अनदेखीः बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज में स्वीकृति के एक साल बाद भी कैजुअल्टी मेडिकल ऑफिसरों को नहीं मिल सके भत्ते।

सालों से ड्यूटी कर रहे, स्वीकृत भी है, लेकिन नहीं मिला रात्रिकालीन भत्ता

बीएमसी में दर्जनभर कैजुअल्टी मेडिकल ऑफिसरों को नाइड ड्यूटी व अतिरिक्त ड्यूटी के लिए मिलना था भत्ता।

सागर (नवदुनिया प्रतिनिधि)। बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज शायद पहला ऐसा सरकारी मेडिकल कॉलेज है जहां पर शासन और कार्यपरिषद से स्वीकृति के बावजूद भी कैजुअल्टी में पदस्थ मेडिकल ऑफिसरों को ड्यूटी का भत्ता नहीं मिल सका है। करीब एक साल पहले डीएमई और कॉलेज की कार्यपरिषद से रात्रिकालीन भत्ते और अतिरिक्त ड्यूटी भत्ता स्वीकृत कर देने के निर्देश दिए गए थे। एक साल बीतने के बावजूद आज तक भत्ता भुगतान को लेकर डॉक्टर परेशान हैं। डीन कार्यालय में लगातार चक्कर लगाने के बावजूद भी उन्हें भत्ता नहीं मिल सके।

बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज में कैजुअल्टी मेडिकल ऑफिसरों की कमी और व्यवस्थाएं दुरुस्त रखने के लिए व पदस्थ सीएमओ को प्रोत्साहित करने के लिए अलग से भत्ते देने का प्रावधान किया गया था। इसमें शासन से अनुमति लेकर कार्यपारिषद में रखा गया था। अक्टूबर 2019 में भत्ता देने का आदेश डीन की तरफ से जारी भी कर दिया गया था। इसके लिए तत्कालीन पदस्थ सभी कैजुअल्टी मेडिकल ऑफिसरों के नाइड ड्यूटी और 24 घंटे में डबल ड्यूटी के लिए भत्ते का वैल्युएशन कर सूची बनाकर जारी की गई थी, लेकिन बार-बार डिमांड और आवेदन के बावजूद इनको भत्ता नहीं दिया जा सका।

जनवरी 2018 में मिली थी ईसी की अनुमति

जानकारी अनुसार बीएमसी प्रबंधन ने साल 2018 में 24 जनवरी को ईसी की बैठक में सीएमओ को रात्रिकालीन ड्यूटी और आपातकालीन चिकित्सा प्रतिपूर्ती भत्ते का प्रस्ताव रखा था। जिस पर ईसी ने स्वीकृति प्रदान कर दी थी। इसमें डॉ. उमेश मिश्रा, डॉ. सौरभ शुक्ला, डॉ. पवन गुप्ता, डॉ. धीरज शुक्ला, डॉ. कृष्णदीप साहू, डॉ. कृष्णकुार ओझा, डॉ. जयप्रकाश मिश्रा, डॉ. देवेंद्र कुमार, डॉ. सुरेंद्र कुमार माहौर को अलग-अलग समय में नाइड ड्यूटी के लिए भत्ते का वैल्युएशन कर राशि स्वीकृत कर दी थी। लेकिन अकाउंट शाखा में जाकर यह आदेश अटक गया और भत्ते की राशि का भुगतान नहीं हो सका। जबकि कुछ सीएमओ बीएमसी में नौकरी तक छोड़ चुके हैं।

भत्ते का भुगतान जल्द कर देंगे

सीएमओ को रात्रिकालीन और आपातकालीन ड्यूटी के लिए भत्ते का प्रावधान किया गया था। इसमें शासन व ईसी से अनुमति भी मिल गई थी। भत्ते का भुगतान क्यों नहीं किया जा सका, मामला कहां अटका है, इसको लेकर संबंधितों व लेखा शाखा से जानकारी लेकर भत्ते का भुगतान कराया जाएगा।

- डॉ. जीएस पटेल, डीन बीएमसी सागर

Posted By: Nai Dunia News Network

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