रीवा। नईदुनिया प्रतिनिधि

प्रकृति की मार के बीच किसान अब धान की फसलों में कीड़े लगने को लेकर परेशान होने लगा है। बताया जा रहा है कि खेतों में धान के पौधों में फल भी तैयार हो रहे है। लेकिन पौधों में इस समय घोंघा नामक क्रीड़े के साथ ही कीट-पंतगों का प्रभाव तेज हो गया है। वह धान की हरियाली को चूस रहा है। जिससे पौधे कमजोर होने के साथ ही पौधों में लगने वाले दाने सही तरीके तैयार नहीं हो पा रहे है। जिस तरह से लगातार बारिश हुई और पानी पर्याप्त मात्रा में धान की फसल के लिए खेतों में भरा हुआ है। उससे धान की अच्छी पैदावार की उम्मीद किसाानों को है।

मौसम में देखा जा रहा बदलावः रविवार को मौसम में बदलाव देखा गया। सुबह से ही बादल आकाश में नजर आ रहे थे। मौसम विशेषज्ञों ने पूर्व में ही अनुमान जताया था कि 10 अक्टूबर के बाद मौसम में यू टर्न होगा। उसका असर दिखने लगा है। तो वही मौसम के इस बदलाव को देखकर किसान परेशान होने लगा है। बादलों के बीच अगर बारिश होती है तो हर हाल में किसानों को नुकसानी उठानी पड़ेगी। इस वर्ष देर तक हुई बारिश के चलते खेत गीले है।

रवि सीजन की बोनी करने के लिए खेत अभी तैयार नही हो पा रहे है। बारिश फिर होती है तो रवि सीजन की बोवनी पिछड़ जाएगी। चना, मसूर, अलसी आदि फसलों की बोनी का काम पहले ही लेट हैं और बारिश होने पर खेता गीला हो जाएगा। जिससे बोनी के लिए खेत किसान तैयार नही कर पाएंगे।

बेसहारा मवेशियों से किसान परेशानः जिले का कई हिस्सा जंगलो से घिरा है। जंगली जावनरों का आतंक तराई सहित नईगढ़ी क्षेत्र में है और वे खड़ी फसलों को खराब कर रहे हैं। तो वहीं बेसहारा मवेशी फसलों को नुकसान पहुंचा रहे है।

जानकारी के मुताबिक नईगढ़ी तहसील के बंधवा भाईबांट, बंधवा कोठार, जमुहरा, कसियार गांव कठमलिया, देवरिहनगांव, जरकटी , मझिगवां, भीर, कोट, कुशहा, जोधपुर, सोनवर्षा, हंकरिया, सेंगरवार, बर्रोहा जैसे कई गांव है जहां जंगली जानवरों के आतंक से लोग परेशान हैं। जंगली जानवरों से हुई नुकसानी का क्षेत्र के किसानों को कई बार मांग के बाद भी सहायता राशि नहीं मिली है।

Posted By: Nai Dunia News Network