौर के लिए अपना ताल ठोका है जो खुद बैसाखी पर चलता है लेकिन हौसले में कोई कमी नहीं है। ट्यूशन मास्टर प्रेमनाथ जायसवाल ने चुनाव लड़ने के लिए बधाों को पढ़ा कर रुपये जुटाए और चुनाव मैदान में उतर कर ताल थोक दी।

बैसाखी में दिख रहे है नगर पालिक निगम रीवा के महापौर प्रत्याशी प्रेमनाथ जायसवाल। 52 वर्षीय प्रेमनाथ दिव्यांग है पोलियो ग्रस्त होने के चलते बचपन से ही ये इन्हे बैसाखी का सहारा लेना पड़ा लेकिन इनके हौसलों में कमी नहीं है। प्रेमनाथ नगर के प्रथम नागरिक बनने के जज्बे से लबरेज है इनके दिमाग में शहर के विकास का रोडमैप तैयार है, प्रेमनाथ ने बीए की बैचलर डिग्री ली, इसके बाद राजनीति शास्त्र में मास्टर डिग्री एमए करना चाहते थे दो बार प्रयास किया लेकिन असफल रहे। समाज ने भी इनका सहयोग नहीं किया। लिहाजा इनके मन में इस बात का हमेशा मलाल बना रहा। प्रेमनाथ पेशे से ट्यूशन मास्टर है वह घर-घर जाकर गरीब बधाो को ट्यूशन पढ़ते है इसमें कुछ बधाों से फीस लेते है जबकि कुछ गरीब बधाों को निशुल्क पढ़ाते है। इसके अलावा शहर के पीटीएस चौक में पुश्तैनी दुकान है जिससे कुछ किराये की राशि भी मिलती है,उसी से गुजर बसर चलता है। नगर पालिक निगम के चुनाव में 13 महापौर प्रत्याशी मैदान में है इन सबमें प्रेमनाथ भी एक दावेदार है जो न तो अपने पैरो पर चल सकते और ना ही दूसरे का सहारा बन सकते है लेकिन इनके जज्बे में कोई कमी नहीं है।

प्रेमनाथ जीत का दम भरते है उनकी माने तो शहर में सड़क पानी बिजली की मूलभूत समस्याएं है। जिससे गरीब जनता परेशान है प्रेमनाथ मानते है की वह चुनाव में किसी प्रत्याशी से कम नहीं है उन्हें मौका मिला तो वह शहर के विकास में कोई कमी नहीं छोड़ेगे। इसी लिए उन्होंने ब्याह नहीं किया और ट्राय सायकल के सहारे चलकर लोगों के दुख दर्द से रूबरू होते है।शहर को विकास की धारा से जोड़ने के लिए प्रेमनाथ जायसवाल ने रोडमैप भी तैयार किया है। इसमें गरीबों असहाय के साथ दिव्यांगों के लिए कई नीतियां बनाना चाहते है। इसी वजह से प्रेमनाथ जायसवाल भी शहर में चर्चा का विषय बने हुए है।

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