खुले में रखा गेहूं उठाने नहीं मिल रहे मजदूर, गांव से बुला रहे, नए लोग नहीं कर पा रहे काम

भंडारण की समस्या : कुछ लोग बोरों की छल्ली नहीं लगा पा रहे तो कुछ नहीं कर पाते सिलाई कोरोना का डर

कई मजदूर सदर, विट्ठलनगर में फंसे तो कई डर के कारण नहीं आ रहे

जिले में पहली बार रिकॉर्ड साढ़े 47 लाख क्विंटल से ज्यादा खरीदा गेहं

सागर(नवदुनिया प्रतिनिधि)। कोरोना के डर से जिले के खरीदी केंद्रों में मजदूरों की कमी से लाखों क्विंटल गेहूं खुले आसमान के नीचे पड़ा हुआ है। कलेक्टर दीपक सिंह द्वारा जल्द परिवहन करने जब फटकार लगाई तो कई ठेकेदार अपने स्तर पर गांवों से नए-नए मजदूरों की व्यवस्था करके किसी तरह काम कर रहे हैं, लेकिन कई ऐसे हैं जो न तो छल्ली लगा पा रहे हैं तो कुछ ठीक से सिलाई भी नहीं कर पा रहे हैं।

जिले में पहली बार रिकॉर्ड साढ़े 47 लाख क्विंटल से ज्यादा खरीदी होने के कारण वेयर हाऊस में माल रखने की व्यवस्था नहीं मिली है और इस बीच कोरोना संक्रमण के कारण मजदूर कंटेंनमेंट क्षेत्र में फंस गए हैं। जानकारी के अनुसार सदर बाजार, विट्ठलनगर वार्ड से अधिकांश हम्माल खरीदी केंद्रों में काम करने पहुंचते हैं, लेकिन यहां लगातार कोरोना पॉजिटिव मरीज मिलने के कारण मजदूरों को बाहर नहीं निकलने दिया जा रहा है। इसलिए खरीदी केंद्रों में मजदूर नहीं मिल रहे हैं जिससे कामकाज प्रभावित होने लगा है।

खुले में जितना गेहूं, उससे आधी है भंडारण की व्यवस्था

लॉकडाउन के कारण जिले में अब तक 47 लाख 24 हजार क्विंटल गेहूं की खरीदी हो गई है। इस बार अधिकांश मंडियां बंद होने के कारण किसानों ने समर्थन मूल्य में ही अपनी उपज बेची हैं, जिसके चलते पहली बार रिकॉर्ड खरीदी हो गई है। इस माल में से अब तक 38 लाख 57 हजार गेहूं का परिवहन हो चुका है, लेकिन करीब 8 लाख 67 हजार क्विंटल गेहूं अब भी खुले में रखा हुआ है। इस गेहूं का भंडारण करने के लिए व्यवस्था भी नहीं है। सभी वेयर हाउस भर चुके हैं और सायलो बैग भी लगभग भरने वाले हैं। करीब 4 लाख क्विंटल की व्यवस्था है, लेकिन माल 8 लाख 67 हजार क्विंटल का भंडारण करना है। बादलों के जमघट के साथ बूंदाबांदी होने से माल गीले होने का खतरा भी बना हुआ है।

गांव-गांव तलाश रहे मजदूर, काम करने में भी परेशानी

सदर और विट्ठलनगर में अधिकांश मजदूर छिकने के कारण कुछ परिवहनकर्ता मजदूरों की समस्या को दूर करने के लिए गांव-गांव जाकर मजदूर तलाश रहे हैं। घरेलू कामकाज, दुकानों में काम करने वाले ऐसे लोग जो गांवों में लौट आए हैं ठेकेदार उन लोगों से ही काम करा रहे हैं, ताकि किसी तरह माल उठ सके। इन मजदूरों से बोरे उठाने, एक के ऊपर एक 25 बोरों की छल्ली नुमा स्टैप लगाने, बोरा तुलाई और बारदानों की सिलाई करने का कार्य अच्छी तरह नहीं बन रहा है, जिस कारण कुशल के साथ अकुशल मजदूरों को मिलाकर धीरे-धीरे काम कराया जा रहा है।

मंडियों व साईंखेड़ा परिसर में हो सकता है भंडारण

भंडारण की पर्याप्त व्यवस्था न होने और मौसम को देखते हुए जिले के खरीदी केंद्रों के आसपास की मंडियों के शैड में भंडारण किया जा सकता है। परिवहनकर्ताओं के अनुसार सागर, बीना और खुरई मंडी को छोड़कर कई छोटी मंडियों में खरीदी नहीं हो रही है और न ही डाक होती है, जिस कारण यहां के शैड में माल रखा जा सकता है। इससे प्रशासन को माल का परिवहन करने की भी जरूरत नहीं होगी। वहीं जिले के ऐसे खरीदी केंद्र जहां अब भी 5 से 10 हजार क्विंटल गेहूं खुले में रखा हुआ है वह हटाया जा सकता है।

कई मजदूर कंटेनमेंट क्षेत्र में फंसे

जिले के कई खरीदी केंद्रों में मजदूरों की समस्या बढ़ गई है, जिस कारण उठाव नहीं हो पा रहा है। सदर, बिहारीपुरा, विट्ठलनगर में कोरोना के मामले सामने आने के बाद मजदूर वर्ग काम पर नहीं आ रहा है। सदर में भी कई मजदूर कंटेनमेंट क्षेत्र में फंस गए हैं। इसलिए माल की खरीदी से लेकर उठाव तक प्रभावित हो रहा है।

- संजय सिंह, जिला प्रबंधक, नागरिक आपूर्ति निगम, सागर

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फोटो- 2905एसए 08 सागर। शुक्रवार को आई हल्की बारिश से पीपरा खरीदी केंद्र पर रखा गेहूं गीला हो गया।

Posted By: Nai Dunia News Network

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