नगर निगम : बिगड़ा वास्तु सुधारने बनाना था मंदिर, लेकिन बन गए नेताओं-अधिकारियों के बंगले

हेडिंग- निगम ने सबके घर बनवा दिए, लेकिन कार्यालय में भोलेनाथ को आसरा नहीं दे सका!

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मकान, दुकान, बंगले, पीएम आवास सब बना लिए, लेकिन भोलेनाथ को निगम छत नहीं बना पाया

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- महापौर अभय दरे की परिषद के दौरान पांच साल पहले तय किया गया था, उत्तर-पूर्व कोने में मंदिर बनाने पर बनी थी सहमति।

सागर (नवदुनिया प्रतिनिधि)।

नगर निगम सागर कार्यालय भवन वास्तुशास्त्र बिगड़ा हुआ है, इसे भोलेनाथ, भगवान गणेश और शिव परिवार सुधार सकता है। जी हां, नगर निगम में निवर्तमान परिषद के कार्यकाल के दौरान वास्तुशास्त्र सुधारने के लिए उपाय करने का प्रस्ताव बना था। इसमें निगम में उत्तर-पूर्व दिशा में कोने में शिव परिवार की स्थापना और छोटा सा मंदिर बनाने का प्लान बना था, लेकिन असहयोग के कारण परिषद के दौरान नेताओं, अधिकारियों, पार्षदों, कर्मचारियों के मकान, बंगले और यहां तक की पीएम आवास का सैकड़ों को लाभ मिल गया, लेकिन भोलेनाथ को छत नसीब नहीं हो सकी। कई महीनों से यहां मंदिर अधूरा ही पड़ा है।

दरअसल नगर निगम में उत्तर-पूर्व के मुख्यद्वार के बाजू में कुछ जगह खाली पड़ी है और यहां मलबा पड़ा रहता था। वास्तुशास्त्र में यह ईशान कोण कहलाता है और यहां पानी का स्रोत, टैंक या पूजा घर बनाया जाता है। महापौर अभय दरे बिल्डर-कॉलोनाइजर होने के नाते वास्तुशास्त्र को काफी महत्व देते थे। चूंकि नगर सरकार का मुख्यालय होने के नाते निगम कार्यालय भवन के वास्तुशास्त्र पर भी उनकी नजर थी। कुछ छोटे-मोटे उपाय भी उन्होंने कराए थे। सबसे बड़ा उपाय होना था ईशान कोण में सहकारी बैंक के बाजू वाले मुख्यद्वार से सटकर खाली पड़ी जमीन पर भोलेनाथ भगवान व शिव परिवार की स्थापना कराना। यहां 6 बाय 6 फीट में एक छोटा सा मंदिर बनाकर भगवान को विधि-विधान से विराजना था। इसके लिए महापौर, निगमाध्यक्ष, पार्षदों और अधिकारियों में मौखिक सहमति बन गई थी, प्रयास भी हुए, लेकिन मंदिर नहीं बना सके। हालांकि इस दौरान सभी के बंगले, कोठी, मकान, दुकान बन गए। यहां तक कि सरकारी योजना से हजारों पीएम आवास भी बना लिए गए, लेकिन भगवान भोलेनाथ और उनके परिवार को छत मयस्सर नहीं करा सके। आज भी निगम में ईशान कोण में चार पिलर पर सीसी ढालकर चबूतरा अधूरा छोड़ दिया गया है। निगम आयुक्त आरपी अहिरवार इस मामले में अनभिज्ञता जता रहे हैं।

मंदिर सबके सहयोग से बनना था, साथी आगे ही नहीं आए

निगम के ईशान कोण को दुरस्त करने के लिए मुख्यद्वार के पास शिव परिवार की स्थापना व मंदिर बनाने पर सहमति बनी थी। चूंकि मंदिर सबके सहयोग से बनना था, इसमें किसी ने सहयोग ही नहीं किया। मैं अब भी 51 हजार रुपए देने को तैयार हूं। मंदिर बनाने में सबका सहयोग लगना था। मंदिर कोई एक व्यक्ति भी बनवा देता। इसमें प्रशासन का कोई दोष या हस्तक्षेप नहीं था, यह मंदिर निगम परिषद के सदस्यों को बनवाना था। सभी सहयोग करें तो मंदिर तो अब भी बन जाएगा।

- अभय दरे, निवर्तमान महापौर, सागर

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फोटो- 1602 एसए 08 - सागर। निगम के सहकारी बैंक की तरफ वाले मुख्यद्वार के बाजू में अधूरा खड़ा भोलेनाथ के मंदिर का स्ट्रक्चर, इसे निगम परिषद के सदस्यों के सहयोग से बनाया जाना था।

Posted By: Nai Dunia News Network