बीना (नवदुनिया न्यूज)। रेलवे की जमीन पर बनाए गए सौर ऊर्जा प्लांट के शुभारंभ कार्यक्रम को लेकर रेलवे ने करीब चार माह तक बड़े स्तर पर तैयारियां की। रेलवे स्टेशन से लेकर फूलबाग स्टेडियम तक रोड के दोनों तरफ रंगीन शीटें लगाई गईं। खंडहर हो चुके रेलवे आवासों का रंग रोगन किया गया। आनन-फानन में सीसी रोड बनाई गई। यहां तक कि रोड के दोनों तरफ लगे पेड़ के तनों को पेंट किया गया। उद्घाटन के नाम पर रेलवे की ओर से लाखों की फिजूलखर्ची की गई। इतना सबकुछ करने के बाद भी प्लांट गुपचुप तरीके से चालू हो गया, यहां तक रेलवे के ही कई अधिकारियों को इसका भनक तक नहीं लगी।

दरअसल पश्चिमी रेलवे कॉलोनी में बीएचईएल ने 1.7 मेगावाट क्षमता का सौर ऊर्जा प्लांट तैयार किया है। प्लांट के शुभारंभ की चर्चाएं चार माह से चल रही हैं। जून के महीने में सुनने में आया था कि रेल राज्य मंत्री प्लांट का शुभारंभ करने आ सकते हैं। इसके चलते रेलवे ने दूसरे सारे काम बंद कर तैयारियां शुरू कर दी थीं। स्टेशन रोड से गायत्री मंदिर तक सड़क के एक-एक गड्ढे को भर दिया गया। रोड के दोनों तरफ लाखों रुपये की रंगीन शीटें लगवाई गई थीं। स्टेशन रोड से सौर ऊर्जा प्लांट तक जल्दबाजी में सीसी रोड बनाया गया। यहां तक कि पेड़ों की कटाई छटाई की गई थी, लेकिन चार माह बीत जाने के बाद भी प्लांट का शुभारंभ करने न तो कोई केंद्रीय मंत्री आए और न रेलवे के कोई बड़े अधिकारी। हैरानी की बात तो यह है कि अब तक प्लांट के औपचारिक शुभारंभ को लेकर अभी तक कोई कार्यक्रम तय नहीं हुआ है। इसके चलते रेलवे सौर ऊर्जा प्लांट चालू कर दिया गया है।

कुछ भी बोलने से डर रहे अधिकारी

प्लांट चालू होने को लेकर रेलवे और बीएचईएल के अधिकारी कुछ भी बोलने से बच रहे हैं। वह सिर्फ यह कह रहे हैं प्लांट अंडर टेस्टिंग है, इसे चालू मान सकते हैं, लेकिन प्रतिदिन बिजली उत्पादन की जानकारी भी देने से बच रहे हैं। वहीं दूसरी ओर रेलवे के विश्वसनीय सूत्रों का कहना है कि प्लांट कई दिन पहले चालू हो चुका है। अब सिर्फ शुभारंभ कार्यक्रम आयोजित करके प्लांट चालू करने की औपचारिकता की जाएगी। इस संबंध में पीआरओ भोपाल मंडल से बात करने की कोशिश की, लेकिन फोन बंद होने से उनसे बात नहीं हो पाई।

प्लांट में तैयार बिजली से चलेंगी ट्रेनें

यह प्लांट अपने आप में इसलिए महत्वपूर्ण है कि प्लांट से तैयार होने वाली बिजली से ट्रेनें चलाई जा रही हैं। प्लांट से प्रतिदिन 1.7 मेगावाट बिजली पैदा होगी। इसे 12 हजार वोल्ट में बदलकर ट्रेन चलाई जाएगी। इससे रेलवे को सालाना लाखों रुपये की बचत तो होगी ही साथ ही परंपरागत ऊर्जा स्रोतों पर भी निर्भता कम करने की दिशा में यह अच्छा विकल्प हो सकता है।

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Posted By: Nai Dunia News Network

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