रीवा नईदुनिया प्रतिनिधि।

हाईवे में बेहतरतीब ढंग से खड़े होने वाले भरी वाहन हादसे का कारण बन रहे हैं। इच्छानुसार लोग सड़कों पर भारी वाहन खड़े कर देते हैं। ढाबों में तो वाहनों की कतार लगी रहती है। थोड़ी सी चूक में जिंदगियां काल के गाल में समा जाती है। सड़क हादसों को रोकने के लिए यातायात सड़क सुरक्षा समिति की बैठकों में दावे तो बड़े-बड़े किये जाते हैं लेकिन हाइवे में नो-पार्किंग की समस्या दूर नहीं हुई। दरअसल हाईवे में भारी वाहनों की पार्किंग लंबे समय से हादसों का कारण बन रही है। रात के समय बाइपास में बड़ी संख्या में वाहन खड़े होते हैं। रीवा से गुजरने वाले मिर्जापुर व प्रयागराज हाईवे में स्थित सैकड़ों की संख्या में ढाबों में बड़ी संख्या में वाहन खड़े होते हैं। रात के समय तो वाहनों की लंबी कतार लगी रहती है। चालक अपने वाहनों को सड़क में खड़ा करके आराम करने चले जाते हैं। रात में हाइवे से गुजरने वाले दूसरे वाहन चालक भयभीत रहते हैं। यदि थोड़ी चूक हो जाती है तो जिंदगियों को काल के गाल में समाने में देर नहीं लगती है। रात में हाइवे में वाहन खड़े करने वाले लोगों द्वारा उसकी लाइट तक नहीं जलाई जाती है। इन वाहनों की वजह से सबसे ज्यादा हादसे की संभावना उस समय रहती है जब ट्रकों के बीच से अचानक कोई छोटा वाहन या फिर जानवर निकलकर सड़क में आ जाता है। तेज रफ्तार आ रहे वाहन को फिर कंट्रोल करना आसान नहीं होता है। यह समस्या एक लंबे समय से बनी हुई है लेकिन इसको दूर करने की दिशा में प्रयास नहीं किये जाते हैं। यही कारण है कि समस्या यथावत बनी हुई है।

हाईवे में वाहन पार्किंग का नहीं है नियम : हाईवे में वाहन पार्किंग का कोई नियम नहीं है। हाईवे में पार्किंग के लिए एक निश्चित दूरी पर लेन बनाया जाता है जिसमें वाहन कुछ देर के लिए खड़े हो सकते हैं। इसके अतिरिक्त हाइवे में कहीं भी वाहनों का खड़ा करना नियम विरुद्घ है। इसकी अनदेखी कर भारी वाहन पूरी हाइवे में कहीं भी रुक जाते है। जो वाहन सड़क पर खराब हो जाते हैं उनमें भी कोई व्यवस्था नहीं करवाई जाती है जिसकी वजह से हादसे हो जाते है।

दो दर्जन से अधिक स्थानों में है समस्या : रीवा से गुजरने वाले प्रयागराज व मिर्जापुर हाइवे में नो-पार्किंग की समस्या है। करीब दो दर्जन स्थानों में यह समस्या सबसे ज्यादा गंभीर है। इनमें रामनई, रायपुर कर्चुलियान, बेलवा पैकान, मनगवां, गंगेव, गढ़, सोहागी, चाकघाट के अलावा जरहा, देवतालाब, मऊगंज व हनुमना शामिल हैं। इन सभी स्थानों में बड़ी संख्या में वाहन पूरी रात खड़े हो जाते हैं जिनको न तो कार्रवाई का भय है और न ही हादसों को रोकने के लिए बड़े-बड़ेे दावे करने वाले प्रशासनिक अधिकारियों के पास समय ही है।

Posted By: Nai Dunia News Network

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