दीपक चौरसिया, देवरीकलां।

ग्राम पनजरा का एक 12 वर्षीय किशोर राजेंद्र मुख्यमंत्री की संबल योजना में नाम जुड़वाने के लिए दर-दर भटक रहा है। शासकीय योजनाओं की हकीकत और मानवीय संवेदनाओं को झकझोर देने वाली राजेंद्र की दर्द भरी दास्तान सुनकर किसी की भी आंखें भर सकती हैं, लेकिन सिस्टम में लालफीताशाही इस कदर हावी हो चुकी है कि जिम्मेदारों को इस परिवार की पीड़ा से कोई सरोकार नहीं है।

यह हकीकत है देवरी के ग्राम पंजरा के एक मजदूर परिवार की, जिसके मुखिया लक्ष्मी नारायण पटेल को अगस्त 2019 में संबल योजना के लिए अपात्र घोषित कर दिया गया। कैंसर से जूझते हुए 21 अगस्त 2020 को गरीब मजदूर ने दम तोड़ दिया। उसके बाद परिवार इस कदर बिखरा कि मजदूर का 12 वर्षीय पुत्र अपनी बूढ़ी दादी और दृष्टिहीन चचेरे भाई के साथ रहकर परिवार के मुखिया की जिम्मेदारी निभा रहा है। 7वीं कक्षा में पढ़ने वाला राजेंद्र संबल योजना का लाभ पाने के लिए अपनी टूटी फूटी साइकिल से बार-बार सरपंच, सचिव और जनपद पंचायत देवरी के चक्कर काट रहा है। ग्राम पंचायत सचिव को टाट पट्टी और पन्नाी से बनी झोपड़ी में गरीबी की पीड़ा भोग रहा यह परिवार संबल योजना का पात्र नजर नहीं आ रहा।

मां हुई विक्षिप्त, बहनों को रिश्तेदार ले गए

राजेंद्र के मजदूर पिता की मौत के बाद माता को सदमा लगने से वह विक्षिप्त हो गईं और मायके वाले उन्हें अपने साथ ले गए। दो बहनों में से एक को एक बुआ ले गईं और एक को मामा ले गए। अब 12 साल का लड़का घर का मुखिया है। 85 साल की वृद्ध दादी के साथ रह रहा है और दादी को मिलने वाली वृद्धावस्था पेंशन 600 रुपये से अपना जीवनयापन कर रहा है। इस बालक को पिता की मौत के बाद ना तो संबल योजना और ना ही शासन की किसी अन्य योजना का लाभ मिला। पिछले 4 महीनों से यह मासूम दर-दर की ठोकरें खा रहा है और लोगों से मदद की गुहार लगा रहा है, लेकिन सरकार प्रशासन और गांव के लोग भी उसकी मदद नहीं कर रहे हैं।

दृष्टिहीन भाई और राजेंद्र एक-दूजे के संबल बने

राजेंद्र की दादी के पास उनके बड़े लड़के जगदीश का दृष्टिहीन पुत्र रामकुमार भी रहता है जिसके माता-पिता भी गुजर गए हैं। 23 वर्षीय रामकुमार दृष्टिहीन होते हुए राजेंद्र का संबल बन गया है। दोनों भाई जब अपनी टूटी फूटी साइकिल से सरपंच, सचिव और जनपद पंचायत के चक्कर लगाते हैं तो दृष्टिहीन रामकुमार साइकिल के पैडल चलाता है और 12 वर्षीय राजेंद्र साइकिल का हैंडल संभालता है। यह बालक जिम्मेदारों से गुहार लगाता है कि पिता की मौत के बाद उनका कोई नहीं है। उसे संबल योजना में पात्र घोषित किया जाए या राष्ट्रीय परिवार सहायता योजना का लाभ दिलाया जाए।

पूर्व के सचिव ने अपात्र ठहराया है

लक्ष्मी नारायण पटेल का नाम संबल योजना में पूर्व के सचिव द्वारा अपात्र कर दिया गया है, इसलिए इस योजना का लाभ नहीं मिल पा रहा है, लेकिन अब राजेंद्र को राष्ट्रीय परिवार सहायता योजना के तहत लाभ दिलाने के लिए प्रयास किया जा रहा है।

- विभा शर्मा, वर्तमान सचिव, ग्राम पंचायत सुना पनजरा

दोनों सचिवों को नोटिस जारी किए हैं

संबल योजना मुख्यमंत्री जी की महत्वपूर्ण योजना है आम आदमी को इसका लाभ मिलना चाहिए। पूर्व में सचिव द्वारा आवेदक परिवार को सत्यापन में अपात्र घोषित किया गया था, इस बारे में पंचायत इंस्पेक्टर को भेजकर एक-दो दिन में जांच करा रहे हैं। आवेदक अगर पात्रता में आता है तो उसे संबल योजना का लाभ दिलाया जाएगा। यदि अपात्रता का कारण सही नहीं दर्शाया गया है तो जिस किसी की भी लापरवाही मिलेगी, उसके बारे में जिला प्रशासन को लिखा जाएगा एवं सख्त कार्रवाई की अनुशंसा की जाएगी। दोनों सचिवों को नोटिस जारी किए हैं।

-एसआर मिश्रा, सीइओ, जनपद पंचायत, देवरी।

Posted By: Nai Dunia News Network

नईदुनिया ई-पेपर पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करे

नईदुनिया ई-पेपर पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करे

डाउनलोड करें नईदुनिया ऐप | पाएं मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ और देश-दुनिया की सभी खबरों के साथ नईदुनिया ई-पेपर,राशिफल और कई फायदेमंद सर्विसेस

डाउनलोड करें नईदुनिया ऐप | पाएं मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ और देश-दुनिया की सभी खबरों के साथ नईदुनिया ई-पेपर,राशिफल और कई फायदेमंद सर्विसेस