नियमों की अनदेखी : कागजों तक सीमित हैं क्रेशर संचालन के नियम, लंबे समय से ग्रामीण परेशान

क्रेशर खदानों का संचालन

नियमों का पालन नहीं करने पर सख्त कार्रवाई करने का है प्रावधान

क्रेशर मालिक रसूखदार होने के कारण लोग नहीं कर पाते विरोध

बीना (नवदुनिया न्यूज)।

क्रेशर खदानों में पत्थरों को तोड़ने के दौरान उड़ने वाली धूल रोकने के लिए प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और एनजीटी (नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल) ने सख्त नियम बनाए हैं। नियमों का पालन न करने सख्त कार्रवाई का प्रावधान हैं। इसके बावजूद तहसील में संचालित क्रेशरों पर इन नियमों का पालन नहीं किया जा रहा है। सारे नियम कागजों तक सिमट कर रह गए हैं।

शहर से महज 7 किलोमीटर दूर बिहरना गांव के पास आधा दर्जन क्रेशर संचालित हो रही हैं। इनमें से कुछ क्रेशर तो गांव से महज 400 मीटर की दूरी पर संचालित हो रही हैं। क्रेशरों से उड़ने वाली धूल गांव तक पहुंच रही है। हवा का रुख गांव की तरह होने पर क्रेशर की धूल घरों तक पहुंच रही है। इससे गांव के लोग लंबे समय से परेशान हैं। पास में ही लगी कृषि भूमि में ब्लास्टिंग के दौरान खदानों के पत्थर पहुंचते हैं। पत्थर के टुकड़े खेतों में गिरने से जमीनें बंजर होती जा रही हैं। क्रेशर मालिक रसूखदार होने के कारण कोई भी खुलकर इनका विरोध नहीं कर पा रहा है। स्थानीय लोगों के लिए क्रेशर सिरदर्द तो बनी ही हैं साथ ही पर्यावरण को भी नुकसान हो रहा है। मशीनों से पत्थर तोड़ने के दौरान उड़ने वाली धूल को रोकने के लिए न तो विंड ब्रेकिंग बॉल बनाई गई है और न ही नियमित रूप से पानी का छिड़काव हो रहा है। इससे हमेशा धूल उड़ती रहती है। इसी तरह बसहारी, गुनगी, गिरोल, देहरी सहित अन्य गांव के पास संचालित क्रेशरों से स्थानीय लोग परेशान हैं।

ब्लास्टिंग से सहम जाते हैं बच्चे

बिहरना गांव के पास समय-समय पर ब्लास्टिंग होती है। धमका इतना तगड़ा होता है कि बच्चे सहम जाते हैं। गांव के कन्छेदी आदिवासी ने बताया कि रात के वक्त ब्लास्टिंग होने पर लोगों की नींद टूट जाती है। कुछ पल के लिए तो ऐसा लगता है जैसे भूकंप आ गया है। इसी तरह प्रताप अहिरवार ने बताया कि कुछ साल पहले गांव के पास सार्वजनिक कुंआ तैयार किया गया था। सीसी से कुआं का बंधान किया गया था। कुंआ तैयार होने के कुछ दिन बाद ब्लास्टिंग से सीसी में दरारें आ गई थीं। इसका कारण सरपंच से लेकर सचिव को भी पता था, लेकिन किसी ने कोई एक्शन नहीं लिया।

क्रेशर के लिए यह हैं बोर्ड के नियम

- क्रेशर को तीन ओर से विंड ब्रेकिंग वॉल से घेरना।

- पत्थर में क्रेसिंग के पूर्व जल छिड़काव करना।

- क्रेशर के चारो ओर पांच मीटर चौड़ी हरित पट्टी का प्लांटेशन करना।

- फाइन डस्ट को तार पोलिंग से ढंकना।

- क्रेशर परिसर के अंदर एप्रोच रोड में दिन में चार बार जल छिड़काव करना।

- वर्कर को नोस मास्क प्रदान करना।

- खदान को फेसिंग कर घेरना।

खनिज विभाग को देखना चाहिए

समय-समय पर खनिज विभाग और प्रदूषण नियंत्र बोर्ड को क्रेशरों का निरीक्षण करना चाहिए। हम दोनों विभागों के अधिकारियों से बात कर निरीक्षण करने भेजेंगे। नियमों का पालन न करने वालों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई होगी।

केएल मीना. एसडीएम, बीना

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1602एसए143. बिहरना में संचालित क्रेशर से उड़ रही धूल।

1602एसए144. ग्रामीम कन्छेदी आदिवासी।

1602एसए145. ग्रामीण प्रताप अहिरवार।

Posted By: Nai Dunia News Network