सागर(नवदुनिया प्रतिनिधि)। शासकीय स्वशासी कन्या स्नातकोत्तर उत्कृष्टता महाविद्यालय में संगीत विभाग एवं नृत्य विभाग के संयुक्त तत्वावधान में भातखंडे जयंती समारोह बड़े हर्षोल्लास के साथ सम्पन्ना हुआ। समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में उस्ताद अलाउद्दीन खां अकादमी भोपाल के पूर्व निदेशक एवं सितार वादक अरूण पल्नीटकर एवं अध्यक्ष के रूप में शासकीय कन्या महाविद्यालय की प्राचार्य डॉ. इला तिवारी मंचासीन थे।

समारोह का शुभारंभ मां सरस्वती के पूजन, अर्चन एवं वंदन से हुआ। संगीत विभाग की छात्राओं ने सुमधुर सरस्वती वंदना एवं गुरू वंदना प्रस्तुत की। नृत्य विभाग अध्यक्ष डा. अपर्णा चाचोंदिया ने स्वागत उद्बोधन में आमंत्रित अतिथियों के व्यक्तित्व पर विस्तृत प्रकाश डाला एवं आज के इस विशिष्ट कार्यक्रम की रूपरेखा प्रस्तुत की। इस अवसर पर सागर के युवा शास्त्रीय गायक प्रियम चतुर्वेदी ने वर्षा ऋतु के अनुरूप राग सूर मल्हार में विष्णु नारायण भातखंडे की रचना रितु बैरी हमारे मध्य लय तीन ताल में कजरी एवं भजन प्रस्तुति कर सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया। आपके साथ व सभी कार्यक्रम तबला पर संगति तेजस पटैल ने एवं हारमोनियम पर संगति कृष्ण कुमार कटारे ने दी। संगीत विभागाध्यक्ष डा. हरिओम सोनी ने पं. विष्णु नारायण भातखंडे के जीवन एवं उनके सांगीतिक योगदान एवं उपलब्धियों को बताया और कहा कि आज उत्तर भारत में प्रचलित शास्त्रीय गायन, वादन, नृत्य में भातखंडे का अतुलनीय योगदान रहा है। आज भातखंडे के कारण ही अनेकों संगीतज्ञों को रोजगार प्राप्त हो रहा है।

संगीत आत्मा की खुराक होता है

मुख्य अतिथि अरूण पल्नीटकर ने कहा कि भातखंडे के समय में शास्त्रीय संगीत की पुस्तकें ना के बराबर उपलब्ध थी। गुरू एवं शिष्य दोनों को संगीत सीखना सिखाना दुस्कर कार्य था, भातखंडे ने इन परेशानियों को समझा एवं विभिन्ना विद्वानों की रचनाओं को एकत्रित करके नोटेशन सहित लिपिबद्ध करके उन्हें पुस्तकों के रूप में संगीत जगत को उपलब्ध करवाया। अध्यक्षीय उद्बोधन में एक्सीलेंस गर्ल्स कालेज की प्राचार्य डा. इला तिवारी ने शास्त्रीय संगीत के प्रति अपने लगाव को उद्धृत करते हुए कहा कि संगीत आत्मा की खुराक होता है, जिससे मन मस्तिष्क सदैव सद्मार्ग पर चलने को अग्रसर रहता है। हमें गर्व है कि हमारा संगीत विभाग एवं नृत्य विभाग महाविद्यालय एवं इसकी छात्राओं के उन्नायन के लिए सदैव तत्पर रहते हैं। समारोह में मंच संचालन एवं आभार व्यक्त डा. प्रेम कुमार चतुर्वेदी ने किया। इस अवसर पर डा. अर्चना भार्गव, डा. रश्मि दुबे, डा. नवीन गिडियन, डा. नरेन्द्र सिंह ठाकुर, डा. एएच अंसारी, डा. अंजना चतुर्वेदी, डा. निशा इंन्द्र गुरू, डा. सुनीता त्रिपाठी उपस्थित थे।

Posted By: Nai Dunia News Network

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