नीलांबुज पांडे

रीवा नईदुनिया प्रतिनिधि। पढ़ने की कोई उम्र नहीं होती, यह साबित कर दिया रीवा जिले के अयोध्या सिंह ने। बुजुर्ग के इस जज्बे को जान अब हर कोई तारीफ कर रहा है तो वही यह दूसरों के लिए प्रेरणा बनते जा रहे हैं। सेवानिवृत्त शिक्षक 78 साल की उम्र में युवा की तरह पूरी तैयारी के साथ समाजशास्त्र से एमफिल कि अभी हाल ही में परीक्षा दीया है। जिस का रिजल्ट आना है। इसके बाद वह ग्राम पंचायत के पंच और सरपंच पर पीएचडी करेंगे।

बता दें कि सेवानिवृत्त शिक्षक 78 साल की उम्र में युवा छात्र की तरह एमए समाजशास्त्र में एडमिशन लेकर रेगुलर पढ़ाई शुरू की। 78 साल की थी यूनिफॉर्म में पढ़ने आते हैं और हर क्लास अटेंड करते हैं। जब कालेज में पढ़ने की उम्र थी तो परिवार की जिम्मेदारियां और आर्थिक संकट रुकावट बन गए। किसी तरह स्वाध्यायी छात्र के रूप में डिग्री ली। सरकारी नौकरी की, शिक्षक बनकर भावी पीढ़ी को तराशते रहे।

जब परिवार की सभी जिम्मेदारियां पूरी हो गई तो 78 वर्ष की उम्र में कालेज में दाखिला ले लिया है। अयोध्या सिंह की कालेज लाइफ जीने की बहुत इच्छा थी, लेकिन भाई की पढ़ाई की जिम्मेदारी और आर्थिक स्थिति ठीक नहीं होने से 1961 में शिक्षक की नौकरी कर ली। बाद में 1973 में स्वाध्यायी छात्र के रूप में एमए की डिग्री ली। 43 साल तक शिक्षक रहने के वे 2004 में रिटायर्ड हुए। 78 वर्ष की टीआरएस कालेज में समाजशास्त्र से एमए और एमफिल कर लिया। एमफिल के अंतिम सेमेस्टर का रिजल्ट आना बाकी है इसके बाद अयोध्या सिंह ग्राम पंचायत में सरपंच और पंच की भूमिका पर डॉक्टरेट करेंगे।अयोध्या सिंह कहते है की जब उन्होंने नौकरी की तब वह केवल हायर सेकेंडरी पास थे कालेज की लाइफ जीने की बड़ी लालसा मन में थी उसी को पूरा कर रहा हू अब अंतिम सांस तक पढाई में ही जीवन जीन चाहता हूं।

रिटायर होने के बाद अयोध्या अपने गांव में खेती करना चाहते थे, लेकिन दो वर्ष बाद ही पत्नी का निधन हो गया। एक बेटा उड़ीसा और दूसरा इंदौर में अपने परिवार के साथ बस गए हैं। घर में अकेले हैं तो जीवन में अकेलापन भी भारी होने लगा है। इसलिए उन्होंने खुद को व्यस्त रखने और ज्ञान जुटाने की योजना बनाई। अयोध्या सिंह के हाथ पैर कांपते है सीढ़ियां चढ़ने में मुश्किल होती है। बावजूद उसके घर का पूरा कामकाज निपटा कर चले जाते है और पढ़ाई के लिए पूरा वक्त निकलते है। उनके पढ़ने की रुचि देखकर कॉलेज के छात्र उससे बेहद प्रभावित हैं. अयोध्या सिंह उन युवाओं के लिए प्रेरणा है जो घर से कालेज के लिए निकलते है और क्लास से नदारद रहते है।

ऐसी रहती है दिनचर्या : वर्तमान में उनकी दिनचर्या कॉलेज के छात्र की तरह ही है, वह सुबह उठते हैं और भोजन खुद बनाते हैं और खाने के बाद कॉलेज के लिए निकल पड़ते हैं। इस उम्र में भी वह बाइक से 15 किलोमीटर दूर कॉलेज आते हैं।

Posted By: Nai Dunia News Network

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