बीना Sagar News । बीना में मोतीचूर नदी के किनारे करीब 60 साल पहले भैयालाल अग्रवाल ने अपनी आय में इजाफा करने बगीचा लगाया था। उन्होंने इस दौर में करीब 300 पौधे लगवाए थे। कुछ सालों बाद यह पौधे फल देने लगे। कई दशक बीत जाने के बाद भी उनके बच्चों और नातियों के लिए यह बगीचा आय का जरिया बना हुआ है। करीब 55 साल गोविंद अग्रवाल इस बगीचे की देखरेख करते हैं। युवा पीढ़ी ने इस बगीचे को सहेजने में रुचि नहीं दिखाई इसके चलते वह थोक फल व्यापारियों को बगीचा ठेके पर दे देते हैं। उन्हें बिना मेहनत के हजारों रुपये मिल जाते हैं और फसल कारोबारी भी हजारों रुपये का मुनाफा कमा लेते हैं।

होटल कारोबारी गोविंद अग्रवाल बताते हैं कि करीब 60 साल पहले उनके दादा भैयालाल अग्रवाल ने मोतीचूर नदी के पास निजी करीब 3 एकड़ जमीन पर अमरूद, आम, कठहल और सीताफल के करीब 300 पेड़ लगाए थे। इनमें से करीब 250 पेड़ आज भी जीवित हैं। यह पेड़ परिवार के लिए अभी भी आय का जरिया बने हुए हैं।

इसमें खासबात तो यह है कि युवा पीढ़ी ने बगीचा को संरक्षति करने में रुचि नहीं दिखाई। दूसरी वह खुद बगीचा की देखरेख करने के लिए समय नहीं दे पाते हैं। सीजन पर फल बेचना तो दूर की बात है। इसलिए वह बगीचा ठेके पर दे देते हैं। फल व्यापारी उन्होंने नकद भुगतान कर देते हैं। यह सिलसिला सालों से चल रहा है।

बगीचे में पसीना बहाए बिना ही अग्रवाल परिवार को निर्धारित आय होती है। इस साल भी बगीचा ठेके पर लेने वाले व्यापारी ने उन्हें करीब 80 हजार रुपये नकद दिए हैं। यह सिलसिला सालों से चल रहे हैं। बगीचे से अग्रवाल परिवार को तो आय होती ही है साथ ही फल व्यापारी भी फेल बेचकर अच्छा मुनाफा कमा लेते हैं।

पेड़ों के बीच में होती है खेती

इस बगीचे की खास बात यह है कि 60 साल पहले सारे पौधे खेत की मेढ पर लगाए गए थे। पेड़ों के बीच में खाली जमीन पड़ी हुई है। इस जमीन पर गोविंद अग्रवाल खेती कराते हैं। दोनों सीजन की फसल बोई जाती है और कुछ जमीन पर सब्जियां उगाई जाती हैं। इसके चलते उन्होंने दो तरफा फायदा होती है। पेड़ ठेके पर देकर शुद्ध आय होती है तो खेतों में फसल पैदा कर मुनाफा लेते हैं।

बच्चे खेत पर जाना नहीं चाहते

होटल कारोबारी गोविंद अग्रवाल बताते हैं कि बगीचे में मेहनत करना तो दूर युवा पीढ़ी बगीचों में जाने से भी परहेज करती है। वह पढ़ाई करके बड़े शहरों में नौकरी करने का मन बना चुके हैं। अगर आज की पीढ़ी बगीचे की देखरेख करती तो पेड़ ठेके पर देने के बजाए मजदूर से सीजन पर फल तुड़वाकर बाजार में बेचते तो चार गुना ज्यादा फायदा मिलता।

Posted By: Nai Dunia News Network

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