नीलांबुज पांडे, सिंगरौली। सिंगरौली जिले के एक स्कूल में बच्चे कोरोनाकाल के पहले ही स्वच्छता के प्रति सजग थे। उन्होंने शिक्षिका की प्रेरणा से साबुन दान करना शुरू किया। देखते ही देखते स्कूल में साबुन का बैंक तैयार हो गया। इस बैंक में रखे साबुन का उपयोग रोजाना स्कूल में पढ़ने वाले छात्र करते हैं। सिंगरौली के शासकीय पूर्व माध्यमिक विद्यालय हर्रई पूर्व में साबुन बैंक में अब तक 500 से अधिक साबुन दान में मिली हैं। बच्‍चों ने यहां मास्क बैंक भी बनाया है और सैनिटाइजर की व्यवस्था भी है।

ऐसे तैयार किया साबुन बैंक: उषा दुबे विज्ञान विषय की शिक्षक हैं। पढ़ाई के दौरान छात्रों को वह साफ-सफाई से रहने का पाठ पढ़ाती रहीं। उन्हें लगा कि इन्हें अब साफ-सफाई से बच्चों और ग्रामीणों को भी जोड़ना चाहिए। 2019 में उन्होंने खुद अपने जन्मदिन पर पांच साबुन से साबुन बैंक की शुरुआत की।

इसके बाद छात्र जन्मदिन पर साबुन दान करने लगे। अब तो वे माता-पिता के जन्मदिन, विवाह वर्षगांठ, प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री या अन्य महापुरुषों के जन्मदिन पर साबुन का दान कर रहे हैं। सरकारी स्कूल में कक्षा एक से लेकर आठवीं तक 106 छात्र हैं।

रजिस्टर पर होता है संधारण: साबुन बैंक को लेकर रजिस्टर का संधारण भी किया जाता है। इसकी जिम्मेदारी आजकल स्कूल की सातवीं की छात्रा आंचल भारती संभाल रहीं हैं। बधाों का नाम, दान में मिलने वाली साबुन की संख्या लिखी जाती है। करीब तीन वर्ष में 500 से अधिक साबुन दान में मिली हैं। अभी साबुन बैंक में 100 से अधिक साबुन हैं।

इनके जिम्मे है साबुन बैंक: आठवीं की छात्रा नेहा साकेत और सोनम साकेत की देखरेख में साबुन शौचालय, स्कूल के मुख्य द्वार और वाश बेसिन पर रखी जाती हैं। जब यहां साबुन खत्म हो जाती है तो छात्राएं बैंक से निकाल कर रखती हैं।

कोरोना काल में समझा महत्व: 2019 में साबुन बैंक की शुरुआत हुई। मार्च 2020 में कोरोना का कहर बरपा। करीब 18 महीने बाद स्कूल खुले, तब तक छात्र साबुन से हाथ धोने को लेकर और अधिक सजग दिखने लगे। ऐसे में छात्र-छात्राओं ने साबुन बैंक के महत्व को और अधिक समझा। अब बच्‍चों ने सैनिटाइजर व मास्क बैंक भी तैयार कर लिया है।

अवसर खोज कर करते हैं दान: साबुन दान करने का उत्साह स्कूल के छात्र-छात्राओं के अलावा ग्रामीणों में भी देखने को मिल रहा है। अब लोग अवसर तलाश कर स्कूल में साबुन दान करते हैं। पढ़ाई पूरा कर चुके छात्र-छात्राएं भी साबुन का दान करने स्कूल आते हैं।

इनका कहना है

शासकीय पूर्व माध्यमिक विद्यालय हर्रई पूर्व में करीब तीन वर्ष पहले साबुन बैंक तैयार किया गया था। छात्र-छात्राओं के साथ हम सब भी साबुन दान करते हैं। इसका उपयोग स्कूल के छात्र कर रहे हैं।

-अशोक शुक्ला, बीआरसीसी बैढ़न

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